राष्‍ट्रपति ने स्‍लोवेनिया की यात्रा के आखिरी दिन भारतीय समुदाय और फ्रेंड्स ऑफ इंडिया को संबोधित किया

देश-विदेश

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्लोवेनिया की अपनी यात्रा के आखिरी दिन आज भारतीय समुदाय और फ्रेंड्स ऑफ इंडिया के स्वागत समारोह में भाग लिया। इसका आयोजन स्लोवेनिया में भारत के राजदूत श्री परमजीत मान द्वारा राजधानी लुबियाना में किया गया था।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्लोवेनिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग एक ऐसा प्रिज्म हैं, जिसके माध्यम से स्लोवेनिया के लोग भारत को समझते और देखते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय के कठिन परिश्रम, उनकी सफलता तथा स्थानीय लोगों के प्रति उनके जुड़ाव ने स्लोवेनिया के लोगों में भारत के प्रति सकारात्मक छवि बनाई है।

राष्ट्रपति ने स्लोवेनिया में बसे भारतीयों से स्वदेश आने का अनुरोध किया और कहा कि वे भारत में हो रहे बड़े बदलाव को खुद अपनी आंखों से देखें। उन्होंने कहा कि तकनीकी में दक्ष और वैश्विक रूप से जुड़े, भारत के युवा उद्यमी इस बदलाव में सबसे आगे हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम न्यू इंडिया अर्थात एक ऐसे भारत के निर्माण में स्लोवेनिया में बसे भारतीय समुदाय का समर्थन और भागीदारी चाहते हैं, जहां सभी के लिए प्रगति और समृद्धि हो’।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर स्लोवेनिया के फ्रेंड्स ऑफ इंडिया के लोगों की भारत के रीति-रिवाजों, मान्यताओं और जीवन दर्शन के प्रति लगाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर समझ बनाने में उनकी भूमिका प्रशंसनीय है। राष्ट्रपति ने स्लोवेनिया में भारतीय नृत्य और योग के प्रशिक्षण केन्द्र चलाने, आयुर्वेद के केन्द्र खोलने तथा भारतीय व्यंजनों वाले रेस्त्रां चलाने के लिए भी फ्रेंड्स ऑफ इंडिया के प्रयासों की सराहना की।

इससे पहले, कल 16 सितंबर को राष्ट्रपति ने लुबियाना में भारत-स्लोवेनिया बिजनेस फोरम को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि आज का भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है। ऐसे में स्लोवेनिया की कंपनियों को भारत में कारोबार के लिए बेहतर माहौल मिलेगा। विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता सूचकांक में भारत पिछले पांच वर्षों में 65 पायदान ऊपर पहुंच चुका है। वस्तु एवं सेवाकर जैसे बड़े आर्थिक सुधार से एक अरब 30 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत में बड़ा बदलाव आया है। इतिहास में पहली बार एक राष्ट्र, एक टैक्स और एक बाजार की व्यवस्था बनी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में बुनियादी ढाँचा परिदृश्य तेजी से प्रगति कर रहा है। हाईस्पीड रेलवे से लेकर देश व्यापी एक्सप्रेसवे तक की अगली पीढ़ी की परियोजनाओं को तेजी से क्रियान्वित किया जा रहा है। ई-कॉमर्स, ई-सेवाओं और फिनटेक क्षेत्रों को डिजिटल कनेक्टिविटी से बल मिल रहा है। भारत का रुपे भुगतान कार्ड अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गहरी पैठ बना रहा है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समुदाय ने भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए अपना पसंदीदा स्थान चुनकर इन बदलावों पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। श्री कोविंद ने कहा कि 2018-19 में देश में 44.3 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ। भारतीय उद्योग भी व्यापार, प्रत्यक्ष निवेश या फिर संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से पूरी दुनिया में अपनी पहुंच बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और स्लोवेनिया दोनों के पास अपनी आर्थिक ताकत है, जो आपसी विकास और समृद्धि के लिए एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्लोवेनिया के पास उच्च प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार, स्मार्ट समाधान और छोटे पैमाने पर सटीक विनिर्माण की क्षमता है। स्लोवेनिया की विशेषज्ञता रणनीति और भारतीय विकास साझेदारी के एक नए युग की शुरूआत कर सकते हैं। श्री कोविंद ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि स्लोवेनिया हमारे प्रमुख कार्यक्रमों- मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, स्टार्ट-अप इंडिया और डिजिटल इंडिया में सहयोग करे। हम पर्यावरण के क्षेत्र में स्लोवेनिया के जानकारों का लाभ उठाना चाहते हैं। हम शहरी बुनियादी ढांचे और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में भी स्लोवेनिया से बहुत कुछ सीखने के उत्सुक हैं’।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्लोवेनिया अपने विकास के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी, फार्मा, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, ऑटो मोबाइल, आयुर्वेद, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भारत की दक्षता का लाभ उठा सकता है।

राष्ट्रपति ने कल स्लोवेनिया के नेशनल एसेम्बली के अध्‍यक्ष श्री देजान जिदान से भी भेंट की। राष्ट्रपति आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और स्लोवेनिया की अपनी यात्रा समाप्त कर 17 सितंबर, 2019 की शाम को  स्वदेश रवाना हो जाएंगे।

Related posts

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 09.06.2017 को 46.69 अमेरिकी डॉलर रही

प्रधानमंत्री ने पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री से बात की; भूकंप के कारण मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त की; भारत से हर संभव सहायता की पेशकश की

भारत ने जेनेवा में आयोजित बेसल, रॉटरडैम और स्टॉकहोम कन्वेंशनों की सीओपी बैठकों में अपना रुख स्थापित किया