गलत जांच रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज मुख्यमंत्री का आदेश दर्ज करें FIR और शुरू करें जेल भेजने की तैयारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 14 फरवरी 2026 को गोरखपुर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम के दौरान यह कड़ा रुख अपनाया। जब कुछ पीड़ितों ने शिकायत की कि पुलिस अधिकारियों ने उनके मामलों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय प्रभाव में आकर या लापरवाही के चलते गलत रिपोर्ट फाइल कर दी है, तो सीएम ने मौके पर मौजूद आला अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए।मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश: मुख्य बिंदुजांच अधिकारियों की जांच: सीएम ने कहा कि यदि किसी जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट गलत या भ्रामक पाई जाती है, तो केवल रिपोर्ट खारिज नहीं होगी, बल्कि उस अधिकारी के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाएगी।लापरवाही अक्षम्य: पीड़ितों की मदद में किसी भी तरह की हीलाहवाली या शिथिलता को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अक्षम्य (Unforgivable) माना जाएगा।निष्पक्ष निस्तारण: अधिकारियों को दो टूक समझाया गया है कि हर शिकायत का समाधान समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पूरी तरह से निष्पक्ष होना चाहिए।जमीन कब्जाने पर एक्शन: अवैध जमीन कब्जाने की शिकायतों पर भी विधि सम्मत कठोर कदम उठाने और दोषियों के साथ-साथ इसमें शामिल अधिकारियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।क्यों जरूरी था यह फैसला?अक्सर देखा जाता है कि पुलिस के निचले स्तर पर कुछ अधिकारी मामले को रफा-दफा करने या किसी पक्ष को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए फाइनल रिपोर्ट (FR) या जांच आख्या में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। सीएम योगी के इस फैसले से:भ्रष्टाचार पर लगाम: जांच के नाम पर होने वाले ‘खेले’ और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।आम जनता का विश्वास: पुलिस प्रशासन और सरकार की ‘न्याय’ की छवि आम जनता के बीच मजबूत होगी।जवाबदेही तय होगी: पुलिसकर्मी अब रिपोर्ट लगाने से पहले दो बार सोचेंगे कि उनकी एक गलत रिपोर्ट उन्हें खुद कठघरे में खड़ा कर सकती है।जनता दर्शन की अन्य बड़ी बातेंआर्थिक सहायता: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आए लोगों को सीएम ने आश्वस्त किया कि अस्पताल का एस्टीमेट प्रक्रिया पूरी होते ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद दी जाएगी।त्वरित समाधान: लगभग 150 लोगों की समस्याओं को सुनकर उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागों को फाइलें सौंपी।




