उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर को मिल रही है रफ्तार
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दूध एक महत्वपूर्ण उद्यम के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार इसे केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय कृषक समृद्धि, रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास के बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूध के उत्पादन से लेकर उसके प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और बाजार तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी सोच के साथ प्रदेश के विभिन्न मंडलों में ‘डेयरी कॉन्क्लेव-स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ की श्रृंखला आगे बढ़ रही है।
मेरठ, आगरा और बरेली के बाद झांसी में आयोजित इस समागम ने बुंदेलखंड सहित चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल में डेयरी क्षेत्र की संभावनाओं को सामने रखा। दीन दयाल ऑडिटोरियम, झांसी में आयोजित कार्यक्रम में दुग्ध उत्पादकों, किसानों, डेयरी उद्यमियों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्र और विशेषज्ञों ने भागीदारी करते हुए यह विचार रखा कि दूध उत्पादन नहीं, बल्कि दूध को बेहतर उत्पाद में बदलकर किसान की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पूरी प्रक्रिया की जाए।
प्रदेश सरकार प्रदेश के झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल कृषि, पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में अपार संभावनाओं के दृष्टिगत इन क्षेत्रों को प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब के रूप में विकसित किये जाने की कार्यवाही कर रही है। सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ दुग्ध प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और डेयरी उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। दूध का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। डेयरी उद्योग उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य एवं खुशहाल उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जन आंदोलन बनाने का कार्य किया जा रहा है।
प्रदेश में डेयरी विकास को गति देने के लिए नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, आधुनिक डेयरी गतिविधियों और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत अब तक लगभग 1,200 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 1,100 लाख रुपये से अधिक का अनुदान दिया जा चुका है। वहीं दुग्ध प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत इन मंडलों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए लगभग 1,350 लाख रुपये की अनुदान राशि अवमुक्त की गई है।
डेयरी क्षेत्र में बढ़ती कारोबारी संभावनाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुग्ध विकास विभाग को अब तक करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल से ही करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। यह निवेश केवल डेयरी इकाइयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दूध के प्रसंस्करण, उत्पादों में विविधता, आधुनिक तकनीक, भंडारण, विपणन और कोल्ड चेन जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
समागम में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के लाभार्थियों ने अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा कीं। इन कहानियों ने यह दिखाया कि योजनाओं का प्रभाव तब और व्यापक हो सकता है, जब किसान पारंपरिक पशुपालन के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक प्रबंधन और बाजार की जरूरतों को अपनाएं। वेटरनरी कॉलेज, आर.एल.बी.सी.यू. झांसी, बांदा कृषि विश्वविद्यालय और कान्हा गौशाला से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की। इससे पशुपालकों और डेयरी से जुड़े लोगों को उत्पादन, पशु प्रबंधन और आधुनिक डेयरी व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
इस आयोजन में विभागीय स्टॉल के साथ पराग, बलिनी, सामर्थ्य, स्टेलर इंडिया, अप्रा डेयरी, नमस्ते इंडिया, भोले बाबा और इंडियन बैंक सहित विभिन्न निजी एवं सहकारी संस्थाओं ने अपने स्टॉल लगाए। यहां डेयरी उत्पादों, आधुनिक तकनीकों और वित्तीय सेवाओं का प्रदर्शन किया गया। इस आयोजन में विभिन्न जनपदों की 22 प्रारम्भिक बहुउद्देशीय दुग्ध सहकारी समितियों के निबंधन के बाद उनके प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। इससे स्थानीय स्तर पर दुग्ध उत्पादकों को संगठित करने और सहकारी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल को गति मिली।
बुंदेलखंड को अक्सर पानी और कृषि की चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन पशुपालन और डेयरी यहां ग्रामीण आय का एक महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। झांसी और आसपास के क्षेत्रों में डेयरी गतिविधियों को आधुनिक तकनीक, निवेश और बाजार से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर विकसित होने से किसान केवल कच्चे दूध के विक्रेता न रहकर दुग्ध उत्पादों की पूरी मूल्य श्रृंखला के सहभागी बन रहे हैं। यही बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनायेगा।
उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को लेकर सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव, सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को मिल रहा सहयोग और सहकारी संस्थाओं का विस्तार इस परिवर्तन को दिशा दे रहे हैं। आने वाले समय में उन्नत गोवंश, गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण, निवेश और मजबूत बाजार व्यवस्था के साथ प्रदेश का डेयरी सेक्टर ग्रामीण समृद्धि का महत्वपूर्ण इंजन बन रहा है और यही उस बड़े संकल्प की दिशा है स्वदेशी उन्नत गोवंश से समृद्ध निवेश तक और किसान की आय से उत्तर प्रदेश खुशहाल प्रदेश बनेगा।




