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महामहिम श्रीमती आनंदीबेन पटेल, राज्यपाल, उत्तर प्रदेश का सभी प्रदेशवासियों द्वारा हार्दिक स्वागत

            उत्तर प्रदेश के वासियों के लिए यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि महामहिम राज्यपाल के प्रदेश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी जैसी अनुभवी शिक्षाविद्, कुशल प्रशासिका तथा साहसी महिला असीन हुई है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश की आपने दूसरी महामहिम महिला राज्यपाल के रूप में 29 जुलाई 2019 को शपथ ली है। आजादी के बाद देश की पहली महिला राज्यपाल तथा देश की कोकिला के रूप में प्रसिद्ध महामहिम श्रीमती सरोजनी नायडू ने उत्तर प्रदेश के इस संवैधानिक पद को सुशोभित किया था। आप जैसी महान हस्ती को बारम्बार शत-शत नमन है।

            आपका जन्म 21 नवम्बर, 1941 में उत्तरी गुजरात के मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के खरोड़ गांव में हुआ है। आपको उच्च संस्कार अपने पिता पूज्यनीय श्री जेठाभाई पटेल तथा माता पूज्यनीया श्रीमती मीनाबेन से मिले हैं। आपके पिता एक गांधीवादी नेता थे उन्हें ऊँच-नीच तथा जाति प्रथा का विरोध करने के कारण गांव से निकाल दिया गया था। आनंदीबेन जी के जीवन पर अपने पूज्यनीय पिताजी के विचारों को बहुत प्रभाव पड़ा है। उस समय जब लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता था उनकी पूज्यनीया माताजी ने हमेशा उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। आपकी शुरूआती शिक्षा ऐसे स्कूल से हुई, जहां आपके अलावा शेष सात सौ विद्यार्थी लड़के थे। आपने स्नातक भी ऐसे कालेज से किया, जहां वह इकलौती छात्रा थी। आपने अहमदाबाद से विज्ञान विषय के साथ स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा क्षेत्र में गहरी अभिरूचि के कारण एम.एड. की भी पढ़ाई पूरी की।

            आप गुजरात के मोहनीबा प्राइमरी विद्यालय में एक अनुभवी तथा कुशल शिक्षिका रह चुकी है। आपने इस विद्यालय की प्रधानाचार्या का दायित्व भी कुशलतापूर्वक निभाया। आपको गुजरात में वर्ष 1988 में महामहिम राज्यपाल द्वारा राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एक वर्ष बाद आपको महामहिम राष्ट्रपति की ओर से अखिल भारतीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

            वर्ष 1987 की एक घटना में उनके स्कूल के छात्रों की पिकनिक के दौरान दो छात्राएं नर्मदा नदी में गिर गईं। उन्हें डूबता देखकर साहसी श्रीमती आनंदीबेन जी एक पल की भी देरी किये बिना उफनती नदी में कूद पड़ीं और दोनों छात्राओं को अपने साहस के बल पर जिंदा बाहर निकाल लाईं। इसके लिए श्रीमती आनंदीबेन जी को गुजरात सरकार ने वीरता पुरस्कार से नवाजा। आप एक अच्छी तैराक भी रही है। आपको एथलेटिक्स में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए ‘वीर बाला’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

            आपको बचपन से ही पक्षियों से बहुत लगाव है और बागवानी में अपना समय बिताना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। वे शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक रूप से सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक तथा शाकाहारी जीवन शैली को सफल जीवन के लिए आवश्यक मानती है। आपके पति आदरणीय श्री मफतभाई पटेल मनोविज्ञान के प्रोफेसर हंै। आपकी उच्च संस्कारों से ओतप्रोत दो संतानों के रूप में एक प्रिय बेटा श्री संजय पटेल और प्रिय बेटी अनार पटेल हंै।

            महिला जागरण तथा एक कुशल शिक्षाविद् के रूप में लोकप्रिय श्रीमती आनंदीबेन को दो बार राज्यसभा की सांसद बनकर पूरे देश की सेवा करने का अवसर मिला है। 1998 में वह पहली बार गुजरात के मंडल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई। गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री केशुभाई पटेल की सरकार में वह लोकप्रिय शिक्षा मंत्री के साथ ही बाल व महिला कल्याण मंत्री भी रही। इसके बाद वह लगातार विधायक रही। इस दौरान उनके पास राजस्व, शिक्षा व शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयांें की जिम्मेदारी रही। अपार सेवा भावना के कारण आपने गुजरात सरकार की कई समितियों के अध्यक्ष पदों का दायित्व भी कुशलतापूर्वक निभाया। आपने गुजरात के स्थानीय सरकारी अधिकारियों से मिलने और कार्यों के शीघ्र निष्पादन के उद्देश्य से राज्य भर में बड़े पैमाने पर यात्रायें की हैं।

            महामहिम श्रीमती आनंदीबेन पटेल एक कुशल प्रसाशक है। वे एक निडर महिला हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से कभी पीछे नहीं हटतीं। दि इंडियन एक्सप्रेस के द्वारा वर्ष-2014 के शीर्ष 100 प्रभावशाली भारतीयों में उन्हें सूचीबद्ध किया गया था। वे गुजरात में ‘लौह महिला’ के रूप में जानी जाती हैं। साफ-सुथरी तथा अनुशासन प्रिय छवि आपकी सबसे बड़ी मजबूती है।

            देश के सबसे लोकप्रिय माननीय श्री नरेंद्र मोदी जब साल 2014 में प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने आपको अपने स्थान पर सबसे अधिक योग्य, अनुभवी तथा विश्वासपात्र गुजरात का माननीया मुख्यमंत्री चुनने के लिए अपना प्रबल समर्थन दिया। श्रीमती आनंदीबेन ने गुजरात जैसे समृद्ध प्रदेश की पहली महिला माननीया मुख्यमंत्री का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया। उसके बाद आपने मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल के पद को तथा छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल के अतिरिक्त पद को सुशोभित किया था।

            आपकी कुछ उपलब्धियों एवं पुरस्कारों का विवरण इस प्रकार हैं – पटेल जागृति मंडल मुम्बई द्वारा ‘सरदार पटेल’ पुरस्कार (1999), पटेल समुदाय द्वारा ‘पाटीदार शिरोमणि’ अलंकरण (2005), महिलाओं के उत्थान अभियान के लिए धरती विकास मंडल द्वारा विशेष सम्मान, श्री तपोधन ब्रह्म विकास मंडल द्वारा ‘विद्या गौरव’ पुरस्कार (2000) में प्राप्त हुआ। श्रीमती आनंदीबेन को शौर्य और वीरता के लिए चारूमति योद्धा पुरस्कार, अहमदाबाद की विजेता तथा अंबुभाई व्यायाम विद्यालय पुरस्कार (राजपिपला) की विजेता से सम्मानित किया गया है।

            आपने संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में चीन की राजधानी बीजिंग में वर्ष 1995 में आयोजित चतुर्थ विश्व महिला सम्मेलन में कुशलतापूर्वक भारत का नेतृत्व करके सारे विश्व में महिला जागृति के अपने विश्वव्यापी, वैज्ञानिक तथा मानवीय विचारों द्वारा भारत का गौरव बढ़ाया था। आपका मानना है कि विश्व की आधी आबादी महिलाओं के बल पर सारे विश्व में नारी शक्ति के अभूतपूर्व जागरण की शुरूआत हो चुकी है। आप विश्व की प्रत्येक महिला को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रबल पक्षधर है। भारत के नारी सम्मान, वसुधैव कुटुम्बकम् की उदार संस्कृति, महान सभ्यता तथा सर्वधर्म समभाव के विचारों को वैश्विक मंच पर रखने के लिए मानव जाति सदैव आपकी ऋणी रहेगी।

            महामहिम राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश पधारने के लिए हम आपका बारम्बार पुनः हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं। आपके सादर पधारने से प्रदेशवासियों का अत्यधिक उत्साहवर्धन हुआ है। आप जैसी शिक्षाविद् महिला के नेतृत्व में हम सभी प्रदेशवासियों में यह विश्वास प्रबल हुआ है कि शिक्षा के द्वारा ही सामाजिक परिवर्तन लाया जा सकता है।

प्रदीप कुमार सिंह

सौजन्य से पंजीकृत यू पी न्यूज फीचर्स एजेन्सी

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