बलरामपुर में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से सशक्त हो रही ग्रामीण नारी शक्ति

 

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती और आकांक्षी जनपद बलरामपुर में ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक युगांतकारी परिवर्तन आकार ले रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’ (यूपीएसआरएलएम) के माध्यम से संगठित स्वयं सहायता समूहों ने तराई अंचल की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ा है। कभी सीमित दायरे में रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज सूक्ष्म उद्यमों की सफल संचालक बनकर पूरे जनपद के लिए स्वावलंबन का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।जनपद के विकासखंड तुलसीपुर अंतर्गत ग्राम जुवारा और इटवा में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा की गई अभिनव पहल इस जमीनी बदलाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जुवारा की लीला देवी (शिवा स्वयं सहायता समूह) तथा इटवा की गायत्री देवी (महक स्वयं सहायता समूह) ने आपसी समन्वय और सहयोग से ‘ऑन व्हील फास्ट फूड कैंटीन’ की शुरुआत कर ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता का एक अनूठा मॉडल विकसित किया है।
मिशन प्रबंधन एवं जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई महज ₹20 हजार की प्राथमिक वित्तीय सहायता से महिलाओं ने इस गतिशील कैंटीन का ढांचा तैयार किया। सीमित संसाधनों में आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ठेले पर गुणवत्तापूर्ण, पौष्टिक एवं स्वच्छ अल्पाहार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना बनाई गई। इस उद्यम के सुचारु संचालन के लिए समूह के भीतर कार्य और दायित्वों का अत्यंत पारदर्शी और व्यवस्थित विभाजन किया गया है। समूह की सदस्य रीता ने कैंटीन के प्रत्यक्ष विपणन और संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जबकि अन्य सदस्य कच्चे माल की व्यवस्था करने, खाद्य पदार्थों की स्वच्छता सुनिश्चित करने और वित्तीय समन्वय में सक्रिय सहयोग कर रही हैं। श्रम और कौशल के इस सामूहिक उपयोग ने उद्यम की उत्पादकता और निरंतरता को मजबूत आधार दिया है।
खाद्य सामग्री की शुद्धता, प्रामाणिक स्वाद और उचित मूल्य के चलते इस ऑन-व्हील कैंटीन को ग्रामीण उपभोक्ताओं का व्यापक रुझान और समर्थन मिल रहा है। वर्तमान में इस कैंटीन से प्रतिदिन ₹1500 से अधिक की सकल बिक्री दर्ज की जा रही है। समस्त दैनिक परिचालन व्यय निकालने के उपरांत समूह को प्रतिदिन लगभग ₹700 से ₹800 की शुद्ध बचत प्राप्त हो रही है। इस नियमित आय ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की विवशता से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।बाजार की मांग को समझते हुए समूह की महिलाओं ने अपने व्यवसाय को एक गांव अथवा नियत स्थल तक सीमित नहीं रखा है। गतिशील ठेले की सुविधा का लाभ उठाते हुए महिलाएं इटवा और जुवारा के साथ-साथ रेहरा बाजार, नयानगर तथा आसपास के साप्ताहिक ग्रामीण हाटों तक पहुंचकर सेवाएं दे रही हैं। व्यापार के इस सक्रिय तौर से उनके व्यवसाय में निरंतर वृद्धि हो रही है और कार्यशील पूंजी का चक्र निरंतर मजबूत बना हुआ है।
इस सूक्ष्म उद्यम का सबसे उल्लेखनीय पहलू इसका सहयोगात्मक प्रभाव है। इस कैंटीन का लाभ केवल इसका प्रत्यक्ष संचालन करने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दोनों स्वयं सहायता समूहों की अन्य सदस्यों को भी विभिन्न स्तरों पर आय और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। स्थानीय उत्पादों की खपत और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़कर कई अन्य परिवारों को भी अप्रत्यक्ष आजीविका का संबल मिला है।
आकांक्षी जनपद बलरामपुर की भौगोलिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कृषि पर अत्यधिक मौसमी निर्भरता और गैर-कृषि आजीविका के सीमित अवसरों वाले इस क्षेत्र में महिलाओं द्वारा संचालित यह सफल व्यवसाय अन्य वंचित परिवारों में भी नई आशा का संचार कर रहा है। महिलाएं अब अपनी इस आय का उपयोग बच्चों की उच्च शिक्षा, बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर कर रही हैं, जिससे जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार दर्ज हो रहा है।

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