दिल्ली नहीं इस शहर में दीपावली पर AQI 1000 पार, जान लीजिए प्रदूषित शहरों की पूरी लिस्ट

रोशनी और उत्साह के पावन पर्व दीपावली के बाद पूरे देश में जहाँ एक ओर जश्न का माहौल रहा, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण और सेहत के मोर्चे पर एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। आमतौर पर यह माना जाता है कि राजधानी दिल्ली और एनसीआर का क्षेत्र ही प्रदूषण के मामले में सबसे आगे रहता है, लेकिन इस बार के आंकड़ों ने सबको चौंका कर रख दिया है। दिल्ली के अलावा देश के कई अन्य शहरों में आतिशबाजी, पराली जलाने की घटनाओं और प्रतिकूल मौसम के चलते हवा इतनी जहरीली हो गई कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कुछ चुनिंदा इलाकों और शहरों में तो AQI का स्तर 1000 के आंकड़े को भी पार कर गया, जिससे लोगों का सांस लेना तक मुहाल हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए लोगों को घरों में रहने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
हवा में घुला जहर, क्यों खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है प्रदूषण का ग्राफ
दीपावली की रात हुई भारी आतिशबाजी और ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के करीब ही ठहर गए, जिससे एक मोटी और जहरीली परत ने पूरे आसमान को घेर लिया। पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा तय मानकों से कई गुना अधिक दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा की रफ्तार कम हो जाती है, जिससे कारखानों का धुआं, वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और पराली का धुआं मिलकर वातावरण को पूरी तरह से अपवित्र कर देते हैं। इस दमघोटू माहौल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में भी ऐसे मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल देखने को मिला है जो वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से पीड़ित हैं।
देश के टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहर और उनकी वायु गुणवत्ता की स्थिति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में देश के कई शहर गैस चैंबर में तब्दील हो चुके हैं। आइए नजर डालते हैं देश के उन टॉप 10 प्रदूषित शहरों की सूची पर जहां हवा सबसे ज्यादा जहरीली दर्ज की गई है:
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR के कुछ विशेष हिस्से / गाजियाबाद-नोएडा बेด): जहाँ कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर और व्यक्तिगत मॉनिटरिंग में आंकड़े 1000 के करीब या उसे पार दर्ज किए गए।
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दिल्ली: जहाँ समग्र औसत AQI 450 से 480 के गंभीर श्रेणी के बेहद करीब बना रहा।
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हरियाणा का फरीदाबाद और गुरुग्राम: औद्योगिक इकाइयों और वाहनों के दबाव के कारण यहाँ हवा बेहद खराब श्रेणी में रही।
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बिहार का पटना और मुजफ्फरपुर: राज्य के इन प्रमुख शहरों में धूल और स्थानीय कारकों के चलते वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
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उत्तर प्रदेश का मेरठ और बुलंदशहर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन जिलों में पराली के अवशेष और आतिशबाजी के कारण हालात चिंताजनक बने रहे।
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राजस्थान का भिवाड़ी और बीकानेर: औद्योगिक बेल्ट होने के कारण यहाँ प्रदूषण का ग्राफ हमेशा उच्च स्तर पर रहता है।
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मध्य प्रदेश का ग्वालियर: भौगोलिक स्थिति और ठंड के असर से यहाँ हवा में प्रदूषण के कण जमे रहे।
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पंजाब का अमृतसर और लुधियाना: कटाई के बाद के अवशेषों और त्योहारी धुएं ने हवा को भारी बना दिया।
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झारखंड का धनबाद: कोयला खदानों और औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव से हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है।
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पश्चिम बंगाल का कोलकाता: काली पूजा और दीपावली की रात आतिशबाजी के बाद यहाँ भी वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया।
प्रशासनिक कदम और नागरिकों के लिए जरूरी स्वास्थ्य परामर्श
बढ़ते प्रदूषण के इस विकराल रूप को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने ग्रएपी (GRAP) के कड़े नियमों को लागू कर दिया है। निर्माण कार्यों पर रोक, पुरानी गाड़ियों के संचालन पर सख्ती और सड़कों पर पानी का छिड़काव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि बढ़ते प्रदूषण पर कुछ लगाम लगाई जा सके। प्रशासन लगातार यह अपील कर रहा है कि नागरिक अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और मॉर्निंग वॉक या कसरत के दौरान विशेष सावधानी बरतें। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में और भी कड़े प्रतिबंध देखने को मिल सकते हैं, ताकि आम जनता को इस जहरीली हवा के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।




