किशोरी बालिकाओं के पोषण, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास को मिल रहा व्यापक प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किशोरी बालिकाओं के समग्र विकास, बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के आकांक्षात्मक जनपदों में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरी बालिकाओं को पोषण एवं गैर-पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य किशोरियों में पोषण की स्थिति में सुधार के साथ उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा एवं कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 आकांक्षात्मक जनपदों की 14 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं को विभिन्न सेवाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। इसके तहत पोषण घटक के माध्यम से किशोरियों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा आच्छादित परियोजनाओं में आटा बेसन बर्फी, प्रीमिक्स तथा दलिया एवं मूंग दाल खिचड़ी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं अन्य परियोजनाओं में नैफेड के माध्यम से फोर्टिफाइड गेहूं दलिया, चना दाल, फोर्टिफाइड खाद्य तेल तथा फोर्टिफाइड चावल का वितरण किया जा रहा है।
किशोरावस्था शारीरिक एवं मानसिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस दौरान पोषण की कमी का सीधा प्रभाव किशोरियों के स्वास्थ्य एवं भविष्य पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने इस योजना के गैर-पोषण घटक में आयरन एवं फोलिक एसिड (IFA) की व्यवस्था की है। इसके साथ ही किशोरियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यकता के अनुसार संदर्भन सेवा तथा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता प्रदान की जाती है।
योजना में किशोरियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) को भी विशेष महत्व दिया गया है। उन्हें मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे इस प्राकृतिक प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की झिझक या भ्रांति के बजाय वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यपरक दृष्टिकोण अपना सकें।
किशोरी बालिकाओं को केवल पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से योजना में कौशल प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे किशोरियों में रोजगारपरक कौशल विकसित हो सकें और वे आगे चलकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
इसी दिशा में भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में NAVYA Project के अंतर्गत प्रदेश के दो आकांक्षात्मक जनपदों फतेहपुर एवं सोनभद्र में 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरी बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए जाने हेतु पायलट प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया गया है। यह पहल किशोरियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में समग्र रूप से किशोरी बालिकाओं के लिए संचालित यह पहल पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जागरूकता और कौशल विकास को एक साथ जोड़ती है। स्वस्थ एवं शिक्षित किशोरियां ही भविष्य में स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला बन सकती हैं। ऐसे में किशोरियों के पोषण एवं स्वास्थ्य में निवेश के साथ उन्हें कौशलयुक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे ये प्रयास प्रदेश के समावेशी एवं सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।




