प्रधानमंत्री जी के संकल्प ‘‘वोकल फार लोकल’’ विजन को उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली पर साकार करके दिखाया: सिद्धार्थ नाथ सिंह

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उत्तर प्रदेश

लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कल्पना को मूर्तरूप देने के लिए पारंपरिक मिट्टी कारीगरों के लिए मार्टी कला बोर्ड का गठन मील का पत्थर साबित हुआ है। देश के प्रधानमंत्री जी के संकल्प ‘‘वोकल फार लोकल’’ विजन को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दीपावली के अवसर पर साकार करके दिखाया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश में इस वर्ष दीपावली के अवसर पर माटीकला शिल्पकारों एवं कारीगरों द्वारा निर्मित गौरी-गणेश की प्रतिमाओं सहित कुल 237.67 लाख रुपये के माटीकला उत्पादों की बिक्री हुई है। जिसमें से 187.35 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री प्रदेश भर में माटीकला बोर्ड द्वारा लगाये गये स्टाल्स पर हुई तथा 50.32 लाख रुपये के उत्पादों बिक्री खादी भवन में आयोजित माटी कला मेला-2020 में हुई है। माटीकला बोर्ड के इन प्रयासांे के फलस्वरूव दीपावली में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियांे का आयात चीन से नगण्य रहा है। इसके देखते हुए माटीकला उत्पादों के विपणन की व्यापक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गये हैं।
यह जानकारी खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर पिछले एक वर्ष से माटीकला शिल्पकार एवं कारीगरों के छोटे व्यवसाय के उत्थान हेतु कारगर योजना के तहत कार्य किया गया। इसी के फलस्वरूप इस प्रकार की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई है और पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के संकल्प को गति मिली है। उन्होंने बताया कि इस दीपावली के अवसर पर जिलाधिकारियों की देख-रेख में जनपदों में माटीकला उत्पादों के स्टाल लगवाये गये थे, जिसमें मुरादाबाद मण्डल बिक्री के मामले में सबसे आगे रहा है, इस मण्डल में 4139875.00 रुपये की गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, दीये एवं अन्य मिट्टी के सजावटी सामानों की बिक्री हुई है। इसके अतिरिक्त अन्य मण्डलों यथा आगरा में  1033720.00 रुपये, अलीगढ़ में 289500.00 रुपये, प्रयागराज में 1302000.00 रुपये, आजमगढ़ में 273000.00 रुपये, बरेली में 1204010.00 रुपये, चित्रकूट में 390200.00 रुपये, देवीपाटन में 663318.00 रुपये, अयोध्या में 736800.00 रुपये, गोरखपुर में 6000430.00 रुपये, बस्ती में 3600000.00 रुपये, झांसी में 646369.00 रुपये, कानपुर में 382025.00 रुपये, लखनऊ में 1380887.00 रुपये, मेरठ में 546350.00 रुपये, सहारनपुर में 121150.00 रुपये, वाराणसी मंे 417900.00 तथा विन्ध्याचल में 1007700.00 रुपये के माटीकला उत्पादों की बिक्री हुई है।
श्री सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर इस दीवाली को वोकल फार लोकल बनाने के लिए माटीकला सामन्वित विकास कार्यक्रम को विशेष प्राथमिकता दी गई और मिट्टी व्यवसाय से जुड़े 24000 परिवारों को मिट्टी निकालने हेतु राजस्व पट्टे आवंटित किये गये। माटीकला टूल-किट्स वितरण योजना के तहत कारीगरों में 2964 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण किया गया है। इसके अतिरिक्त 2300 और इलेक्ट्रिक चाकों का वितरण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही मिट्टी शिल्पकारों को पगमिल, आधुनिक भट्टी, दीया मेकिंग मशीन, स्प्रे पेंटिंग मशीन मय पेंटिंग व्हील तथा गौरी-गणेश की मूतियों के निर्माण हेतु पी0ओ0पी0 मास्टर डाई भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि टूलकिट पाने वाले लाभार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। जिसके फलस्वरूप कौशल वृद्धि के साथ-साथ प्रति परिवार औसत आय में भी दो से तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि उत्पादन में वृद्धि होने से लगभग 10000 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री ने बताया कि शिल्पकारों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैंको के माध्यम से 1415 लाभार्थियों को 4068.26 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया। उन्होंने बताया कि माटीकला कौशल विकास प्रशिक्षण योजना के तहत अब तक 1402 माटीकला शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा 2000 और लाभार्थियों को शिल्पकारी प्रशिक्षण दिये जाने का लक्ष्य है। यही नहीं लखनऊ में 10 करोड़ रुपये की लागत से टेराकोटा ट्रेनिंग कम प्रोडेक्शन फैसेलिटी सेंटर की स्थापना का कार्य प्रक्रियाधीन है, जिससे कारीगरों को एक ही छत के नीचे गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण, उत्पादन एवं तैयार माल के विपणन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

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