यूपी में एक्सप्रेसवे का महा-नेटवर्क: आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होंगे सीधे कनेक्ट, जेवर-झांसी लिंक को भी हरी झंडी

उत्तर प्रदेश को देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के अलग-अलग एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक विशाल 'एक्सप्रेसवे महाग्रिड' बनाने के लिए 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं (डेवलपर्स) के चयन और निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा – UPEIDA) द्वारा ईपीसी (EPC) मोड पर विकसित किए जाने वाले इन चारों प्रोजेक्ट्स पर लगभग ₹17,542.06 करोड़ की लागत आएगी। इस ऐतिहासिक फैसले से पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्यांचल और पूर्वांचल के बीच दूरी सिमट जाएगी और पूरा राज्य बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से बंध जाएगा।
1. आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: लखनऊ को मिलेगा जाम से छुटकारा
इस पूरे पैकेज का सबसे अहम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे है।
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लंबाई और लागत: यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर लगभग 51 किलोमीटर लंबा होगा, जिस पर करीब ₹4,776 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
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सीधा फायदा: अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली या आगरा से पूर्वांचल (गाजीपुर, आजमगढ़, बिहार सीमा) जाने वाले भारी वाहनों और मुसाफिरों को लखनऊ शहर के अंदर से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे शहीद पथ, सुलतानपुर रोड और मोहनलालगंज के इलाकों में भीषण जाम लगता था। इस 51 किमी के लिंक एक्सप्रेसवे के बनने के बाद गाड़ियां सीधे बाईपास होकर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगी। इससे आगरा से सीधे बिहार बॉर्डर तक बिना किसी रुकावट के यात्रा संभव होगी।
2. जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे का सीधा जुड़ाव
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े एविएशन हब को प्रदेश के पूर्वी छोर से जोड़ने के लिए जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को पास किया गया है।
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लंबाई और रूट: लगभग 74 किलोमीटर लंबी यह परियोजना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सीधे यमुना एक्सप्रेसवे और बुलंदशहर के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी।
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लॉजिस्टिक्स और कार्गो को संजीवनी: इस लिंक के तैयार होते ही जेवर एयरपोर्ट का एयर कार्गो और पश्चिमी यूपी का औद्योगिक माल सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज, वाराणसी और पूर्वांचल तक बेहद कम समय और कम लागत में पहुंच सकेगा। इससे माल ढुलाई की लागत (Logistics Cost) में भारी कमी आएगी।
3. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर और पर्यटन को नई रफ्तार
बुंदेलखंड के विकास को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कैबिनेट की अंतिम मुहर लग चुकी है।
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लंबाई और कनेक्टिविटी: लगभग 115 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे झांसी शहर को सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
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डिफेंस और टूरिज्म को लाभ: इस लिंक के बनने से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के झांसी नोड में निवेश करने वाली रक्षा कंपनियों को सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही झांसी का ऐतिहासिक किला और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित ओरछा जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों तक दिल्ली और लखनऊ से पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
4. फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे का महा-संगम
आलू और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध फर्रुखाबाद को एक्सप्रेसवे ग्रिड का हिस्सा बनाने के लिए ₹7,489 करोड़ का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है।
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लंबाई और रूट: लगभग 91 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (साइनेज 133) से शुरू होगा। यह फर्रुखाबाद से होते हुए हरदोई के पास निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे (साइनेज 282) पर जाकर मिलेगा।
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अवध और रूहेलखंड को वरदान: इस लिंक के माध्यम से कन्नौज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, हरदोई और शाहजहांपुर का इलाका सीधे राजधानी लखनऊ और मेरठ दोनों तरफ से हाई-स्पीड लेन से जुड़ जाएगा।
3 साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, निर्माण एजेंसी करेगी 5 साल तक रखरखाव
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इन सभी चारों लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरी तरह से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) पद्धति पर कराया जाएगा।
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समयसीमा: सरकार ने इन सभी परियोजनाओं को 3 साल (36 महीने) के भीतर पूरा करने का सख्त लक्ष्य निर्धारित किया है। फर्रुखाबाद लिंक को प्राथमिकता के आधार पर और तेजी से पूरा करने की योजना है।
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5 साल तक मेंटेनेंस की गारंटी: टेंडर की शर्तों के तहत जो भी एजेंसी सड़क का निर्माण करेगी, सड़क बनने के बाद अगले 5 वर्षों तक उसके अनुरक्षण (रखरखाव और मरम्मत) की पूरी जिम्मेदारी भी उसी डेवलपर की होगी।
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राज्य सरकार का शत-प्रतिशत खर्च: इस पूरी ₹17,542 करोड़ की लागत को उत्तर प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से वहन करेगी और इसमें केंद्र सरकार की कोई प्रत्यक्ष वित्तीय हिस्सेदारी नहीं है।
प्रदेश भर में 760 लाख मानव दिवस रोजगार का होगा सृजन
सड़क कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व गति देने के साथ ही यह चारों परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर आर्थिक और रोजगार क्रांति लेकर आएंगी। यूपीडा के आकलन के मुताबिक, इन चारों लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण और सामग्री आपूर्ति गतिविधियों से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 760 लाख (7.6 करोड़) मानव दिवस के रोजगार का सृजन होगा। भारी मशीनरी, परिवहन, स्थानीय निर्माण सामग्री, गिट्टी, मौरंग और सीमेंट उद्योगों को भारी मांग मिलेगी। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ लॉजिस्टिक्स पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, वेयरहाउसिंग और नई टाउनशिप विकसित होने से ग्रामीण इलाकों के युवाओं को उनके गृह जिले में ही आजीविका के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। चारों एक्सप्रेसवे के जुड़ते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां किसी भी कोने से दूसरे कोने तक का सफर बिना किसी ट्रैफिक रुकावट के केवल 6 से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।




