आनंदीबेन पटेल के समर्थन में उतरीं कंगना रनौत, अपना ही पुराना किस्सा सुनाकर दिया यह अनोखा तर्क

अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाली फिल्म अभिनेत्री और लोकसभा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने एक नए बयान को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। इस बार कंगना रनौत ने उत्तर प्रदेश की पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता आनंदीबेन पटेल के महिलाओं को लेकर दिए गए एक बयान का खुलकर समर्थन किया है। आनंदीबेन के बयान को सही ठहराने के लिए कंगना ने अपने बचपन का एक बेहद व्यक्तिगत और घरेलू उदाहरण पेश किया है, जिसे लोग काफी अटपटा मान रहे हैं। कंगना ने अपने इस तर्क में भाई और बहन के बीच काम के बंटवारे को लेकर खुलकर बात की है।

आनंदीबेन पटेल ने आखिर ऐसा क्या कहा था जिस पर मचा बवाल

दरअसल, यह पूरा मामला आनंदीबेन पटेल के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने महिलाओं और समाज में उनके पारंपरिक दायित्वों को लेकर अपनी बात रखी थी। इस बयान पर जब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई, तो कंगना रनौत आनंदीबेन के बचाव में सामने आईं। कंगना का मानना है कि पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था और घरेलू कामकाज को हमेशा हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कंगना ने आधुनिकता और परंपरा के बीच के संतुलन को जरूरी बताया है।

कंगना का अजीब तर्क: भाई खेलता था क्रिकेट और मैं चलाती थी चूल्हा

आनंदीबेन पटेल के विचारों से सहमति जताते हुए कंगना रनौत ने अपने अतीत के पन्नों को पलटा। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे छोटी थीं, तब उनके भाई को बाहर जाकर क्रिकेट खेलने और अन्य बाहरी गतिविधियों में शामिल होने की पूरी आजादी थी। वहीं दूसरी तरफ, उन्हें घर के भीतर रहकर मां के साथ हाथ बंटाना पड़ता था और चूल्हा चौका संभालना पड़ता था। कंगना ने तर्क दिया कि इस तरह की व्यवस्था से लड़कियां घर के कामों में दक्ष होती हैं और यह किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं, बल्कि पारिवारिक जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

सोशल मीडिया पर कंगना रनौत के बयान को लेकर छिड़ी नई बहस

कंगना रनौत का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट और जनमानस में दो धड़े बन गए हैं। जहां एक तरफ कंगना के फैंस और पारंपरिक विचारधारा के लोग उनके इस देसी अंदाज और पुराने संस्कारों के प्रति सम्मान की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महिला अधिकारों और लैंगिक समानता (Gender Equality) की वकालत करने वाले लोग इस तर्क की आलोचना कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि 21वीं सदी में जब महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर खेल और बिजनेस तक हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं, ऐसे में चूल्हा-चौका चलाने जैसी रूढ़िवादी बातों को बढ़ावा देना तर्कसंगत नहीं है।

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