त्रिपुरा की योजना 2021-22 तक 3.8 लाख नल कनेक्शन और 2023 तक 100 फीसदी कवरेज प्रदान करने की है

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त्रिपुरा और सिक्किम राज्यों ने आज जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के सामने ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान करने को लेकर अपनी वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की। राष्ट्रीय समिति राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तैयार प्रस्तावित वार्षिक कार्य योजना (एएपी) को मंजूर करने से पहले इसकी गहन जांच करती है। इसके बाद भौतिक एवं वित्तीय प्रगति और नियमित तौर पर क्षेत्र के दौरे के आधार पर एक साल में चार किस्तों में रकम आवंटित की जाती है। वहीं जल जीवन मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वार्षिक कार्य योजना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। सिक्किम और त्रिपुरा विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हैं। इनमें कठिन भौगोलिक क्षेत्र, खराब संपर्क, गांवों की दूरस्थ स्थिति और कार्यों को करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी आदि शामिल हैं।

त्रिपुरा में 8 लाख ग्रामीण परिवार हैं। इनमें से 2.14 लाख (27 फीसदी) घरों में नल जल कनेक्शन है। राज्य की योजना 2023 तक सभी ग्रामीण परिवारों को 100 फीसदी नल कनेक्शन प्रदान करने की है। त्रिपुरा के पास एक अच्छी जल आपूर्ति अवसंचरना है और राज्य के 1,178 गावों में जल आपूर्ति योजनाएं संचालित हैं। राज्य में 2020-21 में 1.42 लाख नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। अब राज्य की योजना 2021-22 में 3.8 लाख नल जल कनेक्शन देने की है। सभी गांवों में 100 फीसदी नल जल आपूर्ति प्रणाली होने से, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर ग्रामीण परिवार को पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के पुनर्निर्धारण/संवर्द्धन पर पूंजीकरण किया जा सकता है, जिससे लोगों के जीवन में सुधार हुआ हो और ‘जीवन जीने में आसानी’ हुई हो।

वहीं उत्तर पूर्वी भारत में हिमालय के गोद में बसे एक छोटे राज्य सिक्किम में लगभग 1.05 लाख परिवार हैं। इनमें से 81,000 (77 फीसदी) के पास नल जल की सुविधा है। इस राज्य में 2020-21 में लगभग 10,300 नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए थे। अब राज्य की योजना साल 2021-22 तक सभी परिवारों को 100 फीसदी नल कनेक्शन प्रदान करने की है। सिक्किम के पास एक अच्छी जल आपूर्ति अवसंचरना है और राज्य के 411 गावों में जल आपूर्ति योजनाएं संचालित हैं।

आज की बैठक में राष्ट्रीय समिति ने मिशन के आधारभूत सिद्धांतों पर जोर दिया। इसके अलावा राज्यों से आग्रह किया कि वे इनका लिखित और भावनात्मक रूप में पालन करें, जिससे ग्रामीण घरों को नियमित एवं दीर्घावधि आधार पर पीने का पानी मिलता रहे। इसके अलावा ग्रामीण कार्य योजना तैयार  करने के साथ-साथ न्यूनतम 50 फीसदी महिला सदस्यों वाली ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/ पानी समिति के गठन को लेकर महत्वपूर्ण पहलुओं को भी रेखांकित किया गया। इस समिति की जिम्मेदारी गांवों में जल आपूर्ति अवसंरचना की योजना, डिजाइनिंग, कार्यान्वयन और संचालन एवं प्रबंधन की है। सभी गांवों को ग्रामीण कार्य योजना (वीएपी) तैयार करना है, जिसमें अनिवार्य तौर पर जल बजट, पेयजल स्रोतों के विकास/संवर्द्धन, जल आपूर्ति, धूसर-जल प्रबंधन और संचालन एवं रखरखाव पहलू शामिल हैं।

इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय ग्रामीण समुदाय को सहायता में विस्तार देने के लिए राज्यों को नागरिक समाज संगठन/स्वयंसेवी संगठन/एसएचजी को कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों के रूप में शामिल करना है। सभी गांवों में जहां कार्यों को क्रियान्वित किया जाना है, वहां के स्थानीय युवाओं के लिए नल-साजी, फिटिंग, बिजली का काम और चिनाई में कौशल प्रशिक्षण का आयोजन किया जाना है, जिससे गांवों में कुशल मानव संसाधन का एक कैडर तैयार हो पाएगा, जिससे न केवल पानी की आपूर्ति के बुनियादी ढांचे के कार्यों के कार्यान्वयन में मदद हो पाएगी बल्कि इसका स्थानीय समुदाय द्वारा नियमित संचालन एवं रखरखाव भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जल के विभिन्न पहलुओं जैसे; जल संरक्षण, स्रोत को मजबूत करना, धूसर जल प्रबंधन, जल गुणवत्ता पहलुओं और व्यक्तिगत स्वास्थ्य से इसके जुड़ाव आदि को लेकर राज्यों को आईईसी अभियान शुरू करने की जरूरत है, जिससे जल जीवन मिशन वास्तविक रूप से लोगों का अभियान बन जाए।

इसके अलावा बैठक में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि सभी पेयजल के स्रोतों की प्रत्यके साल एक बार रासायनिक मापदंडों और दो बार जीवाणुतत्व संबंधी संदूषण (मानसून के पहले और मानसून के बाद) के लिए परीक्षण करने की जरूरत होती है। इसके अलावा क्षेत्र परीक्षण किट (एफटीके) का उपयोग कर जल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कम से कम 5 व्यक्तियों (महिलाओं को वरीयता) के प्रशिक्षण को लेकर भी आग्रह किया गया। वहीं, दोनों राज्यों को अगले कुछ महीनों में सभी जल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं की एनएबीएल मान्यता को पूरा करने के लिए कहा गया।

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केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम जल जीवन मिशन (जेजेएम) को 15 अगस्त, 2019 से राज्यों के साथ भागीदारी में कार्यान्वित किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य सार्वभौमिक कवरेज यानी गांव में प्रत्येक परिवार को उनके घर में नल जल कनेक्शन प्रदान करना है। वहीं ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने और ‘जीवन जीने में आसानी’ बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ मिशन का उद्देश्य कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को निर्धारित गुणवत्ता और नियमित एवं दीर्घावधि आधार पर पर्याप्त मात्रा में पेयजल सुनिश्चित करना है।

2021-22 में जल जीवन मिशन के लिए 50,011 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के बंधित-अनुदानों के तहत 26,940 करोड़ रुपये का उपलब्ध निश्चित निधि आरएलबी/पीआरआई को जल और स्वच्छता एवं राज्यों के हिस्से और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के मिलान के लिए है। इस प्रकार 2021-22 में नल जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की योजना है। इसे बढ़े हुए बजटीय आवंटन से राज्यों को 2020-21 की तुलना में 2021-22 में 2.5 गुना केंद्रीय निधि मिलने की संभावना है।     गांवों में इस तरह के भारी निवेश से विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी तेजी आएगी।

देश में मौजूद कोविड-19 मामलों में वृद्धि पर विचार करते हुए ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ राष्ट्रीय जल जीवन मिशन लगातार काम कर रहा है, जिससे ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं एवं लड़कियों को कठिन मेहनत नहीं करना पड़े।

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