फिरोजाबाद में पशुपालन उद्यमिता से समृद्ध होता युवाओं का जीवन
केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी एवं स्वरोजगार योजनाओं का सीधा लाभ अब ग्रामीण अंचल तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है। शासन की विकासपरक नीतियों के फलस्वरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिल रहा है और पारंपरिक पशुपालन क्षेत्र एक लाभकारी व्यावसायिक उद्यम के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘राष्ट्रीय पशुधन मिशन‘ (एनएलएम) का सघन एवं प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में पशुधन क्षेत्र को जीवन निर्वाह के लिए खेती की सीमाओं से आगे ले जाकर युवाओं को उद्यमिता से जोड़ना और ग्रामीण स्तर पर सतत आजीविका का सृजन करना है।
सरकारी नीतियों और योजना के जमीनी प्रभाव को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद क्षेत्र में ग्राम मईयामई निवासी गौरव प्रताप की सफलता में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। गौरव प्रताप ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और शासन की वित्तीय सहायता के समन्वय से आधुनिक पशुपालन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया है। योजना से जुड़ने से पूर्व गौरव प्रताप का परिवार गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। आय के किसी नियमित और स्थिर साधन के अभाव में पारिवारिक जीवन में अनिश्चितता बनी हुई थी, जिसका सीधा प्रभाव बच्चों की उचित शिक्षा-दीक्षा और बुनियादी जरूरतों पर भी पड़ रहा था। आर्थिक तंगी से उबरने और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प के साथ उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत आधुनिक बकरी पालन फार्म स्थापित करने का निर्णय लिया। इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर उन्होंने आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रियाओं को पूर्ण किया। परियोजना की स्थापना के लिए बैंक के माध्यम से कुल एक करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इसके सापेक्ष केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के योजनागत प्रावधानों के अंतर्गत उन्हें 41 लाख 4 हजार रुपये की पूंजीगत वित्तीय सहायता (सब्सिडी) प्रदान की गई।
परियोजना लागत पर मिली इस महत्वपूर्ण सब्सिडी ने बैंक ऋण के एक बड़े हिस्से को कम कर दिया। वित्तीय भार कम होने से उद्यम के समक्ष आने वाला प्रारंभिक जोखिम काफी हद तक समाप्त हो गया और व्यवसाय को आरंभिक दौर में ही आवश्यक वित्तीय मजबूती मिल गई। ऋण का भार कम होने से गौरव प्रताप को फार्म के सुचारु प्रबंधन और उन्नत तकनीकों के प्रयोग का अवसर मिला। उन्होंने फार्म में वैज्ञानिक विधियों, उन्नत नस्ल के पशुओं के रखरखाव और समुचित पोषण प्रबंधन को प्राथमिकता दी, जिससे उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि हुई। वर्तमान में इस बकरी फार्म का संचालन अत्यंत व्यवस्थित और व्यावहारिक रूप से किया जा रहा है। फार्म के दैनिक एवं मासिक परिचालन संबंधी खर्चे बकरी के दूध और जैविक खाद (मैंगनी) की नियमित बिक्री से आसानी से पूरे हो जाते हैं, जिससे कार्यशील पूंजी की समस्या नहीं आती। इसके अतिरिक्त, वर्ष भर में त्योहारों एवं प्रमुख विपणन अवसरों पर बकरों की मांग बढ़ने पर होने वाली बिक्री से फार्म को प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख रुपये तक का शुद्ध वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। इस निरंतर और सुरक्षित आय ने फार्म को एक स्वावलंबी इकाई बना दिया है।
इस उद्यम ने न केवल एक परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन का ठोस माध्यम भी प्रस्तुत किया है। वर्तमान में इस फार्म के माध्यम से क्षेत्र के 10 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है, जिससे उनके परिवारों को भी आजीविका मिल रही है। आर्थिक स्थिरता मिलने से गौरव प्रताप के पारिवारिक जीवन में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन आया है। परिवार अब आर्थिक चिंताओं से पूर्णतः मुक्त है और बच्चों को बेहतर विद्यालयीन शिक्षा तथा अनुकूल शैक्षिक परिवेश उपलब्ध हो पा रहा है। गौरव प्रताप अपनी इस उपलब्धि पर बताते हैं कि जब व्यवसाय की शुरुआत में शासन-प्रशासन की ओर से सुगम वित्तीय और तकनीकी सहयोग मिल जाता है, तो उद्यमी की कठिनाइयां काफी हद तक घट जाती हैं। बैंक ऋण का बड़ा हिस्सा सब्सिडी के रूप में समायोजित होने से बहुत बड़ा संबल और मानसिक सुकून प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सफलता का संपूर्ण श्रेय केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियों तथा जिला प्रशासन के सकारात्मक सहयोग व मार्गदर्शन को दिया है, जिनकी देखरेख में योजना का लाभ बिना किसी बाधा के उन तक पहुंचा।
प्रदेश में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत नस्ल सुधार, पशु आहार व चारा विकास तथा आधुनिक उद्यमिता संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह मिशन प्रदेश के पशुपालकों को परंपरागत तौर-तरीकों से निकालकर आधुनिक कारोबारी सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूअर पालन और ग्रामीण कुक्कुट (पोल्ट्री) विकास की उन्नत इकाइयां स्थापित करने के लिए व्यक्तिगत उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक का पूंजीगत अनुदान (अधिकतम 50 लाख रुपये तक) उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवेदन प्रक्रिया, जांच एवं स्वीकृति की संपूर्ण व्यवस्था को केंद्रीय डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित किया गया है। इसके माध्यम से उद्यमी घर बैठे आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं।
बैंकों से ऋण लिंकेज और सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए बैक-एंड सब्सिडी जारी होने से पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है, जिससे वास्तविक लाभार्थी को नियमानुसार पूरी धनराशि का लाभ मिल रहा है। पशुधन के सतत विकास के लिए चारा सुरक्षा को भी मिशन में प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत साइलेज निर्माण, फॉडर ब्लॉक और उन्नत चारा बीज उत्पादन इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि पशुपालकों को वर्ष भर पोषक आहार सुलभ हो सके।




