रामपुर में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना से संवरती आत्मनिर्भरता

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के उद्देश्य से संचालित योजनाएं धरातल पर सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक बदलाव की संवाहक बन रही हैं। प्राकृतिक आपदाओं और अप्रत्याशित वित्तीय संकटों के उपरांत पुनर्वास तथा उद्यमशीलता को नया जीवन देने में ‘मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना‘ अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा क्रियान्वित यह योजना ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों के हुनरमंद उद्यमियों को संस्थागत वित्तीय संबल प्रदान कर स्वावलंबन के नए अवसर सृजित कर रही है।

जनपद रामपुर में इस योजना के सफल क्रियान्वयन ने आपदा के प्रभाव को मात देकर औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। जनपद के उद्यमी नाजिम वर्ष 2022 तक ‘वेस्टर्न ऑटो प्लास्टिक पार्ट्स‘ नाम से अपनी औद्योगिक इकाई का संचालन कर रहे थे। इस इकाई में दोपहिया वाहनों के वाइज़र, मडगार्ड तथा ऑटो पार्ट्स तैयार कर प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों को आपूर्ति किए जाते थे। वर्ष 2022 में जनपद रामपुर में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान इस प्लांट में पानी भर जाने से भारी नुकसान हुआ। पचास लाख रुपये से अधिक मूल्य की मशीनरी और कच्चा माल नष्ट होने से स्थापित उद्यम पूरी तरह ठप हो गया तथा संचित पूंजी समाप्त हो गई।

इस अप्रत्याशित संकट के बाद उद्यमी ने भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं और पर्यावरण-अनुकूल प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण क्षेत्र में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया। पूंजी के गंभीर अभाव को दूर करने के लिए जिला प्रशासन और ग्रामोद्योग विभाग के मार्गदर्शन में ‘मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना‘ के अंतर्गत आवेदन किया गया। महिला सशक्तीकरण की नीति के अनुरूप उनकी पत्नी सादिया रईस के नाम से वित्तीय सहायता का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसे संबंधित विभाग द्वारा त्वरित औपचारिकताएं पूर्ण कर स्वीकृति प्रदान की गई।

बैंक के समन्वय से 9.5 लाख रुपये का संस्थागत ऋण स्वीकृत होने से इस ठप पड़े उद्यम को तत्काल राहत मिली। लाभार्थी परिवार ने अपनी शेष जमा-पूंजी और अन्य स्रोतों से संसाधन जुटाते हुए लगभग 1.25 करोड़ रुपये के कुल पूंजी निवेश से जनपद रामपुर में एक आधुनिक ई-रिक्शा विनिर्माण इकाई की स्थापना की। सरकारी स्तर से प्राप्त समयबद्ध वित्तीय सहायता ने उद्यमी को पुनः मुख्यधारा में स्थापित करने में आधारशिला का कार्य किया।

जनपद रामपुर में स्थापित यह विनिर्माण इकाई केवल बाह्य कलपुर्जों के संयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वाहनों का निर्माण आधारभूत स्तर से किया जाता है। संयंत्र में कच्चे लोहे की प्रोसेसिंग, मुख्य चेचिस निर्माण, बाह्य बॉडी की फैब्रिकेशन, वेल्डिंग, पैसेंजर सीट निर्माण, डेंटिंग-पेंटिंग तथा आंतरिक वायरिंग का संपूर्ण कार्य इन-हाउस तकनीकी दक्षता के साथ संपन्न किया जाता है। सुरक्षा और गुणवत्ता के कड़े मानकों को पूरा करते हुए इकाई का चेचिस नंबर विधिवत अनुमोदित है।
इस इकाई में निर्मित ई-रिक्शा को केंद्र सरकार के अधिकृत संस्थान इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी), गुरुग्राम से आवश्यक विनियामक और सुरक्षा मानकों का विधिवत प्रमाणन प्राप्त है। गुणवत्ता नियंत्रण और विनियामक अनुपालन के कारण स्थानीय बाजार में इस इकाई के उत्पादों की विश्वसनीयता निरंतर बढ़ रही है।

बाजार की मांग के अनुसार इस संयंत्र में प्रतिमाह 10 से 30 ई-रिक्शा का निर्माण किया जा रहा है। विगत एक वर्ष की अवधि में इकाई द्वारा संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से विधिवत पंजीकृत 40 से अधिक ई-रिक्शा सफलतापूर्वक सड़कों पर उतारे जा चुके हैं, जबकि 20 नई गाड़ियों की खेप आगामी आपूर्ति हेतु तैयार है। यह उपलब्धि जनपद रामपुर को स्वच्छ और हरित गतिशीलता के क्षेत्र में एक उभरते स्थानीय विनिर्माण केंद्र के रूप में अग्रसर करती है।

इस उद्यम ने न केवल एक परिवार को आर्थिक स्थायित्व प्रदान किया है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका का बड़ा आधार भी तैयार किया है। इकाई से होने वाले लगभग ढाई से तीन लाख रुपये के वार्षिक शुद्ध लाभ से परिवार का सम्मानजनक भरण-पोषण सुनिश्चित हो रहा है। इसके साथ ही, चेचिस वेल्डिंग, सीट निर्माण, फैब्रिकेशन और वायरिंग जैसे तकनीकी कार्यों में रामपुर के 20 से 25 कुशल व अर्ध-कुशल कारीगरों को नियमित रोजगार प्राप्त हो रहा है, जिससे कई ग्रामीण परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

वित्तीय अनुशासन के मोर्चे पर भी इकाई का प्रदर्शन अनुकरणीय रहा है। उद्यमी द्वारा बैंक ऋण की मासिक किस्तों (ईएमआई) का शत-प्रतिशत समयबद्ध भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनका ऋण खाता पूरी तरह मानक बना हुआ है। अब यह इकाई अपने वर्तमान 5-सीटर (38 इंच) मॉडल से आगे बढ़कर 8-सीटर एल-5 श्रेणी (42 से 48 इंच चौड़ाई) के ई-वाहनों के निर्माण की दिशा में विस्तार की योजना पर कार्य कर रही है। आवश्यक विनियामक अनुमोदन और संयंत्र विस्तार के लिए अनुमानित 30 लाख रुपये की अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाले श्रम पलायन को रोकने में मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की स्थापना हेतु अधिकतम 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर वाणिज्यिक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से सुलभ ऋण उपलब्ध कराया जाता है। योजना का प्रमुख ध्येय पारंपरिक शिल्पों, स्थानीय संसाधनों और आधुनिक सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाना है।

योजना की संरचना में सामाजिक समावेशिता और समता को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के पुरुष उद्यमियों को नियमानुसार पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध करायी जाती है, जबकि आरक्षित वर्गों-अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग तथा सभी वर्गों की महिला उद्यमियों को विशेष वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है। आरक्षित श्रेणी के लाभार्थियों को तीन वर्षों तक 13 प्रतिशत की सीमा तक ब्याज उपादान (सब्सिडी) दिए जाने का प्रावधान है, जिससे यह ऋण व्यावहारिक रूप से ब्याज-मुक्त वित्तीय पोषण में परिवर्तित हो जाता है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए योजना की संपूर्ण प्रक्रिया को विभागीय ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाता है। आवेदनों की प्राथमिक जांच के उपरांत जिला प्रशासन की अध्यक्षता में गठित ‘जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति‘ (डीएलटीएफसी) द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। इसके पश्चात आवेदन अग्रिम स्वीकृति हेतु बैंकों को प्रेषित किए जाते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है।

उद्यम की निरंतरता और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चयनित लाभार्थियों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (आरसेटी) तथा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से उद्यमिता विकास प्रशिक्षण (ईडीपी) प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को वित्तीय प्रबंधन, विपणन रणनीति, गुणवत्ता नियंत्रण तथा लेखांकन के व्यावहारिक सिद्धांतों से अवगत कराया जाता है, जिससे सूक्ष्म इकाइयां बाजार की प्रतिस्पर्धा में मजबूती से टिक सकें।

जिला प्रशासन और बैंकर्स के मध्य सतत समन्वय तथा नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से रामपुर जनपद में ऋण स्वीकृति और वितरण की गति तेज हुई है। स्थानीय स्तर पर अनुकूल औद्योगिक वातावरण निर्मित होने से सूक्ष्म उद्यम न केवल आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हरित गतिशीलता और प्रदूषण नियंत्रण में भी उपयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

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