बुनकरों की आंख की जांच के लिए लगेंगे शिविर, दिये जायेंगे चश्में: सिद्धार्थ नाथ सिंह

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उत्तर प्रदेश

लखनऊ: प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम व वस्त्र उद्योग मंत्री श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने निर्देशित किया है कि हैण्डलूम एवं पावरलूम बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए स्वतंत्र फीडर स्थापित करने की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाये। बुनकरों को सम्मानित करने के लिए बुनकर पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया जाये। उन्होंने कहा कि डी0बी0टी0 के माध्यम से हैण्डलूम वीवर्स अनुदान सीधे बुनकरों के खाते में भेजी जाये। उन्होंने कहा कि हथकरघा उद्योग के सभी उत्पादों की मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के लिए इसे ओ0डी0ओ0पी0 योजना से भी जोड़ा जाये तथा इस योजना को मिलने वाली सुविधाएं हैण्डलूम एवं पावरलूम उत्पाद को भी मिले इसके प्रयास किये जाये।
खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह आज योजना भवन में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग तथा रेशम उद्योग की प्रगति कार्यों की समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हथकरघा उद्योग में गुणवत्ता आये, इसके लिए प्रत्येक क्लस्टर को अच्छी बिजली मिले, इस संबंध में प्रस्ताव बनायें और एक साल के भीतर प्रदेश के सभी बुनकरों को निर्बाध बिजली दी जाये। उन्होंने कहा कि हथकरघा उद्योग परम्परागत उद्यम है। इसलिए प्रदेश के बुनकरों को योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए माहौल बनाया जाये तथा प्रदेश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बुनकरों की आय में वृद्धि हेतु इनके चिन्हांकन के लिए सर्वे कराया जाये और 15 दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाये। उन्होंने निर्देशित किया कि बुनकरों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराने में तेजी लाने के लिए बैंकों से समन्वय स्थापित किया जाये।
श्री सिंह ने कहा कि हथकरघा उद्योग के उत्पादों की मार्केंटिंग के लिए कोई दिक्कत ना हो, इसकी आॅनलाइन बिक्री पर भी जोर दिया जाये। इसकी प्रदर्शनी में गुणवत्ता का विशेेष ध्यान दिया जाये, जिससे लोग प्रोत्साहित एवं आकर्षित हों। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की अधिक से अधिक ब्रांडिंग की जाये क्योंकि इनकी ब्रांडिंग कम होने से हमारे देश के हैंडलूम समानों की कीमत कम है जबकि अन्य देशों के हैंडमेड समानों की कीमत अधिक है। उन्होंने कहा कि हैंडमेड अच्छे उत्पाद तैयार किये जा सके, इसके लिए कार्यक्रमों में डिजाइनर और मैन्यूफैक्चरर का एक साथ विजिट भी करायें। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों तथा उद्योग समूहों से वर्चुअल मीटिंग करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बरेली में टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए प्रमोटर्स की जरूरतों एवं समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि बुनकरों की आंख की जांच कराने के लिए शिविर लगाये जायें और आवश्यकतानुसार चश्मा भी वितरित किये जायें।
रेशम एवं वस्त्रोद्योग मंत्री ने रेशम विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि रेशम उत्पादन योजना का लाभ इच्छुक किसानों तक ले जाया जाये, जिससे कल्टीवेशन एवं प्रोडक्शन बेहतर हो और दूसरे राज्यों से आने वाले माल की खपत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि 2700 मीट्रिक टन रेशम उत्पाद अन्य प्रदेशों से आ रहा है, इसकी भरपाई के लिए प्रदेश का 300 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन में वृद्धि की जाये। उन्होंने रेशम कीट उद्यानों एवं नर्सरी के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए और कहा कि अधिकारी अपनी कार्यशैली बदलें और अधिक से अधिक पात्र किसानों को लाभान्वित करायें।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग तथा रेशम श्री रमारमण, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग श्री गोविन्द राजू एन.एस. तथा निदेशक रेशम श्री नरेन्द्र कुमार पटेल सहित विभाग के परिक्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित थे।

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