मौसम का यू-टर्न: 17 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में ठंड की दस्तक, अब पैक होंगे कूलर-पंखे

देश के अधिकांश राज्यों में मानसूनी विदाई और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से मौसम का मिजाज अचानक पूरी तरह पलट गया है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वोत्तर राज्यों तक तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक ताजा बुलेटिन जारी करते हुए देश के 17 राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने का येलो और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। दिन के समय धूप की तपिश अब धीरे-धीरे नरम पड़ रही है और देर शाम से लेकर सुबह तड़के तक हवा में सिहरन महसूस होने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली शुष्क और ठंडी हवाओं ने मैदानी क्षेत्रों में असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब कूलर और पंखे बंद करने का समय आ गया है और अलमारियों से हल्के गर्म कपड़े, कंबल व रजाइयां बाहर निकालने की नौबत आ चुकी है।

पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर शुरू, पर्यटकों के लिए जारी हुई विशेष एडवाइजरी

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी की आहट देखने को मिली है। रोहतांग दर्रा, मनाली, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम और केदारनाथ-बद्रीनाथ घाटी में तापमान शून्य के करीब या उससे नीचे लुढ़क चुका है। इन पर्वतीय इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी और रिमझिम बारिश के कारण पूरे हिमालयी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड ने वक्त से पहले दस्तक दे दी है। यदि आप आने वाले दिनों में परिवार या दोस्तों के साथ वीकेंड टूर या पर्वतीय पर्यटन स्थलों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का विशेष ध्यान रखें। स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पर्यटकों को ऊंचाई वाले ट्रेकिंग रूट्स पर न जाने, देर रात गाड़ी चलाने से बचने और गर्म ऊनी कपड़ों का पर्याप्त इंतजाम रखने की सख्त सलाह दी है। पहाड़ों पर होने वाले भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और अचानक चट्टानें खिसकने के खतरे को देखते हुए संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर और यूपी-बिहार के मैदानों में घुली ठंडक, प्रदूषण की भी चिंता

राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सुबह-शाम ठंडी हवाओं का दौर देखा जा रहा है। न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री नीचे दर्ज किया गया है, जिसके चलते रात के समय एसी चलाने की जरूरत खत्म हो गई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, बरेली और प्रयागराज से लेकर बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर तक पछुआ हवाओं के जोर पकड़ने से वातावरण में हल्की ठंडक घुल गई है। हालांकि, तापमान में आई इस गिरावट और हवा की धीमी गति के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट की आशंका भी मंडराने लगी है। धूलकण और स्मॉग की हल्की चादर सुबह के समय दृश्यता को प्रभावित कर रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मैदानी राज्यों में अगले 48 से 72 घंटों के भीतर बादलों की आवाजाही रहेगी और कुछ हिस्सों में छिटपुट बूंदाबांदी से तापमान में और तेज गिरावट आएगी।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब-हरियाणा में बदलेगा तापमान का समीकरण

मध्य प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्से में भी मौसम का प्रभाव साफ दिख रहा है। राजस्थान के चुरू, सीकर, जयपुर और बीकानेर में रात का तापमान तेजी से गिर रहा है। दिन में खिली धूप के बाद शाम ढलते ही पारा लुढ़क जाता है, जिससे दिन और रात के तापमान में 12 से 15 डिग्री का बड़ा अंतर देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर संभाग में बादलों का डेरा बना हुआ है और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। पंजाब और हरियाणा में खरीफ फसलों की कटाई के बीच मौसम के इस रुख ने किसानों की चिंता भी थोड़ी बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि कटी हुई फसल या खलिहान में रखे अनाज को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें ताकि अचानक होने वाली बारिश से उपज को नुकसान न पहुंचे।

दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का दौर जारी

उत्तर भारत में जहां गुलाबी ठंड की आहट है, वहीं दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मॉनसूनी चक्रवात और निम्न दबाव के क्षेत्र की वजह से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर में भी भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है और नदियों के जलस्तर पर सतत निगरानी रखी जा रही है। 17 राज्यों की इस व्यापक सूची में तटीय, मैदानी और पहाड़ी सभी भौगोलिक क्षेत्र शामिल हैं, जिसके कारण समूचे देश के वातावरण में एक साथ बदलाव का अहसास हो रहा है।

मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की हिदायत

मौसम के इस संधिकाल यानी बदलते दौर में डॉक्टरों ने आम जनता को स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने की ताकीद की है। दिन में हल्की गर्मी और रात में ठंडी हवा के कारण सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर, गले में खराश और मौसमी एलर्जी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दमा के मरीजों को अलसुबह और देर रात खुली हवा में जाने से बचना चाहिए। ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना, हल्का गुनगुना पानी पीना और पंखे या एसी का तापमान संतुलित रखना बेहद आवश्यक है।

आने वाले दिनों में यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की रफ्तार तेज होती है, तो उत्तर भारत के मैदानी भागों में ठंड का असर और ज्यादा गहराएगा। ऐसे में अब घरों में गर्म कपड़ों की छंटाई और ऊनी कपड़ों की तैयारी ही समझदारी भरा कदम साबित होगी।

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