उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मिल रहा है नया विस्तार

देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से एक महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के अनुरूप राज्य में रक्षा उपकरणों और एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां रक्षा उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक औद्योगिक आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित करीब 5,000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 2,000 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। भूमि की उपलब्धता के साथ विभिन्न रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनियों को निवेश के लिए स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे प्रदेश में केवल बड़ी विनिर्माण इकाइयों की स्थापना ही नहीं हो रही, बल्कि उनके आसपास सहायक उद्योगों, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सेवाओं से जुड़े नए अवसर भी विकसित होने की संभावना बढ़ी है।
डिफेंस कॉरिडोर में देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों और संस्थानों की भागीदारी प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता को दर्शाती है। प्रमुख आवंटनों में डीआरडीओ, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, भारत डायनेमिक्स, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, एंकोर रिसर्च लैब्स, एयरोले टेक्नोलॉजीज, डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम्स और एमटेक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से रक्षा उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान, परीक्षण और तकनीकी क्षमताओं के विकास को गति मिल रही है।
कानपुर में स्थापित अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की करीब 500 एकड़ में विस्तारित इकाई इस विकास की प्रमुख कड़ियों में शामिल है। दक्षिण एशिया की बड़ी रक्षा विनिर्माण इकाइयों में शामिल इस मेगा यूनिट के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के उत्पादन की क्षमता को मजबूती मिली है। इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई की स्थापना का प्रभाव केवल प्रत्यक्ष उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके साथ छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा होते हैं। स्थानीय स्तर पर तकनीकी सेवाओं, कल-पुर्जों, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं इससे जुड़ती हैं।




