कृषकों की आय बढ़ाने हेतु मक्का उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन की उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहन देना आवश्यक: सूर्य प्रताप शाही

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उत्तर प्रदेश कृषि संबंधित

लखनऊ: प्रदेश के कृषि मंत्री, श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मक्का एक बहुउद्देशीय खाद्यान्न फसल है। उन्होंने कहा कि मानव, पशुओं व मुर्गी के आहार, औद्योगिक उत्पादों एवं स्टार्च आदि के रूप में मक्का का उपयोग किया जाता है। श्री शाही ने बताया कि वर्ष 2018-19 के खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश द्वारा बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गयी है। प्रदेश द्वारा 59.4 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन किया गया तथा देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश ने 20 फीसदी से भी अधिक का योगदान किया है।

श्री शाही आज उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा किसान मण्डी भवन में आयोजित ’’उत्तर प्रदेश के कृषकों की आय बढ़ाने हेतु मक्का उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन की उन्नत तकनीकों का प्रोत्साहन’’ विषयक कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा किहमारे प्रदेश में मक्का की खेती तीनों मौसमों खरीफ, रबी एवं जायद में की जाती है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 7.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर मक्का की फसल की बोआई की गयी, जिससे 15.99 मिलियन टन उत्पादन प्राप्त हुआ तथा उत्पादकता 22.07 कुन्तल प्रति हेक्टेयर रही। कृषि मंत्री ने कहा कि हमारे प्रदेश में खरीफ मौसम में बोऐ जाने वाली मक्का के क्षेत्रफल का आच्छादन सबसे अधिक है किन्तु इसकी उत्पादकता रबी मौसम में बोये जाने वाली मक्का से कम है। हमे खरीफ मौसम में बोये जाने वाली मक्का की उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ रबी मौसम में उगायी जाने वाली मक्का के क्षेत्रफल में वृद्धि पर विचार करना होगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश के गोरखपुर, झाॅसी, ललितपुर, सोनभद्र, बस्ती, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, अमेठी, बाराबंकी, सुल्तानपुर, खीरी, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, सिद्धार्थ नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली एवं सीतापुर जनपदों की उत्पादकता प्रदेश औसत से कम है। उन्होंने कहा कि हमें कम उत्पादकता वाले जनपदों की उत्पादकता को बढ़ाने हेतु आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मक्का के मूल्य संर्वधन की जानकारी के अभाव में किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य नहीं मिल पाता है, इसके लिये व्यापक रूप से ब्लाक एंव जनपद स्तर पर प्रचार एवं प्रसार कार्यक्रमों को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। मक्का के अन्य प्रकारों में स्वीट कार्न, बेबी कार्न की खेती को प्रदेश में प्रचलित करने की आश्यकता है क्यांेकि यह फसल कम समय मंे तैयार हो जाती है। जिससे किसान अल्प समय में ही अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। स्वीट कार्न एवं बेबी कार्न की माॅग अंतराष्ट्रीय बाजार में भी अधिक है इसलिये इसकी खेती को बढ़ावा देकर विदेशी मुद्रा भण्डार को भी बढ़ाया जा सकता है।

श्री शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषकों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुनी किये जाने के लिये वचनबद्ध है, इसके लिये हरसंभव प्रयास किये जा रहें हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं में प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना, मृदा स्वास्थ कार्ड, कृषि कल्याण केन्द्रों, डी.बी.टी. आदि प्रमुख है। किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज समय से उपलब्ध कराना एवंबीज पर अनुदान योजना के अन्तर्गत-खरीफ 2018 में 8.14 लाख कुंतल प्रमाणित बीज एवं 2.85 लाख कुंतल संकर बीज का वितरण कराया गया। रबी 2018-19 में 48.12 लाख कुंतल बीज वितरण लक्ष्य के सापेक्ष 50.04 लाख कुंतल की उपलब्धता कराते हुए 49.27 लाख कुंतल का वितरण किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा रबी 2018-19 में समस्त योजनाओं के अंतर्गत समस्त प्रकार के बीजों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान राज्य सेक्टर से दिये जाने का निर्णय लिया गया। भारत सरकार की बीज ग्राम योजनान्र्तगत धान्य फसलों पर 25 प्रतिशत एवं दलहनी/तिलहनी फसलों पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान राज्य सेक्टर से दिया गया। बुन्देलखंड क्षेत्र के कृषकों को खरीफ-2018 में विभिन्न फसलों के बीजों पर 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया गया जिससे खरीफ आच्छादन में गत वर्ष की तुलना में 1.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में वृद्धि दर्ज की गयी तथा अन्ना प्रथा में कमी आयी है।

कृषि मंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे देश व प्रदेश के वैज्ञानिकगण, नीति निर्धारक, अधिकारीगण, निजी कम्पनियों के प्रतिनिधि एवं कृषकगण अपने विचारों का आदान-प्रदान कर प्रदेश में मक्का उत्पादन की उन्नत तकनीकों एवं मूल्य संर्वधन के लिये एक प्रभावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायंेगे। इस अवसर पर अध्यक्ष उपकार, कैप्टन विकास गुप्ता (से0नि0), महानिदेशक उपकार, डा. बिजेन्द्र सिंह, कुलपति, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, प्रो. जे.एस.संधू, निदेशक, प्प्ब्त्.प्प्डत्, लुधियाना, डा. सुजय रक्षित, कृषि निदेशक, श्री सोराज सिंह एवं निदेशक, उ0प्र0 कृषि उत्पादन मण्डी परिषद, श्री जे0पी0 सिंह सहित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों तथा कृषि विश्वविद्यालय कानपुर/अयोध्या/मेरठ/बाँदा/प्रयागराज, कृषि विज्ञाान केन्द्रों, कृषि एवं तत्संबंधी विभागों के निदेशक, वैज्ञानिक एवं अधिकारीगण, निजी कम्पनियों (बीज एवं प्रसंस्करण) के प्रतिनिधितथा कृषक बंधुउपस्थित रहे।

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