रक्तदाता से मरीज तक हर यूनिट की जानकारी सुरक्षित रखने और नमूने सात दिन तक रखने के निर्देश

रक्त के जरिए हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। इसलिए मरीज को चढ़ाए जाने वाले रक्त की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। रक्तदाता से रक्त लेने, उसकी जांच करने, सुरक्षित रखने और मरीज को देने तक हर स्तर पर तय मानकों का पालन होना चाहिए। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) ने दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में मंगाए जाने वाले रक्त और उसके अवयवों की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। आयुक्त एफएसडीए डॉ रोशन जैकब की ओर से बल्क ट्रांसफर से आने वाली रक्त यूनिटों की प्राप्तकर्ता केंद्र पर भी जांच कराने के लिए राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (एनबीटीसी) को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के तहत प्रत्येक खेप की कम से कम एक प्रतिशत यूनिट अथवा प्रति खेप न्यूनतम एक यूनिट, जो भी अधिक हो, की जांच कराने की सिफारिश की गई है। प्रस्ताव है कि यह जांच स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में राजकीय रक्त केंद्र में कराई जाए। इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों से आने वाले रक्त की गुणवत्ता की पुष्टि करना और संक्रमित या निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले रक्त के मरीजों तक पहुंचने का जोखिम कम करना है।
आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश के आदेश पर मार्च 2026 में चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा संचालित 208 रक्त केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। इनमें 55 केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच में संक्रमण परीक्षण, तापमान नियंत्रित भंडारण के अभिलेखों के रखरखाव, तकनीकी स्टाफ, स्वच्छता और रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। विशेष रूप से दूसरे राज्यों से पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी) की बड़ी खेप मंगाने के दौरान जरूरी दस्तावेजों और गुणवत्ता सत्यापन से जुड़ी कमियां मिलीं। इसके बाद ये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
बिना पर्याप्त दस्तावेजों के हो रहा था बल्क ट्रांसफर
निरीक्षण में कुछ रक्त केंद्रों पर बड़ी मात्रा में रक्त मंगाने का लिखित औचित्य, ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन (टीटीआई) जांच रिपोर्ट, डोनर फॉर्म और परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखने के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। दूसरे राज्यों के आपूर्तिकर्ता केंद्रों के लाइसेंस और वहां रक्त संग्रह तथा जांच के निर्धारित नियमों का पालन होने की पुष्टि करना भी चुनौतीपूर्ण पाया गया। बल्क ट्रांसफर के पैकेज पर स्पष्ट पहचान संबंधी जानकारी नहीं होने से भी स्थिति अस्पष्ट हो जाती है। कई बार प्राप्तकर्ता केंद्र के पास रक्त की जांच रिपोर्ट और तापमान नियंत्रित परिवहन के प्रमाण उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में यह सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है कि रक्त भेजने वाले केंद्र ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रक्त एकत्र किया और उसकी जांच की है या नहीं।
बल्क ट्रांसफर की पूर्व सूचना नहीं मिलने से औषधि निरीक्षक प्राप्तकर्ता केंद्र की वास्तविक जरूरत, भंडारण क्षमता और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था की समय पर जांच नहीं कर पाते। रक्त के जरिए गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका को देखते हुए इन कमियों को दूर करना जरूरी है, ताकि रक्त की गुणवत्ता और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
28 अक्टूबर 2015 के एनबीटीसी दिशा-निर्देशों के तहत आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता केंद्रों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। सामान्यतः आपूर्तिकर्ता केंद्र रक्त की संक्रमण जांच के लिए जिम्मेदार होता है, जबकि प्राप्तकर्ता केंद्र मरीज को रक्त देने से पहले क्रॉस-मैचिंग करता है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यूपीएफएसडीए ने प्राप्तकर्ता केंद्र पर भी बल्क ट्रांसफर से आने वाली यूनिटों की गुणवत्ता जांच कराने का प्रस्ताव रखा है।
हर यूनिट के साथ पायलट ट्यूब और टीटीआई रिपोर्ट जरूरी
यूपीएफएसडीए ने 21 अगस्त 2026 को पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी रक्त केंद्रों को निर्देश जारी किए। इनके अनुसार, दूसरे राज्यों से पीआरबीसी की बल्क आपूर्ति लेते समय प्रत्येक यूनिट के साथ मूल रक्त की कम से कम 30 सेंटीमीटर लंबी पायलट ट्यूब यानी तीन सेगमेंट प्राप्त करना अनिवार्य है। प्राप्त यूनिटों में से कम से कम एक प्रतिशत की जांच स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में राजकीय रक्त केंद्र में कराने और उसकी रिपोर्ट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक यूनिट के साथ टीटीआई जांच रिपोर्ट और डोनर फॉर्म की प्रति भी अनिवार्य होगी। फॉर्म में रक्तदान के बाद यूनिट को मूल केंद्र के बाहर उपयोग करने की सहमति दर्ज होनी चाहिए। परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान का रिकॉर्ड, पर्याप्त क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज कैबिनेट और उनके तापमान का रिकॉर्ड दर्ज करने वाले थर्माेग्राफ की जानकारी भी उपलब्ध रखनी होगी। इससे रक्त के सुरक्षित हस्तांतरण और भंडारण की निगरानी की जा सकेगी।




