Karnataka Controversy : कबड्डी मैच में 500 रुपये की शर्त लगाकर फंसे गृहमंत्री जी. परमेश्वर, कोर्ट ने FIR दर्ज करने का दिया आदेश

News India Live, Digital Desk: कर्नाटक के गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर (Dr. G. Parameshwara) एक मामूली शर्त (Betting) के चक्कर में कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने मंगलवार (21 अप्रैल 2026) को एक निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए गृहमंत्री और तुमकुरु की उपायुक्त (DC) शुभा कल्याण के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला कबड्डी मैच के दौरान सार्वजनिक रूप से 500 रुपये की शर्त लगाने और उसे स्वीकार करने से जुड़ा है।क्या है पूरा मामला?यह विवाद अक्टूबर 2025 का है, जब तुमकुरु में राज्य स्तरीय कबड्डी टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। 19 अक्टूबर 2025 को विजयपुरा और दक्षिण कन्नड़ की टीमों के बीच फाइनल मैच खेला जा रहा था।शर्त का खुलासा: मैच के दौरान गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने उपायुक्त शुभा कल्याण के साथ 500 रुपये की ‘दोस्ताना’ शर्त लगाई। मंत्री जी विजयपुरा की टीम का समर्थन कर रहे थे।हार और सार्वजनिक स्वीकारोक्ति: मैच में दक्षिण कन्नड़ की टीम ने विजयपुरा को 36-26 से हरा दिया। पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान गृहमंत्री ने माइक पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे डीसी से 500 रुपये की शर्त हार गए हैं और उन्हें यह राशि चुकानी होगी।कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “सट्टेबाजी को बढ़ावा देना अपराध”शिकायतकर्ता एच.आर. नागभूषण ने बेंगलुरु की 42वीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अदालत में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा:”सट्टेबाजी कानूनन प्रतिबंधित है। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से ऐसी गतिविधियों में शामिल होना और उनका प्रचार करना गलत उदाहरण पेश करता है।”अदालत ने तुमकुरु के कोडिगेहल्ली थाना पुलिस को निर्देश दिया है कि वे गृहमंत्री और उपायुक्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू करें।पूर्व अनुमति (Sanction) की जरूरत नहींअदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए सरकार से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट का मानना है कि खेल पर सट्टा लगाना गृहमंत्री या उपायुक्त के ‘आधिकारिक कर्तव्यों’ (Official Duties) का हिस्सा नहीं है, इसलिए वे इस मामले में किसी विशेष संरक्षण के हकदार नहीं हैं।विपक्ष हमलावर, मंत्री की सफाईइस आदेश के बाद कर्नाटक की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्षी दलों ने गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की है, वहीं जी. परमेश्वर के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक ‘मजाक’ और ‘दोस्ताना शर्त’ थी जिसे तूल दिया जा रहा है। फिलहाल, गृहमंत्री ने इस कानूनी आदेश पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन पुलिस अब कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच की तैयारी कर रही है।

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