सुशांत सरीन के बयानों के मुरीद हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी

भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से ही रणनीतिक और कूटनीतिक तनातनी का माहौल रहता है। लेकिन जब भारतीय सुरक्षा तंत्र का कोई बड़ा और अनुभवी चेहरा पाकिस्तान के मौजूदा सेना प्रमुख (COAS) जनरल असीम मुनीर की नीतियों पर बात करे, तो हलचल मचना लाजमी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. एसपी वैद ने हाल ही में प्रख्यात विदेश मामलों और सुरक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन के एक बयान पर अपनी सहमति जताते हुए बेहद रोचक और रणनीतिक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि देखा जाए तो पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर एक तरह से भारत के लिए बहुत 'अच्छा काम' कर रहे हैं। इस बयान के बाद से ही कूटनीतिक और रक्षा गलियारों में एक नई और दिलचस्प बहस छिड़ गई है। आइए एक स्वतंत्र ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि आखिर पूर्व डीजीपी के इस बयान के पीछे का असली और छिपा हुआ सच क्या है।
सुशांत सरीन का तीखा विश्लेषण और पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद की मुहर
रणनीतिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन अपने बेबाक और सटीक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में एक टॉक शो के दौरान पाकिस्तान की आंतरिक और बाहरी स्थिति पर अपनी बेबाक राय रखी थी। सरीन का तर्क था कि जनरल असीम मुनीर जिस तरह से पाकिस्तान के अंदर नीतियां लागू कर रहे हैं, उससे वहां की राजनीतिक स्थिरता, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताना-बाना दिन-ब-दिन चरमराता जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सफल अभियानों का नेतृत्व कर चुके पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने सुशांत सरीन के इसी वीडियो क्लिप को साझा करते हुए उनकी बात का समर्थन किया। वैद ने चुटकी लेते हुए कहा कि असीम मुनीर अपनी ही रणनीतिक गलतियों, आंतरिक दमन और गलत आर्थिक फैसलों से पाकिस्तान को खुद ही अंदर से कमजोर कर रहे हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
असीम मुनीर की नीतियों से पाकिस्तान के भीतर गहराता राजनीतिक और आर्थिक संकट
जनरल असीम मुनीर जब से पाकिस्तान सेना के कमान के शीर्ष पद पर पहुंचे हैं, तब से पाकिस्तान एक के बाद एक कई गंभीर संकटों से जूझ रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और आम जनता के साथ सेना का सीधा टकराव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) व बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, जहां महंगाई आसमान छू रही है और देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्जों पर पूरी तरह निर्भर हो चुका है। असीम मुनीर द्वारा लोकतंत्र को दरकिनार कर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने की कोशिश ने पाकिस्तानियों के मन में अपनी ही फौज के खिलाफ भारी असंतोष पैदा कर दिया है। भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि जो काम युद्ध के मैदान में नहीं हो सका, वह काम पाकिस्तान के अपने ही सेना प्रमुख की अदूरदर्शिता के कारण खुद-ब-खुद हो रहा है।
भारत की सीमा सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर के बदलते हालात
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का यह बयान जम्मू-कश्मीर के वर्तमान हालातों के संदर्भ में भी बेहद अहम माना जा रहा है। एक समय था जब पाकिस्तानी सेना और उसकी गुप्तचर संस्था आईएसआई (ISI) अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन भारत में आतंकवाद फैलाने में लगाती थी। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट चुकी है। असीम मुनीर के दौर में पाकिस्तान की सेना अपनी ही पश्चिमी सीमाओं पर तालिबान से निपटने और अपने ही देश के भीतर विद्रोह दबाने में फंसी हुई है।
इसके चलते सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगी है। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद से शांति, विकास और लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो रही हैं, जबकि पाकिस्तान अपने ही बनाए दलदल में लगातार धंसता चला जा रहा है।
रणनीतिक दृष्टि से भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
डॉ. एसपी वैद और सुशांत सरीन का यह साझा विचार भारत की भावी विदेश और सुरक्षा नीति के लिए एक अहम संदेश देता है। जब आपका प्रतिद्वंद्वी खुद ही अपने फैसलों से आत्मघाती मोड़ पर खड़ा हो, तो आपको केवल अपनी विकास यात्रा और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है।
पाकिस्तान की अंदरूनी बदहाली ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक मजबूती से अपनी बात रखने का अवसर दिया है। आज भारत जहां दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर वैश्विक कूटनीति की दिशा तय कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अपनी आंतरिक गुटबाजी और असफल सैन्य नीतियों के चलते दुनिया भर में अलग-थलग पड़ चुका है। पूर्व डीजीपी की यह बेबाक टिप्पणी इसी कड़वी हकीकत का एक जीवंत आईना है।




