योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, कोई भी पात्र पशुपालक योजना से वंचित न रहे- धर्मपाल सिंह
प्रदेश में नवीन राज्य योजना ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रभावी, पारदर्शी और पशुपालक हितैषी ढंग से लागू करने के लिए आज पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में पशुधन विभाग एवं बीमा कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। मंत्री ने सुझाव दिया कि बीमा प्रीमियम यथासंभव कम रखा जाए, ताकि पशुपालकों पर न्यूनतम आर्थिक बोझ पड़े और अधिक से अधिक पशुओं को बीमा सुरक्षा मिल सके।
श्री सिंह ने कहा कि बीमा कराने से लेकर क्लेम प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया सरल, सुविधाजनक और पारदर्शी होनी चाहिए। अनावश्यक तकनीकी औपचारिकताओं के कारण वास्तविक दावों को अस्वीकार न किया जाए तथा क्लेम का भुगतान समयबद्ध एवं निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित किया जाए। जनपद स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने और पॉलिसी संबंधी जानकारी पशुपालकों को तत्काल उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि योजना में राज्य सरकार की 85 प्रतिशत और लाभार्थी की केवल 15 प्रतिशत सहभागिता होगी। उन्होंने बीमा कंपनियों को 01, 02 और 03 वर्ष की अवधि के विकल्प उपलब्ध कराने तथा राज्य सरकार की योजनाओं एवं डेयरी उन्मुख योजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। विशेष रूप से नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों के क्रमशः 02, 10 और 25 स्वदेशी गायों के बीमा को प्राथमिकता देने को कहा।
योजना के तहत बड़े पशुओं में स्वदेशी/संकर दुधारू एवं भारवाहक पशु तथा छोटे पशुओं में सूकर, बकरी और भेड़ शामिल होंगे। एक परिवार के लिए 25 बड़े पशु इकाई तक बीमा कवरेज का प्रावधान है। एक बड़े पशु इकाई को 10 छोटे पशु इकाई के बराबर माना गया है। बैठक में पशुओं के अधिकतम मूल्य के संबंध में वर्गीकृत नस्ल की भैंस के लिए 75 हजार रुपये, गाय के लिए 65 हजार रुपये और छोटे पशुओं के लिए 6,500 रुपये तक के अधिकतम मूल्य पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि योजना की सफलता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ गांव स्तर तक पहुंच सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी पात्र पशुपालक जानकारी के अभाव में योजना से वंचित न रहे। आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रचार कराने तथा मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट की एंबुलेंस पर योजना से संबंधित प्रमुख बिंदुओं के स्टिकर लगाने के निर्देश दिए गए। योजना शुरू होने के बाद इसकी प्रगति की मासिक समीक्षा शासन स्तर पर की जाएगी।
अपर मुख्य सचिव, पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पशुओं का बीमा कराना नहीं, बल्कि संकट के समय पशुपालक को वास्तविक आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बीमा कंपनियों से कम प्रीमियम में बीमा उपलब्ध कराने तथा बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर क्लेम भुगतान सुनिश्चित करने की अपेक्षा की।
बैठक में विशेष सचिव पशुधन श्री विवेक श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रभारी पशुधन बीमा डॉ. पी.के. सिंह, विभागीय अधिकारी सहित ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस एवं एग्रीकल्चर इंश्योरेंस ऑफ इंडिया के अधिकारी उपस्थित रहे।




