अभिजीत दीपके ने INDI गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च का किया समर्थन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज

देश की राजधानी नई दिल्ली में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच चल रहा टकराव अब एक नए और बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी INDI गठबंधन द्वारा निकाले गए सुप्रीम कोर्ट विरोध मार्च को अब अन्य राजनीतिक दलों और युवा संगठनों का भी खुला साथ मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके ने इस बड़े विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक चुनाव आयोग के शीर्ष पद से ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इस मार्च को लोकतंत्र को बचाने की दिशा में एक बेहद निर्णायक और ऐतिहासिक कदम करार दिया है।

'जब तक CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, जारी रहेगा देशव्यापी आंदोलन'

राजधानी की सड़कों पर सोमवार को विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए इस मार्च का पुरजोर स्वागत करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि आज देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जो संकट मंडरा रहा है, उसके खिलाफ विपक्ष का एक मंच पर आना बेहद अनिवार्य हो चुका था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा कि पूरे देश को और विशेष रूप से विपक्ष में मौजूद तमाम राजनीतिक ताकतों को एकजुट होकर जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करनी होगी। दीपके ने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर जब तक ज्ञानेश कुमार बने रहेंगे, तब तक विरोध की यह चिंगारी शांत नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के कोने-कोने और हर राज्य में इसी तरह के बड़े जन आंदोलन देखने को मिलेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सवाल: 'क्या पीएम मोदी से भी यही कहा जाएगा?'

अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर देश की शीर्ष अदालत की भूमिका और उसकी प्रतिक्रिया पर भी बेहद कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों से लाखों मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने के गंभीर मामले का हवाला दिया। उन्होंने अदालत के उस तर्क पर सीधा ऐतराज जताया जिसमें कहा गया था कि जो मतदाता इस बार वोट डालने से वंचित रह गए हैं, वे अगले चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए दीपके ने तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कभी यह कह सकता है कि वे इस बार चुनाव न लड़ें और अगले चुनाव में अपनी किस्मत आजमा लें? अगर अदालत किसी संवैधानिक पद पर बैठे नेता से यह बात नहीं कह सकती, तो फिर देश के आम नागरिकों और मतदाताओं से उनके बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार को लेकर ऐसी बात किस अधिकार और आधार पर कही जा सकती है?

कांग्रेस की केरल इकाई के विवादित पोस्ट पर साधी चुप्पी, संस्थागत जवाबदेही पर दिया जोर

यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है जब कांग्रेस की केरलम (केरल) इकाई द्वारा मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद देश भर में भारी सियासी बवाल मचा हुआ है। जब इस विवादित पोस्ट और सीजेआई के इस्तीफे की मांग पर पत्रकारों ने अभिजीत दीपके से उनकी राय जाननी चाही, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले अंदाज में इस विवाद पर सीधे कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि उनका मुख्य सरोकार चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि संस्थागत स्तर पर जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा बहाल नहीं हो सकता, और इसीलिए चुनाव आयोग के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन देश के हर नागरिक का साझा संघर्ष बन चुका है

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