कब है करवा चौथ और अहोगी अष्टमी का व्रत, सही तारीख के साथ जानें पूजन मुहूर्त व चंद्रोदय और तारे निकलने का समय

सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में करवा चौथ (Karwa Chauth) और अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) के व्रतों का बहुत अधिक धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व माना जाता है। शरद ऋतु के आगमन के साथ ही पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुरुआत होते ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए करवा चौथ का कठिन निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं माताएं अपनी संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। इन दोनों ही पावन पर्वों की सही तारीख, चंद्रोदय के समय, तारों के निकलने के वक्त और पूजा के शुभ मुहूर्तों को लेकर हर साल व्रतियों के मन में काफी उत्सुकता रहती है। आइए पंचांग की गणना के आधार पर इन दोनों महत्वपूर्ण व्रतों की सटीक तारीखों और समय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

#1 करवा चौथ व्रत की सही तिथि, चंद्रोदय और पूजा का शुभ मुहूर्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस वर्ष सुहागिनों के लिए बेहद खास रहने वाला है। पंचांग के अनुसार, इस बार करवा चौथ का व्रत अक्टूबर महीने के मध्य में पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के निर्जला उपवास रखती हैं और शाम के समय मां करवा, भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा के बाद रात में चलनी से चंद्रमा के दर्शन कर और अपने पति का चेहरा देखकर व उन्हें जल अर्पण कर व्रत का पारण किया जाता है। विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का समय अलग-अलग होता है, लेकिन आमतौर पर रात 8:00 बजे से 8:45 बजे के बीच चांद के दीदार होने की संभावना है। पूजा का सबसे उत्तम संध्याकाल मुहूर्त शाम 6:00 बजे से रात 7:15 बजे के बीच रहेगा, जिसमें माताएं कथा सुन सकती हैं।

#1 अहोई अष्टमी व्रत की तारीख और तारे निकलने का समय

करवा चौथ के ठीक तीन या चार दिन बाद आने वाला अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतानों के सुखी जीवन के लिए रखती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत में माताएं पूरा दिन उपवास रखती हैं और प्रदोष काल में तारे या आसमान में चंद्रमा को देखने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती हैं। इस वर्ष अहोई अष्टमी का व्रत भी अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में पड़ रहा है। इस दिन माताएं दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर उनकी रोली, चावल और दूध-भाट से पूजा करती हैं। इस व्रत में तारे निकलने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। शाम को सूर्यास्त के बाद आकाश में तारे निकलते ही उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। सामान्यतः अहोई अष्टमी के दिन तारों के निकलने का समय शाम 6:15 बजे से 7:00 बजे के बीच का होता है, जिसके बाद माताएं जल ग्रहण करती हैं।

#1 करवा चौथ और अहोई अष्टमी की पूजन सामग्री और पारंपरिक विधान

इन दोनों ही व्रतों में पूजा की थाली का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ की थाली में करवा (मिट्टी या धातु का कलश), छलनी, दीपक, रोली, अक्षत, धूपबत्ती, सुहाग की सामग्री (बिंदिया, चूड़ियां, सिंदूर, महावर) और मिठाई रखी जाती है। वहीं अहोई अष्टमी की पूजा में चांदी की अहोई (जिसे स्याहु भी कहा जाता है) की माला, पूजन के लिए नया पक्का भोजन, पूरी, हलवा और सींक या सिंघाड़े का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के दौरान घर की बुजुर्ग महिलाओं या कथावाचक से करवा चौथ और अहोई माता की कहानी सुनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन दोनों व्रतों में महिलाओं की श्रृंगारिक आस्था और पारिवारिक एकजुटता का एक अद्भुत और सुंदर रूप देखने को मिलता है।

#1 आधुनिक युग और डिजिटल एआई सर्च के दौर में त्योहारों की सटीक जानकारी

आज के डिजिटल और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में देश-विदेश में रहने वाली भारतीय महिलाएं और परिवार गूगल, बिंग व अन्य सर्च इंजनों के माध्यम से व्रत की सही तारीख, पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय के समय की सटीक जानकारी सेकंडों में प्राप्त कर रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय 'Karwa Chauth 2026 date and moonrise time', 'Ahoi Ashtami 2026 puja muhurat', 'Karwa chauth vrat katha in hindi', और 'Ahoi ashtami taro ke nikalne ka samay' जैसे कीवर्ड्स सबसे ज्यादा सर्च किए जा रहे हैं। डिजिटल मीडिया और लोकल ऑप्टिमाइजेशन के जरिए देश के विभिन्न शहरों जैसे दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, मेरठ और वाराणसी के हिसाब से चांद निकलने के सटीक समय की अपडेट्स आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे व्रतियों को अपने व्रत के अनुष्ठान करने में किसी भी प्रकार की उलझन का सामना नहीं करना पड़ता है।

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