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कोरोनावायरस के कारण एजुकेशनल सेक्टर बढ़ रहा डिजिटल एजुकेशन कि तरफ: सुश्री रूपल दलाल

कोविड-19 के प्रकोप के कारण देश भर में डर का माहौल बना हुआ है। कोविड-19 से कोई भी सेक्टर अप्रभावित नहीं रह पाया है। स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों को 31 मार्च तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। अधिकांश परीक्षाओं को रद्द या स्थगित कर दिया गया हैय लोग अपने असाइनमेंट और महत्वपूर्ण व्याख्यान को भी आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा रिपोर्टों में बताया गया है कि, अभी तक 130 लोगों में कोविड-19 के मामले सामने आ चुका हैं। और हर गुजरते दिन के साथ यह संख्या बढ़ रही है। इस स्थिति में सभी शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों, परिवारों और कर्मचारियों की स्पष्ट चिंताओं को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है और अप्रत्याशित व्यवधान से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में लोगों को सूचित करने की आवश्यकता है।

भारत की शिक्षा प्रणाली पर इसका बहुत ख़राब असर पड़ा है, और छात्र अपने नियमित शैक्षणिक दिनचर्या का पालन नहीं कर पा रहे हैं। इस आपात स्थिति के मद्देनजर और छात्रों की सुरक्षा और उनकी अकादमिक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, जेडी इंस्टीट्यूट ने ने लर्निंग के गैप को कम करने के लिए दूरसंचार, स्काइप कॉल, जूम कॉल और अन्य वर्चुअल ऑप्शन की सुविधा देने की पहल की है। जेडी इंस्टीट्यूट, छात्रों और शिक्षकों को वर्चुअल क्लासेज की सुविधा और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दे रहा है। निस्संदेह, यह छात्रों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय है । इसलिए, इस कदम का उद्देश्य छात्रों पर दबाव को कम करना है और गुणवत्ता से समझौता किए बिना उन्हें अपने समय का लाभकारी तरीके से उपयोग करने में मदद करना है ।

जेडी इंस्टीट्यूट, छात्रों को उनके कोर्स के पूर्व में रिकॉर्ड किए गए वीडियोस् प्रदान कर रहा है, इन वीडियोस् में शिक्षक द्वारा सब्जेक्ट्स और टॉपिक्स को विस्तृत तरिकें से समझाया जाता हैं। एक सप्ताह के बाद, छात्रों को अपने स्वयं के नोट्स तैयार करने के लिए कहा जाएगा, और स्काइप कॉल के द्वारा वे अपने डॉउट्स क्लियर कर सकते हैं। जेडी इंस्टीट्यूट प्रत्येक बैच के बच्चों के साथ 20-30 मिनट के ग्रुप कॉल के जरिए बात करेगी, ताकि कोविड-19 के कारण उनके पढ़ाई में को कमी न रह जांए। कोविड-19 के कारण आज शिक्षा क्षेत्र को डिजिटल मोड में स्थानांतरित करने के जरूरत का भी अहसास हो रहा है।

एजुकेशनल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम रही कंपनीया इस क्षेत्र में साकरात्मक बदलाव लाने कि कोशिश कर रही हैं। प्रौद्योगिकी की उपयोग से आज सभी उम्र के छात्रों को सीखने के नए मौके मिल रहे है और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से , वे बिना किसी बाधा के देश के किसी भी कोने में बैठकर पढ़ाई कर पा रहें हैं, अब उन्हें पढ़ाई पूरी करने के लिए क्लॉसरूम के भरोसे नहीं रहना पड़ रहा है। आज हम टेक्नोलॉजी के माध्यम से सिखने, सिखाने और सामाजिक क्रियाकलापों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को संबोधित कर सकते हैं, और इन परेशानियों से पार पा सकते हैं। आज टेक्नोलॉजी को परिवर्तन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में देखा जाता है। हमें उम्मीद है कि इस खतरनाक महामारी पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया जाएगा, लेकिन जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तबतक यह डिजिटल शिक्षण ही एक माध्यम है, जिसके जरिए हम शिक्षकों और छात्रों के बीच बनी दूरी को कम कर सकते हैं।

लेखक – सुश्री रूपल दलाल, जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के कार्यकारी निदेशक है।

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