5 साल पुराने आंखों के स्कैन से रडार पर आए 257 संदिग्ध अफसर, CBI ने कसी नकेल

देशभर के सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भर्ती को लेकर एक अत्यंत चौंकाने वाला और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान यानी आईबीपीएस (IBPS) की परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले सैकड़ों संदिग्ध अधिकारी अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) के निशाने पर आ चुके हैं। जांच एजेंसियों ने आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक और पांच साल पुराने आइरिस स्कैन (आंखों की पुतलियों के स्कैन) का गहन मिलान कर 257 ऐसे संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की है, जिन्होंने असली अभ्यर्थियों की जगह 'डमी कैंडिडेट' बिठाकर परीक्षा पास की और बैंकों में बड़े पदों पर नियुक्ति पा ली। मुंबई की विशेष अदालत में सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों ने बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है।
आइरिस स्कैन और फोटो मॉर्फिंग तकनीक से ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में अधिकारियों और क्लर्क की भर्ती के लिए आईबीपीएस द्वारा कॉमन रिक्रूटमेंट प्रोसेस आयोजित किया जाता है। साल 2025 में जब संस्थान ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता की आंतरिक समीक्षा शुरू की, तो पिछले पांच वर्षों यानी 2020 से 2024 के बीच शामिल हुए लाखों अभ्यर्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने पाया कि ऑनलाइन आवेदन के समय असली उम्मीदवारों और परीक्षा में बैठने वाले सॉल्वरों की तस्वीरों को आपस में मॉर्फ करके एक नया चेहरा तैयार किया जाता था। इसके बाद वही डमी अभ्यर्थी लिखित परीक्षा, मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार और यहां तक कि बैंक में जॉइनिंग से पहले होने वाले बायोमेट्रिक सत्यापन तक उपस्थित रहते थे। जब अंतिम चयन और नियुक्ति पत्र जारी हो जाता था, तब वह असली व्यक्ति बैंक में जाकर ड्यूटी जॉइन कर लेता था जिसने परीक्षा का एक भी चरण खुद नहीं दिया था।
180 बैंक कर्मचारी पहले से कर रहे थे नौकरी, 54 सॉल्वर चिन्हित
आईबीपीएस ने जब अलग-अलग बैंकों को संदिग्ध कर्मचारियों के बायोमेट्रिक्स के दोबारा सत्यापन का निर्देश दिया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में कुल 257 संदिग्धों के बायोमेट्रिक्स में गंभीर मिसमैच पाया गया। इनमें से 180 लोग तो ऐसे थे जो देश के विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में बाकायदा अधिकारी और कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और वेतन उठा रहे थे। इसके अलावा पूरे भर्ती सिंडिकेट की गहराई से जांच करने पर 54 ऐसे पेशेवर 'डमी परीक्षार्थियों' का नेटवर्क सामने आया, जो एक से अधिक उम्मीदवारों की जगह बार-बार परीक्षा में बैठ रहे थे और अब तक कम से कम 172 अयोग्य लोगों को बैंकों में नौकरी दिलाने में मदद कर चुके थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईबीपीएस ने इन सभी संदिग्धों को जीवन भर के लिए प्रतिबंधित कर दिया और संबंधित बैंकों को सेवा नियमों के तहत सख्त बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
सीबीआई की एफआईआर में 135 नाम, मुंबई कोर्ट में चार मुख्य आरोपियों की पेशी
इस राष्ट्रीय स्तर के घोटाले की जांच का जिम्मा संभालते हुए सीबीआई ने 20 अगस्त को 135 नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और प्रतिरूपण का मामला दर्ज किया। जांच एजेंसी ने हाल ही में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक गौरव श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि आरोपी विश्व भास्कर ने संजीव कुमार भारती और संतोष कुमार भारती नामक दो उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा दी थी। वहीं आरोपी अभिषेक कुमार ने हरिमोहन मीणा बनकर और मनीष कुमार ने अमित कुमार बनकर परीक्षा दी। जब इन गिरफ्तार आरोपियों के आंखों के आइरिस स्कैन का मिलान 2020-2024 की परीक्षा के दौरान लिए गए डिजिटल बायोमेट्रिक डेटा से कराया गया, तो वह पूरी तरह से मेल खा गया। एक अन्य प्रमुख आरोपी राजीव रंजन को भी अदालत ने सीबीआई की हिरासत में भेजा है, जो 2020 और 2021 के दौरान परीक्षा के कई चरणों में फर्जी अभ्यर्थी के रूप में सक्रिय था।
देशभर में छापेमारी जारी, कई बड़े बैंक अधिकारियों और दलालों पर गिरफ्तारी की तलवार
सीबीआई ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक अंतरराज्यीय संगठित सॉल्वर गिरोह सक्रिय है, जिसके तार कई राज्यों के कोचिंग सेंटरों और परीक्षा केंद्रों से जुड़े हुए हैं। जांच एजेंसी देश के विभिन्न शहरों में असली उम्मीदवारों और डमी परीक्षार्थियों के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। जिन 180 लोगों ने फर्जीवाड़े के दम पर बैंकों में नौकरियां हासिल की हैं, उनकी पहचान की जा चुकी है और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। सीबीआई का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस गोरखधंधे में शामिल और भी दलालों, सॉल्वर गिरोह के सरगनाओं तथा अवैध रूप से नियुक्त कर्मचारियों की गिरफ्तारियां होंगी।




