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रबी 2018-19 की प्रमुख फसलों में शत-प्रतिशत बीजशोधन हेतु कृषक भाइयों को सुझाव

लखनऊ: प्रदेश में फसलों को प्रति वर्ष कुल क्षति का लगभग 26 प्रतिशत क्षति रोगों द्वारा होती है। रोगों से होने वाली क्षति कभी-कभी महामारी का रूप भी ले लेती है और इनके प्रकोप से शत-प्रतिशत तक फसल नष्ट होने की सम्भावना बनी रहती हैं। अतः बुवाई से पूर्व सभी फसलों में शत-प्रतिशत बीजशोधन का कार्य कराया जाना नितान्त आवश्यक है।

प्रदेश के कृषि निदेशक श्री सोराज सिंह ने यह जानकारी दी है। कृषि निदेशक के अनुसार बीजशोधन का मुख्य उद्देश्य बीज जनित/भूमि जनित रोगों को रसायनों एवं बायोपेस्टीसाइड्स से शोधित कर देने से बीजों पर एवं मृदा पर पाये जाने वाले रोगों के कारक को नष्ट करना होता है। बीजशोधन हेतु प्रयोग किए जाने वाले रसायनोें/ बायोपेस्टीसाइड्स को बुवाई के पूर्व सूखा/स्लरी के रुप मे अथवा कभी-कभी संस्तुतियों के अनुसार घोल बना कर मिलाया जाता है, जिससे इनकी एक परत बीजों की बाहरी सतह पर बन जाती हैें जो बीज पर पाये जाने वाले शाकाणुओं/जीवाणुुओं को अनुकूल परिस्थितियों में नष्ट कर देती है।

प्रदेश में रबी की प्रमुख फसलों में शत-प्रतिशत बीजशोधन कराने हेतु 639.08 लाख कुन्तल बीजशोधन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 57.40 लाख कुन्तल बीज कृषि विभाग के माध्यम से, 215.34 लाख कुन्तल बीज अन्य संस्थाओं तथा शेष 366.34 लाख कुन्तल बीज कृषक स्तर पर शोधित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा अधिकारियों/कर्मचारियों के माध्यम से बीजशोधन कार्य को अभियान के रुप में क्रियान्वित कर समस्त ग्राम पंचायत में कृषकों को प्रेरित किया जा रहा है।

रबी की प्रमुख फसलोें गेहूॅ, जौ, चना, मटर, मसूर, राई/सरसो, आलू एवं गन्ना के बीजशोधन हेतु संस्तुतियों के अनुसार कृषि विभाग द्वारा प्रमुख कृषि रक्षा रसायनों- थिरम 75 प्रतिशत डब्ल्यू0एस0, कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0, ट्राइकोडरमा हारजिएनम 2.0 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0 एवं स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स 0.5 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0 की व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है।

 खाद्यान्न उत्पादन के राष्ट्रीय कार्यक्रम तथा बीजशोधन अभियान को सफल बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, स्वयं सेवी संगठन, स्वयं सहायता समूह, महिला संगठन, कृषि तकनीकी प्रबन्ध अभिकरण (आत्मा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषि रक्षा अनुभाग की कीट/रोग नियंत्रण योजना एवं प्रगतिशील किसानो के साथ ही साथ पेस्टीसाइड्स एसोसिएशन, थोक और फुटकर विक्रेताओं का सहयोग अपेक्षित है।

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