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खेल में अनुशासन, धैर्य व लगन से ही मिलती है मंजिल: साधना सिंह

सुलतानपुर। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली साधना सिंह की अटूट मेहनत और लगन ने उन्हें न सिर्फ राष्ट्रीय टीम में शामिल कराया बल्कि साधना सिंह ने लगातार चौदह वर्षो तक प्रदेश वालीबाल टीम का प्रतिनिधित्व करती रहीं है। मौजूदा समय में भारतीय वालीबाल टीम की कोच एवं राष्ट्रीय स्तर पर चयनकर्ता हैं। परिवार में भी तीन बहने व एक भाई भी राष्ट्रीय वालीबाल के खिलाड़ी रहें हैं जो आज रेलवे व शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। वालीबाल में राष्ट्रीय स्तर पर जिले का सम्मान बढ़ाने वाली साधना सिंह शाहगंज मुहल्ले के आर.पी. सिंह एडवोकेट के चौथे नम्बर की पुत्री है। बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ क्रीड़ा के क्षेत्र में रूचि रखने वाली साधना स्मृतिशेष प्रताप नरायण दूबे जैसा वालीबाल को समर्पित गुरू मिला था। जिसकी प्रेरणा और परिश्रम का परिणाम रही साधना ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधत्व करते हुए जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया।

वालीबाल खेल की शुरूआत नगर के रामकली इण्टर कॉलेज के प्रागंण से करते हुए साधना सिंह ने राणा प्रताप डिग्री कॉलेज से परास्नातक की शिक्षा के साथ-साथ विश्वविद्यालीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए फैजाबाद विश्वविद्यालय का नाम भी रोशन किया था। इतना ही नहीं यू.पी. सीनियर चैम्पियनशिप जो कि चौदह वर्षो तक लगातार सुलतानपुर टीम चैम्पियन रही है कि प्रमुख सद्स्य भी रही है। एन.आई.एस. प्रशिक्षण के बाद जौनपुर, गोरखपुर के साथ फैजाबाद आवासीय वालीबाल बालक छात्रावास में प्रशिक्षक भी रहीं है। इन्होंने भारतीय महिला वालीबाल टीम कोच के रूप में फीलिपिन्स, मनीला, चाईना (शंघाई), श्रीलंका, थाईलैण्ड आदि देशों का दौरा भी किया।

वर्तमान समय में कानपुर के अन्तर्राष्ट्रीय स्टेडियम ग्रीन पार्क में उपक्रीड़ाधिकारी के पद पर तैनात है। इन्होंने दस वर्षो से लगातार भारतीय महिला वालीबाल टीम के चयनकर्ता के साथ-साथ प्रशिक्षक की भी जिम्मेदारी निभा रही है। एक मुलाकात के दौरान महिला खेल को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने पूर्व के अनुभवों को बांटते हुए कहां कि आज हालात बदल चुके है अब वह कहावत जो ‘‘खेलोगें कूदोगें होगें खराब, पढ़ोगें लिखोगें होगें नवाब’’ को दरकिनार करते हुए आज उन्होंने जो उपलब्धि खेल से हासिल की है वह जिले के आने वाली नवोदित खिलाडि़यों को संदेश दिया कि जो भी वालीबाल खेल के साथ-साथ किसी भी खेल में बालिकाएं कैरियर बना सकती है। बशर्ते अनुशासन, धैर्य व लगन के साथ अपने मंन्जिल की ओर बढ़ती रहें निश्चित ही सुखद परिणाम मिलना तय है।

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