हाइवे पर खड़े वाहनों से होने वाले हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) और एक्सप्रेसवे पर खड़े होने वाले खराब या अवैध वाहनों के कारण होने वाले सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से तीखे शब्दों में पूछा है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग में भी हाइवे पर खड़े वाहनों की रियल-टाइम निगरानी के लिए अभी तक कोई प्रभावी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम या ऑटोमैटिक सेंसर तकनीक क्यों नहीं विकसित की गई है। आए दिन हाइवे पर खड़े ट्रकों या अन्य गाड़ियों से टकराने के कारण होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाओं और निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौतों पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस सख्त न्यायिक हस्तक्षेप से देश के परिवहन और राजमार्ग प्रशासन में हड़कंप मच गया है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही हाइवे सुरक्षा के नियमों में बड़े और कड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

हाइवे पर खड़े वाहनों से होने वाली मौतें और अदालत की चिंता

भारतीय सड़कों पर रात के समय या कम विजिबिलिटी के दौरान हाइवे के बीचों-बीच या किनारे बिना किसी रिफ्लेक्टर या इंडिकेटर के खड़े खराब वाहन मौत का जाल बनते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई विभिन्न जनहित याचिकाओं और सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों पर सुनवाई करते हुए बेंच ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि प्रशासन हर साल टोल टैक्स तो वसूल रहा है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के लिए जो बुनियादी उपाय होने चाहिए, वे नदारद हैं। तेज रफ्तार वाहनों का अचानक हाइवे पर खड़े ट्रकों या कारों से टकरा जाना अब आम बात हो गई है, जिसमें पूरा-पूरा परिवार काल के गाल में समा जाता है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह की टाली जा सकने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ चालान काटना या खानापूर्ति करना काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए एक फूल-प्रूफ और तकनीकी रूप से उन्नत सिस्टम की सख्त जरूरत है जो तुरंत खतरे की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सके।

NHAI से तीखा सवाल: आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और एआई सर्विलांस की क्यों है कमी

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि आज जब दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सीसीटीवी कैमरों, थर्मल सेंसर्स और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए हो रहा है, तो हमारे हाइवे पर यह व्यवस्था क्यों लागू नहीं है? कोर्ट ने पूछा कि क्या एनएचएआई के पास ऐसा कोई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मौजूद नहीं है जो यह डिटेक्ट कर सके कि हाइवे की मुख्य लेन पर कोई वाहन अवैध रूप से या खराब होकर खड़ा है? अदालत ने निर्देश दिया कि हाइवे के हर हिस्से पर पेट्रोलिंग व्हीकल की मैन्युअल गश्त के भरोसे रहने के बजाय एक सेंट्रलाइज्ड ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाए, जो सड़क पर किसी भी रुकावट या खड़े वाहन को तुरंत ट्रैक करके क्रेन या मददनी टीम को मौके पर भेज सके।

कड़े नियम, जवाबदेही और देश भर के हाइवे की सुरक्षा का भविष्य

सर्वोच्च न्यायालय की इस सख्ती के बाद अब देश भर के एक्सप्रेसवे और नेशनल हाइवे पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा नए सिरे से की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि एनएचएआई जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक एक्शन प्लान पेश करेगा, जिसमें हाइवे किनारे अवैध पार्किंग रोकने के लिए भारी जुर्माने, सीसीटीवी आधारित ऑटोमैटिक चालान और तुरंत सहायता पहुंचाने वाले इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम का जिक्र होगा। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाइवे पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को अनिवार्य कर दिया जाए और खराब वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की तैनाती तय समय के भीतर सुनिश्चित हो, तो हर साल हजारों बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह न्यायिक कदम देश के परिवहन ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिस पर आम नागरिकों की भी पूरी नजर टिकी हुई है।

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