बॉलीवुड डायरी: जब श्रीदेवी के डांस नंबर के लिए मेकर्स ने की थी नकली बारिश की तैयारी, पर कैमरा ऑन होते ही बरस पड़े ‘मेघा’

भारतीय सिनेमा में जब भी ‘डांसिंग क्वीन’ और लाजवाब एक्सप्रेशन्स की बात होती है, तो जेहन में सबसे पहला नाम रूपहले पर्दे की चांदनी यानी श्रीदेवी का आता है। श्रीदेवी ने अपने लंबे और सफल करियर में कई ऐसे आइकॉनिक डांस नंबर्स दिए हैं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी एक ब्लॉकबस्टर फिल्म के सुपरहिट गाने की शूटिंग के दौरान एक ऐसा कुदरती वाकया हुआ था, जिसने उस पूरे गाने को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया?

दरअसल, शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले निर्देशक और मेकर्स का प्लान कुछ और ही था, लेकिन जैसे ही कैमरा रोल हुआ, मौसम ने कुछ ऐसा साथ दिया कि पूरा का पूरा सीन ही बदल गया। आइए जानते हैं बॉलीवुड के इतिहास से जुड़े इस बेहद दिलचस्प और अनसुने किस्से के बारे में।

फिल्म ‘लम्हे’ का वो सदाबहार मानसून सॉन्ग: ‘मेघा रे मेघा रे’

हम आज जिस आइकॉनिक गाने की बात कर रहे हैं, वह साल 1991 में आई दिग्गज निर्देशक यश चोपड़ा की क्लासिक कल्ट फिल्म ‘लम्हे’ (Lamhe) का मशहूर गीत ‘मेघा रे मेघा रे’ है। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में श्रीदेवी के साथ अभिनेता अनिल कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे।

जब सेट पर हुआ कुदरत का करिश्मा

किस्सा यह है कि इस गाने की शूटिंग के लिए निर्देशक यश चोपड़ा ने पहले से पूरी प्लानिंग कर रखी थी। चूंकि यह एक बारिश का गाना था, इसलिए सेट पर आर्टिफिशियल (नकली) बारिश कराने के लिए वाटर टैंकर और फव्वारे मंगाए गए थे। लेकिन जैसे ही यश जी ने ‘रोल कैमरा, एक्शन’ बोला और श्रीदेवी ने नाचना शुरू किया, अचानक आसमान में काले घने बादल छा गए और सचमुच की मूसलाधार बारिश होने लगी।

कुदरत के इस खूबसूरत करिश्मे को देखकर यश चोपड़ा ने तुरंत अपना इरादा बदल दिया। उन्होंने नकली बारिश की मशीनों को बंद कराया और असली सावन की बूंदों के बीच ही पूरा गाना शूट करने का फैसला किया। असली बरसात के बीच भीगी हुई श्रीदेवी ने अपने हुस्न, बेजोड़ एक्सप्रेशन्स और कमाल के डांस से उस दृश्य में चार चांद लगा दिए।

मांडवा की खूबसूरत वादियों में जीवंत हुआ राजस्थानी लोक संगीत

करीब 4 मिनट लंबे इस गाने की शूटिंग राजस्थान के ऐतिहासिक और खूबसूरत शहर मांडवा (Mandwa) में की गई थी। मांडवा की हवेलियों, रेतीले धोरों और राजस्थानी परिवेश ने इस गाने को एक जादुई विजुअल ट्रीट बना दिया।

  • सांस्कृतिक झलक: यह सिर्फ एक आम फिल्मी गाना नहीं है, बल्कि इसमें राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत की गहरी झलक साफ देखने को मिलती है। यही वजह है कि यह गीत भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अनूठा प्रतीक बन गया।

इन 5 दिग्गजों की जुगलबंदी ने बनाया इसे अमर

इस गाने को आइकॉनिक बनाने के पीछे संगीत और कला जगत के पांच सबसे बड़े महारथियों की कड़ी मेहनत और जुगलबंदी शामिल थी:

  1. लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar): सुर कोकिला लता जी की जादुई और मधुर आवाज ने इस गाने की रूह को छू लिया।

  2. इला अरुण (Ila Arun): इला अरुण की बुलंद और खनकती आवाज ने गाने को विशुद्ध राजस्थानी लोक संगीत का देसी तड़का दिया।

  3. आनंद बक्शी (Anand Bakshi): मशहूर और कालजयी गीतकार आनंद बक्शी ने इस गाने के बेहद खूबसूरत और सीधे दिल में उतर जाने वाले बोल लिखे थे।

  4. शिव-हरि (Shiv-Hari): इस गाने की अमर धुन संगीतकार जोड़ी ‘शिव-हरि’ ने तैयार की थी।

  5. पं. शिवकुमार शर्मा और पं. हरिप्रसाद चौरसिया: संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा और बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के संगीत निर्देशन ने इसमें शास्त्रीय और सुगम संगीत का ऐसा रस घोला कि यह आज भी कानों में मिश्री की तरह घुलता है।

आज भी है बॉलीवुड का ‘बेस्ट मानसून सॉन्ग’

दशकों बीत जाने के बाद भी, जब भी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन और एवरग्रीन सावन या मानसून गीतों (Monsoon Songs) की लिस्ट बनती है, तो श्रीदेवी का यह गाना उसमें शीर्ष पर रहता है। असली बारिश में फिल्माया गया यह सीन और श्रीदेवी का मंत्रमुग्ध कर देने वाला नृत्य आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर कर देता है।

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