इस बार होली पर बन रहा 500 वर्ष बाद ग्रह-नक्षत्रों का संयोग

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अध्यात्म

होली को आप एक दिन शेष रह गया है, लेकिन इस बार होली खेलने वाले कोरोना वायरस की वजह से समाज में दहशत जरूर भरी है लेकिन अबकी होली पर 500 वर्ष बाद गृह-नक्षत्रों का विचित्र संयोग भी बन रहा है। इस बार होली 9 मार्च को है वहीं 10 को खेली जाएगी। इस दौरान गुरु बृहस्पति और शनि अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे।

जिसे सुख-समृद्धि और धन-वैभव के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है। देवगुरु धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। इससे पहले ग्रहों का यह संयोग 3 मार्च 1521 में बना था। देव गुरु बृहस्पति ज्ञान, संतान, गुरु, धन-संपत्‍ति के दाता हैं तो वहीं शनि न्याय के देवता हैं। शनि का फल व्यक्ति के उसके कर्मों के अनुसार मिलता है। होली पर इन दोनों ग्रह की शुभ स्थिति किसी शुभ योग से कम नहीं है।

दोनों ग्रहों की स्थित बेहद शुभ मानी जाती रही है

भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस बार होली पर दोनों ग्रह नक्षत्रों की स्थिति बेहद शुभ मानी जा रही है। होली को प्रेम-सद्भावना, भाईचारा और सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस बार ग्रहों के खास संयोग के कारण रंगों का यह त्योहार सुख-समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद देने वाला होगा।

होली के रंग सभी के जीवन में खुशियां लाएंगे और होलिका दहन से आपके कष्ट दूर होंगे। इसलिए इस बार होली मिलजुकल मनाएं और एक दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भरें। 9 मार्च, सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा, शाम का काल में 06 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।

होलाष्टक पर मांगलिक कार्य अच्छे नहीं माने जाते हैं

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो गई है। इस बार होलाष्टक 3 मार्च से शुरू होकर 9 मार्च तक रहेगी। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य (शादी, विवाह, वाहन खरीदना या घर खरीदना, अन्य मंगल कार्य) नहीं किए जाते हैं।

हालांकि इस दौरान पूजा पाठ करने और भगवान का स्मरण और उनके भजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। भले इस बार कोरोना वायरस को लेकर समाज में डर और दहशत का माहौल हो। फिर भी होली खेलने वालों में उत्साह उमंग छाया हुआ है। हो भी क्यों न होली का त्योहार रंगों का त्योहार जो होता है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है लोग इसे लेकर उत्साहित रहते हैं।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार सबगुरु न्यूज

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