पीएम गति शक्ति से विकास परियोजनाओं को मिल रही है तेज

उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य परियोजना शुरू होने से पहले ही उसकी जरूरत, उपलब्ध संसाधनों और संभावित बाधाओं का आकलन करना है, ताकि निर्माण के दौरान आने वाली अड़चनों को कम किया जा सके और परियोजनाएं समय पर आगे बढ़ें।
पीएम गति शक्ति की खासियत विभिन्न विभागों से संबंधित सूचनाओं को एक साझा मंच पर उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश ने इस प्लेटफॉर्म पर 29 अनिवार्य डेटा लेयर्स को एकीकृत किया है, जबकि 56 अतिरिक्त विभागीय लेयर्स शुरू या एकीकृत की जा चुकी हैं। इससे किसी क्षेत्र की सड़क, बिजली, परिवहन, भूमि, सामाजिक और अन्य आधारभूत जरूरतों को एक साथ देखते हुए परियोजना की बेहतर योजना तैयार करने में मदद मिलती है।
इस व्यवस्था के प्रभावी उपयोग को लेकर हाल ही में लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों और जिलों के 100 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया। लोक निर्माण, ऊर्जा, यूपीडा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास समेत कई विभागों के अधिकारियों ने परियोजना स्तर पर पीएम गति शक्ति के उपयोग और इसके व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। अब इसका फोकस केवल नियोजन तक सीमित न रहकर परियोजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारने पर है।
प्रदेश में पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत 2,150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 32 से ज्यादा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया गया है। ऐसी परियोजनाओं में कई विभागों और एजेंसियों की भागीदारी होती है। साझा नियोजन से इनके बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और कार्यों में अनावश्यक देरी से बचने में मदद मिल रही है।
पीएम गति शक्ति को परियोजना व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इसके तहत विचार के लिए रखा जाना आवश्यक किया गया है। सभी 75 जिलों में जिला स्तरीय नियोजन व्यवस्था लागू है। 2,000 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि परियोजना नियोजन और निगरानी के लिए 26 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर भी परियोजनाओं की योजना और प्रगति की निगरानी को मजबूत आधार मिला है।
पीएम गति शक्ति का क्रियान्वयन अब विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं में भी हो रहा है। ‘पहुंच’ शिक्षा नियोजन उपकरण, लखनऊ मेट्रो चरण-1बी के संरेखण की योजना और अन्नपूर्णा भवन के लिए भूमि की पहचान इसके उदाहरण हैं। इससे स्पष्ट है कि एकीकृत डेटा का उपयोग केवल बड़े निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, शहरी परिवहन और अन्य सामाजिक जरूरतों से जुड़ी परियोजनाओं में भी किया जा सकता है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, रेल और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों की परियोजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर देखना जरूरी है। साझा मंच पर उपलब्ध जानकारी से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी नई परियोजना का आसपास के मौजूदा और प्रस्तावित बुनियादी ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा और किन सुविधाओं के साथ उसका बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
आज बढ़ती विकास जरूरतों के बीच उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विस्तार जिस गति से हो रहा है, उसमें पीएम गति शक्ति साझा नियोजन और बेहतर निर्णय लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। डेटा, तकनीक और विभागीय समन्वय को एक मंच पर लाकर परियोजनाओं को केवल मंजूरी और योजना के स्तर से आगे बढ़ाकर जमीन पर परिणाम तक पहुंचाने की दिशा में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है।




