Property Rights : फ्लैट पर कब्जा लेना खरीदार का अधिकार, बिल्डर को देरी पर देना होगा मुआवजा या ब्याज

HR Breaking News (Property Rights) : फ्लैट खरीदने (property right) के बाद अगर बिल्डर ने तय समय से देर से कब्जा किया तो खरीदार अभी देरी के लिए ब्याज या मुआवजे की मांग कर सकते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court order) में स्पष्ट किया है कि फ्लैट का कब्जा लेना रजिस्ट्री कराना बिल्डर की देरी से जुड़ी जिम्मेदारी को खत्म नहीं करता। बिल्डर केवल इस आधार पर भुगतान से इंकार नहीं कर सकता कि खरीददार ने फ्लैट स्वीकार कर लिया है।
यह था मामला
यह मामला गुरुग्राम (gurugram news) की आवासीय परियोजना से जुड़े 47 खरीदारों की याचिका से संबंधित है। परियोजना को वर्ष 2016 में पूरा किया गया था। लेकिन खरीदारों को वर्ष 2019 के अंत तक इसके लिए इंतजार करना पड़ा। कब्जे मिलने के बाद खरीदारों ने देरी के लिए ब्याज की मांग की तो बिल्डरों ने दलील दी की फ्लैट सौंपे जाने के बाद अब कोई दवा नहीं बनता। हाई कोर्ट ने इस को स्वीकार नहीं किया है खरीदारों को कानूनी राहत दी।
कोर्ट ने दिया ये हवाला
अदालत ने (Property Rights news) रियल एस्टेट के अधिनियम (Real Estate Act) के नियमों का हवाला देते हुए बिल्डर और खरीदार के बीच हुआ समझौता कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता। समय पर फ्लैट नहीं सौंपने की जिम्मेदारी बिल्डर की और कब्जा मिलने से पिछली देरी का हिसाब खत्म नहीं हो जाता। कुछ मामलों में खरीदार कब्जा मिलने के समय कुछ भुगतान लेकर या दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके अपना दावा छोड़ने की स्थिति में आ जाते हैं। हालांकि अदालत के फैसले के अनुसार खरीदार के वैधानिक अधिकार केवल कब्जा सौंपने से समाप्त नहीं माने जा सकते। मामले में महत्वपूर्ण होगा कि खरीदार ने किसी पूर्ण और अंतिम समझौते के तहत अपना दावा छोड़ा है या नहीं।
कब्जे के तीन साल के भीतर कर सकते हैं दावा
फैसले में समय सीमा का पहलू भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार कब्जा मिलने के 3 साल के भीतर ब्याज देरी के लिए शिकायत की जा सकती है। कोविड महामारी के दौरान 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 यानी कोविड काल के समय की अवधि को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों (Supreme Court instructions) के अनुसार समय सीमा की गणना से बाहर रखा गया है। ऐसे में पात्र खरीदारों के लिए शिकायत की समय सीमा तय करते समय इस छूट का भी ध्यान करना होगा।
इन लोगों को मिली राहत
कोर्ट के इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें फ्लैट का कब्जा तो मिल गया है। लेकिन तय समय से देरी के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इससे अब बिल्डर केवल कब्जा देने रजिस्ट्री होने का हवाला देकर ब्याज की मांग को खारिज नहीं कर सकेंगे। हालांकि प्रत्येक मामले में राहत इस बात पर निर्भर करेगी की संबंधित तथ्यों दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर खरीदार का दावा कितना वैध है।




