उत्तराखंड के तमकनाला में बादल फटा या हुई भारी बारिश? वैज्ञानिक अध्ययन से खुलेगा राज

भूस्खलन और ग्लेशियर झील के खतरे का भी होगा आकलन

अध्ययन में ऊपरी क्षेत्र में भूस्खलन, भू-धंसाव, ढलान विफलता, चट्टानों के टूटने और अन्य भू-आकृतिक गतिविधियों की भूमिका का परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा संभावित ग्लेशियर झील से जुड़े जोखिमों का भी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ा होने के साथ स्थानीय जनजीवन, आवागमन और सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में घटना के वास्तविक कारणों और भविष्य में पैदा होने वाले संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।

15 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश

आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों से अपने-अपने विशेषज्ञता क्षेत्र के अनुसार अध्ययन और परीक्षण कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट में सामने आने वाले वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर क्षेत्र में भविष्य के जोखिमों को कम करने, निगरानी व्यवस्था बेहतर करने और पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने के उपायों पर विशेषज्ञ सुझाव भी दिए जाएंगे।



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