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रक्षा मंत्रालय की ओर से रक्षा उद्योग में नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों की संस्‍कृति को बढ़ावा

नई दिल्ली: ‘मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति’ (एमआरजीएस) को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम के बौद्धिक संपदा सुविधा प्रकोष्ठ (आईपीएफसी) के बीच 9 जुलाई को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। आईपीएफसी और एनआरडीसी के बीच साझेदारी से भारतीय रक्षा उद्योग में नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में रक्षा मंत्रालय के प्रयासों को प्रोत्साहन देने के साथ ही इन प्रयासों में किसी तरह की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।

भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार की  संस्कृति को विकसित करने के उद्देश्य से मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति की शुरुआत की गई थी। इस मिशन के तहत, गुणवत्‍ता आश्‍वासन महानिदेशालय (डीजीक्‍यूए) के तत्वावधान में एक बौद्धिक संपदा सुविधा प्रकोष्ठ  की स्थापना की गई है, जिसने एक साल के भीतर ही 12,000 से अधिक कर्मियों को आईपीआर का प्रशिक्षण देने का  चुनौतीपूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और उन्हें 1000 से अधिक नए आईपीआर आवेदन दाखिल करने का अवसर प्रदान किया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति  की कार्य योजना 2019-20 को भी मंजूरी दी गई है, जिसमें सार्वजनिक / निजी क्षेत्र के साथ ही सशस्त्र बलों के अतिरिक्त 20,000 कर्मियों को भी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में बैाद्धिक संपदा  संस्कृति की प्रासंगिकता से अवगत कराना और प्रशिक्षित करना तथा रक्षा क्षेत्र को नए विचारों और नवाचार का भरपूर इस्‍तेमाल कर आत्मनिर्भर बनाने  के लिए एक विस्‍तृत रूप रेखा तैयार करना भी है।

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