टिड्डी नियंत्रण गतिविधियों में नया आयाम जुड़ा – राजस्थान में जैसलमेर जिले के 65 आरडी बांदा क्षेत्र में बेल हेलिकॉप्टर के साथ लक्षित क्षेत्रों में रासायनिक छिड़काव शुरू

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नई दिल्ली: टिड्डियों के हमलों से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए टिड्डी नियंत्रण अभियान जारी है। टिड्डी नियंत्रण गतिविधियों में कल (04.07.2020) एक नया आयाम जोड़ा गया। राजस्थान में जैसलमेर जिले के 65 आरडी बांदा क्षेत्र में बेल हेलिकॉप्टर पहली बार टिड्डी नियंत्रण के काम पर लगा और लक्षित क्षेत्रों में रासायनिक छिड़काव का अपना मिशन पूरा किया। इस तरह टिड्डी नियंत्रण प्रयासों में अब तेजी आ गई है।

11 अप्रैल, 2020 से 3 जुलाई, 2020 तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लोकल सर्किल कार्यालयों (एलसीओ) द्वारा 1,35,207 हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रण कार्य को पूरा किया गया। 3 जुलाई, 2020 तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार में राज्य सरकारों द्वारा 1,13,215.5 हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रण कार्य को पूरा कर दिया गया है।

3 – 4 जुलाई, 2020 की दरम्यानी रात में राजस्थान के 6 जिलों – जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, और दौसा के 25 स्थानों और उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में दो स्थानों पर लोकल सर्किल कार्यालयों (एलसीओ) द्वारा टिड्डी नियंत्रण अभियान चलाया गया। इसके अलावा, टिड्डियों के छोटे-छोटे समूहों को खत्म करने के लिए 3 – 4 जुलाई, 2020 की दरम्यानी रात में उत्तर प्रदेश के झांसी और महोबा जिलों में 4 स्थानों पर और राजस्थान के भरतपुर में 2 स्थानों पर राज्य कृषि विभागों द्वारा नियंत्रण अभियान चलाया गया।

गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और हरियाणा में फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, राजस्थान के कुछ जिलों में फसलों को कुछ मामूली नुकसान हुआ है।

राजस्थान राज्य के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, दौसा तथा भरतपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी और महोबा जिलों में अपरिपक्व गुलाबी टिड्डियों और वयस्क पीली टिड्डियों के झुंड सक्रिय हैं।

  1. बेल हेलीकॉप्टर जैसलमेर में टिड्डे नियंत्रण अभियान पर पहली निकलने के लिए तैयार हो रहा है।
  2. राजस्थान में टिड्डी नियंत्रण अभियान के लिए नियंत्रण वाहनों / टीमों का बेड़ा,
  3. जोधपुर के फलोदी में रासायनिक छिड़काव करते ड्रोन
  4. राजस्थान के दौसा में एक खेत में पड़े टिड्डियों के शव

 अन्य जानकारी:

  • अभी राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छिड़काव वाहनों के साथ 60 नियंत्रण टीमों को तैनात किया गया है और टिड्डी नियंत्रण कार्यों में केंद्र सरकार के 200 से अधिक कर्मचारी लगे हुए हैं। इसके अलावा, राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और फलोदी में ऊंचे पेड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में कीटनाशकों छिड़काव के माध्यम से टिड्डियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 12 ड्रोन के साथ 5 कंपनियों को तैनात किया गया है। भारत दुनिया का ऐसा पहला देश है जो टिड्डी नियंत्रण के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहा है।
  • 21 मई, 2020 को एमओसी ने विभिन्न नियमों और शर्तों के अधीन टिड्डियों पर नियंत्रण पाने का अभियान चलाने के लिए दूर से संचालित होने वाली एयर क्राफ्ट सिस्टम के उपयोग के लिए सरकारी संस्थान को सशर्त छूट दी। इसके बाद 27 जून, 2020 को एमओसीए ने इन नियमों और शर्तों में कुछ और ढील देते हुए 50 किग्रा तक के इंजन-संचालित ड्रोन का उपयोग करने और टिड्डियों पर नियंत्रण कार्यों के लिए रात के समय में भी ड्रोन का उपयोग करने की अनुमति दी।
  • 03.07.2020 के खाद्य एवं कृषि संगठन के टिड्डी स्टेटस अपडेट के अनुसार, मॉनसून की बारिश से पहले भारत-पाक सीमा की ओर जाने वाले वसंत ऋतु में पैदा हुए टिड्डियों के कई झुंडों में से कुछ भारत के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में पहुंचे हैं और कुछ समूह नेपाल तक पहुंच गए। ऐसा पूर्वानुमान है कि मॉनसून की शुरूआत के साथ टिड्डियों का ये समूह राजस्थान लौटेगा और ईरान और पाकिस्तान से अब भी आ रहे अन्य टिड्डियों के समूहों के साथ मिल जाएगा। इनके जुलाई के मध्य के करीब अफ्रीका के हॉर्न से आ रहे टिड्डियों के समूह के साथ मिल जाने की संभावना है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर टिड्डियों में प्रजनन समय से पहले ही शुरू हो चुका है, जहां जुलाई में टिड्डियों के पर्याप्त बच्चे हो जाएंगे जो अगस्त के मध्य में गर्मियों के मौसम में पैदा होने वाले टिड्डियों के झुंड के रुप में सामने आएंगे।
  • दक्षिण-पश्चिम एशियाई देशों (अफगानिस्तान, भारत, ईरान और पाकिस्तान) के रेगिस्तानी टिड्डियों पर खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा साप्ताहिक वर्चुअल बैठक आयोजित की जा रही है। अब तक दक्षिण पश्चिम एशियाई देशों के तकनीकी अधिकारियों की 15 वर्चुअल बैठकें हो चुकी हैं।

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