‘वीबी-जी राम जी‘ योजना से बलरामपुर में थमा ग्रामीणों का पलायन, स्थानीय आजीविका और विकास को मिली गति

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण श्रमबल के सतत सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार‘ एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात ‘वीबी-जी राम जी‘ ;टठ.ळ त्।ड ळद्ध योजना का प्रभावी और सुनियोजित क्रियान्वयन कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा विधिक रूप से अधिसूचित इस व्यवस्था का मूल ध्येय गांवों से होने वाले मौसमी व बाध्यकारी पलायन को समाप्त कर प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को उसके गृह क्षेत्र में ही सम्मानजनक, सुरक्षित और नियमित आजीविका उपलब्ध कराना है।
इस महत्वपूर्ण योजना के धरातलीय क्रियान्वयन से तराई अंचल में स्थित जनपद बलरामपुर में व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव परिलक्षित हो रहा है। कभी रोजगार की खोज में बड़े शहरों और अन्य प्रदेशों की ओर रुख करने वाले ग्रामीणों को अब अपनी ही ग्राम पंचायत में आजीविका की वैधानिक सुरक्षा प्राप्त हो रही है। जिला प्रशासन की सतत निगरानी और पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
‘वीबी-जी राम जी‘ योजना के अंतर्गत विधिक प्रावधानों को सुदृढ़ करते हुए प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम 125 दिनों की अकुशल मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान की गई है। पूर्ववर्ती व्यवस्था की तुलना में गारंटीकृत कार्यदिवसों में की गई यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक संकटों से सुरक्षा प्रदान करने में निर्णायक सिद्ध हो रही है।
जनपद बलरामपुर में योजना के आंकड़ों से इसकी जमीनी सफलता स्पष्ट रूप से रेखांकित होती है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में अब तक कुल 1,85,238 जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 1,13,454 जॉब कार्ड पूर्ण रूप से सक्रिय श्रेणी में हैं। इन जॉब कार्डों के माध्यम से जनपद भर में 1,23,202 सक्रिय श्रमिक विभिन्न विकासपरक परियोजनाओं से जुड़कर सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

योजना का सर्वाधिक सकारात्मक पक्ष ग्रामीण महिलाओं की उल्लेखनीय और सक्रिय भागीदारी के रूप में सामने आया है। जनपद बलरामपुर में कार्यरत सक्रिय श्रमिकों में 52,819 महिलाएं सम्मिलित हैं। महिलाओं को घर के निकट नियमित कार्य और पारदर्शी मजदूरी मिलने से न केवल उनके आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है, बल्कि परिवार के पोषण, बच्चों की नियमित शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य संबंधी व्यय को पूरा करने में भी वे सक्षम बन रही हैं।
जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव अन्तर्राज्जीय पलायन  पर रोक के रूप में दर्ज किया गया है। अब तक जनपद के 1.23 लाख से अधिक श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर कार्य उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके फलस्वरूप पूर्व में विषम परिस्थितियों में अन्य राज्यों में कार्य करने को विवश लगभग 20 हजार प्रवासी श्रमिक परदेस छोड़कर अपने पैतृक गांव लौट आए हैं और स्थानीय आजीविका से जुड़कर स्वावलंबी बन रहे हैं।
गांव में ही सुनिश्चित मजदूरी मिलने से श्रमिकों को दोहरा लाभ हो रहा है; उन्हें रोजगार के साथ-साथ अपने परिवार की देखरेख, बुजुर्गों की सेवा और कृषि कार्यों को संभालने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है। जनपद के तुलसीपुर क्षेत्र के श्रमिक राजकुमार और महिला श्रमिक प्रमिला के अनुभव इस धरातलीय बदलाव की पुष्टि करते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि गांव में काम उपलब्ध होने से बाहर जाने की मजबूरी खत्म हुई है और नियमित पारिश्रमिक से घर-परिवार के दैनिक खर्च सुगमता से चल रहे हैं।
वीबी-जी राम जी‘ योजना का स्वरूप केवल तात्कालिक मजदूरी भुगतान तक सीमित न रहकर ‘विकसित ग्राम पंचायत कार्य योजना‘ के तहत गांवों में टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित है। जिले की सभी 793 ग्राम पंचायतों में ग्रामीण प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाबद्ध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में जनपद के अंतर्गत कुल 14,149 विकास कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
जनपद में वर्तमान समय में 8,448 विकास कार्य पूरी गति से धरातल पर प्रगति पर हैं, जबकि शेष कार्य तकनीकी प्राक्कलन, स्वीकृति और पूर्णता की निर्धारित औपचारिक प्रक्रियाओं में शामिल हैं। इन परियोजनाओं में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण, वनीकरण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है, जिससे गांव के समग्र विकास को दीर्घकालिक आधार मिल रहा है।

भूजल संवर्धन और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनपद बलरामपुर में मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अमृत सरोवरों की खोदाई, पारंपरिक तालाबों का जीर्णाेद्धार, चेकडैमों का निर्माण तथा जल निकास नालों की गाद सफाई जैसे कार्य व्यापक स्तर पर कराए जा रहे हैं। इन जल संरचनाओं से जहां एक ओर किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए स्थानीय स्रोत मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर में भी निरंतर सुधार दर्ज हो रहा है।
पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने और हरित आवरण के विस्तार के लिए जिले की ग्राम पंचायतों में सघन पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्राम समाज की उपलब्ध भूमि, संपर्क मार्गों की पटरियों और तालाबों की भीटों पर फलदार व छायादार पौधे रोपे जा रहे हैं। इन पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी जॉब कार्डधारक श्रमिकों को सौंपी जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के अतिरिक्त अवसर भी सुनिश्चित हो रहे हैं।
ग्रामीण आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गांवों में पक्के संपर्क मार्गों, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण और ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही कृषि को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक वर्मी-कंपोस्ट इकाइयों, पशु शेड और अनाज सुखाने के लिए खलिहान चबूतरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आय दोनों में संवर्धन हो रहा है।
मजदूरी भुगतान में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुरूप प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था लागू है। श्रमिकों की मजदूरी सीधे उनके आधार-संबद्ध बैंक खातों में समयबद्ध रूप से अंतरित की जा रही है।
योजना के सफल संचालन में ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों की विकेंद्रीकृत भूमिका को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। गांव के विकास की प्राथमिकताएं स्थानीय खुली बैठकों में ग्रामीणों की सहमति से तय की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यों की सामाजिक उपयोगिता और वित्तीय पारदर्शिता की जांच के लिए ग्राम सभा स्तर पर नियमित सोशल ऑडिट की व्यवस्था को दृढ़ता से लागू किया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा बलरामपुर जनपद के सभी विकास खंडों में कार्यों की भौतिक प्रगति और मजदूरी भुगतान की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर गुणवत्ता मानकों का सत्यापन किया जा रहा है। श्रमिकों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर विशेष तंत्र सक्रिय है, जिससे ग्रामीणों का इस व्यवस्था पर विश्वास और सुदृढ़ हुआ है।
प्रदेश सरकार की समावेशी नीतियों और केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी गारंटी योजना के संयुक्त प्रयासों से जनपद बलरामपुर में ग्रामीण जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। स्थानीय स्तर पर 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार, समयबद्ध पारिश्रमिक और मजबूत ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण ने तराई क्षेत्र से होने वाले मौसमी पलायन को थामकर बलरामपुर को आत्मनिर्भरता और समग्र विकास के पथ पर अग्रसर किया है।

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