कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरणादायी नेतृत्व में शोध को मिल रही नई दिशा- प्रो. जे.पी. सैनी

भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा जारी प्रतिष्ठित डॉक्टोरल फेलोशिप की चयन सूची में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्कृष्ट शोध गुणवत्ता का परिचय देते हुए शानदार सफलता हासिल की है। विश्वविद्यालय के कुल 12 शोधार्थियों ने इस राष्ट्रीय फेलोशिप में स्थान प्राप्त किया है, जिसमें 10 शोधार्थियों का चयन श्फुल-टर्म डॉक्टोरल फेलोशिपश् तथा 02 शोधार्थियों का चयन श्शॉर्ट-टर्म डॉक्टोरल फेलोशिपश् के लिए हुआ है। आईसीएसएसआर द्वारा घोषित आधिकारिक सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में सर्वाधिक शोधार्थियों का चयन सुनिश्चित कराकर लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश में शीर्ष स्थान पर रहा है।
फेलोशिप के स्वरूप की जानकारी देते हुए बताया गया कि फुल-टर्म डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए चयनित 10 शोधार्थियों को 2 वर्ष की अवधि हेतु 20,000 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप तथा 20,000 रुपये प्रतिवर्ष आकस्मिक अनुदान (कंटिंजेंसी) प्रदान किया जाएगा। वहीं, शोध प्रबंध के अंतिम चरण एवं थीसिस लेखन में जुटे 02 शोधार्थियों को शॉर्ट-टर्म डॉक्टोरल फेलोशिप के तहत 6 माह की अवधि के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने सभी सफल शोधार्थियों, उनके शोध निर्देशकों एवं शिक्षकों को हार्दिक बधाई दी। कुलपति ने कहा कि आईसीएसएसआर डॉक्टोरल फेलोशिप में प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में सर्वाधिक चयन दर्ज करना पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदेश की माननीया कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के सतत मार्गदर्शन, प्रेरणादायी विजन तथा उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल व दूरदर्शी नेतृत्व में उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में किए जा रहे नीतिगत सुधारों का प्रतिफल है।
कुलपति प्रो. सैनी ने आगे कहा कि शासन द्वारा शिक्षण और अनुसंधान को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रोत्साहित करने का ही परिणाम है कि आज हमारे शोधार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (छम्च्-2020) के अनुरूप सामाजिक प्रासंगिकता और साक्ष्य-आधारित अध्ययन राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन युवा प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय शोध संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि नैक (छ।।ब्) द्वारा ।$$ श्रेणी प्राप्त लखनऊ विश्वविद्यालय निरंतर अपने शोध इकोसिस्टम को नए आयाम दे रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार समाज विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाज कार्य, लोक प्रशासन और विधि जैसे प्रमुख संकायों एवं अनुशासनों में चयनित शोधार्थी आईसीएसएसआर के तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर शीघ्र ही फेलोशिप से जुड़ेंगे।

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