लता मंगेशकर का 56 साल पुराना वह दर्दभरा गीत: हसरत जयपुरी के इन बोलों ने आज भी जिंदा रखी है ‘स्वर कोकिला’ की रूहानी यादें

भारतीय संगीत जगत में ‘स्वर कोकिला’ और ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का नाम एक ऐसी दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है, जिनकी आवाज सदियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में धड़कती रहेगी। लता दीदी ने अपने सात दशक से अधिक लंबे सुनहरे करियर में हजारों ऐसे गीत गाए हैं, जो हर एक मानवीय भावना को छू जाते हैं। उनके गाए रोमांटिक गाने जहां दिलों में प्यार जगाते हैं, वहीं उनके दर्दभरे और विरह वाले नगमे आंखों में आंसू ले आते हैं। आज हम आपको भारत की इस महान गायिका के एक ऐसे ही बेहद ऐतिहासिक, 56 साल पुराने और रूह को झकझोर देने वाले सदाबहार गीत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर और दिलों में जिंदा है।

फिल्म ‘पगला कहीं का’ का वह आइकॉनिक गीत: ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे…’

हम बात कर रहे हैं आज से लगभग 56 साल पहले यानी साल 1970 में रिलीज हुई बॉलीवुड की एक बेहतरीन और संवेदनशील फिल्म ‘पगला कहीं का’ (Pagla Kahin Ka) की। इस फिल्म का एक ऐसा गीत है, जिसने हिंदी सिनेमा के संगीत इतिहास में अमर स्थान हासिल कर लिया है। वह गाना है— ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे…’ (Tum Mujhe Yun Bhula Na Paoge)।

इस गाने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दिग्गज गायक मोहम्मद रफी (Mohammad Rafi) ने भी गाया था, लेकिन लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किए गए इस वर्जन ने जो जादू बिखेरा, उसकी लोकप्रियता आज भी कम नहीं हुई है। लता दीदी की सुरीली और दर्द से भरी आवाज ने इस गाने को अमर बना दिया। इस कल्ट क्लासिक गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार हसरत जयपुरी (Hasrat Jaipuri) ने लिखे थे, जबकि इसका जादुई संगीत उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन (Shankar-Jaikishan) ने सजाया था।

शम्मी कपूर और आशा पारेख की सदाबहार जोड़ी और फिल्म का दर्दनाक प्रसंग

यह गाना रूपहले पर्दे पर उस दौर के मशहूर रोमांटिक हीरो शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) और खूबसूरत अभिनेत्री आशा पारेख (Asha Parekh) पर फिल्माया गया था। हिंदी सिनेमा में शम्मी कपूर को आमतौर पर उनकी ऊर्जावान चाल-ढाल, ‘याहू’ स्टाइल और एक मस्तमौला डांसिंग हीरो के रूप में जाना जाता था, लेकिन ‘पगला कहीं का’ फिल्म और इस गाने ने उनकी स्थापित छवि को पूरी तरह बदल दिया। इस गाने में शम्मी कपूर ने एक बेहद गंभीर, टूटे हुए दिल वाले और दर्द में डूबे प्रेमी की भूमिका को पर्दे पर जीवंत कर दिया था।

फिल्म की कहानी में यह गाना एक बेहद नाजुक और भावनात्मक मोड़ पर आता है। यह गीत जुदाई, बेबसी, तन्हाइयां और पुरानी यादों के उस दर्द को बयां करता है, जिससे उबर पाना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता। जब-जब पर्दे पर लता मंगेशकर की आवाज में यह गीत बजता है, दर्शक खुद को उस दर्द के समंदर में डूबा हुआ महसूस करते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य की पृष्ठभूमि पर आधारित थी फिल्म और शक्ति सामंत का निर्देशन

इस फिल्म का निर्देशन बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर शक्ति सामंत (Shakti Samant) ने किया था। ‘पगला कहीं का’ की कहानी उस दौर के लिहाज से काफी अलग और साहसिक थी, क्योंकि यह मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और पागलखाने की पृष्ठभूमि पर बुनी गई थी।

फिल्म में शम्मी कपूर ने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया था, जो जीवन में मिले गहरे धोखे और मानसिक तनाव के कारण अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है और उसे अस्पताल (पागलखाने) में रहना पड़ता है। फिल्म की यह गंभीर कहानी और उसके ऊपर लता मंगेशकर के इस दर्दभरे गीत ने सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था।

लता दीदी की अंतिम विदाई में भी गूंजा था यह अमर गीत

इस गाने की गहराई और लता मंगेशकर के साथ इसके जुड़ाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब साल 2022 में ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर इस नश्वर दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए विदा हुईं, तब राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम विदाई के दौरान भी इसी अमर गीत के सुर गूंजे थे। उस गमगीन माहौल में जब यह गाना बजा, तो देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बैठे करोड़ों संगीत प्रेमी फफक कर रो पड़े थे। यह इस बात का प्रमाण है कि लता दीदी के गाए गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं थे, बल्कि वे इंसानी भावनाओं का सबसे शुद्ध दस्तावेज थे, जो समय की हर सीमा को लांघकर हमेशा अमर रहेंगे।

Related Articles

Back to top button