40 लग्जरी विला, ₹6.16 करोड़ का निवेश और हर साल ₹1.80 करोड़ किराया: राजस्थान के IAS शिखर अग्रवाल और IPS प्रशाखा माथुर पर कसा ACB का शिकंजा!

राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में उस समय भारी हड़कंप मच गया जब राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह दंपत्ति—1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी 1995 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर—पर निजी रिसॉर्ट कंपनी से 40 लग्जरी विला और कॉटेज खरीदने तथा भारी वित्तीय लाभ अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे। महज ढाई साल की अवधि के भीतर एक ही ग्रुप की कंपनी से 6.16 करोड़ रुपये मूल्य की 40 संपत्तियां खरीदने और उन्हें उसी दिन उसी कंपनी को लीज पर देकर सालाना 1.80 करोड़ रुपये की कमाई करने के इस पूरे खेल का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों को पदों से हटाकर 'पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा' (APO) में डाल दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मामले की विस्तृत जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी है।
क्या है 40 विला और सालाना ₹1.80 करोड़ के किराए का पूरा खेल?
मीडिया और शुरुआती जांच रिपोर्टों के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दो बेटों और सास-ससुर के नाम पर 'अनंता' ब्रांड के तहत रिसॉर्ट संचालित करने वाली कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से कुल 40 लग्जरी कॉटेज और विला खरीदे गए:
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उदयपुर में 20 कॉटेज (सितंबर 2023): उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे गए। प्रत्येक कॉटेज की रजिस्ट्री कथित तौर पर केवल ₹15 लाख के मूल्य पर की गई।
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अलवर में 20 विला (मार्च 2026): अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे गए, जिनकी रजिस्ट्री लगभग ₹15 लाख से ₹16.5 लाख प्रति विला के भाव पर कराई गई।
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बाजार मूल्य से काफी कम दर: रियल एस्टेट विशेषज्ञों और शुरुआती जांच के अनुसार, इन लग्जरी विला की वास्तविक बाजार कीमत 1.5 करोड़ से 1.6 करोड़ रुपये प्रति विला आंकी जा रही है। आरोप है कि अफसरों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर करोड़ों की संपत्ति कौड़ियों के दाम रजिस्ट्री कराई।
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उसी दिन लीज बैक एग्रीमेंट: संपत्तियों की खरीद होते ही उसी दिन संबंधित कंपनी के साथ रजिस्टर्ड लीज एग्रीमेंट किया गया। इसके तहत उदयपुर के प्रत्येक कॉटेज का सालाना किराया ₹4 लाख और अलवर के प्रत्येक विला का किराया ₹5 लाख तय हुआ। इस तरह 40 विला से परिवार को हर साल लगभग ₹1.80 करोड़ का फिक्स रेंटल रिटर्न मिलना तय किया गया।
'जिस दिन मिली सरकारी रियायत, उसी दिन हुई 20 विला की रजिस्ट्री'
एसीबी द्वारा दर्ज प्राथमिक जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू 'क्विड प्रो क्वो' (Quid Pro Quo – लाभ के बदले लाभ) का सामने आया है।
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आरोप है कि शिखर अग्रवाल जब उद्योग, रीको, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) जैसे नीतिगत और नियामक पदों पर तैनात थे, तब उन्होंने संबंधित निजी कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण नियमों में भारी रियायतें दिलवाईं और अनिवार्य प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना स्वीकृतियां जारी कराईं।
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जांच एजेंसियों ने चिन्हित किया है कि 27 मार्च 2026 को जिस दिन उद्योग/वित्त विभाग से उक्त कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज (Concessional Financial Package) की मंजूरी जारी की गई, ठीक उसी दिन अलवर के अजबगढ़ रिसॉर्ट में 20 विला की रजिस्ट्री अग्रवाल परिवार के नाम पर की गई।
प्रॉपर्टी रिटर्न में छिपाए गए तथ्य: सास-ससुर और बेटों के नाम रजिस्ट्री
अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों (All India Services Conduct Rules) के तहत प्रत्येक आईएएस और आईपीएस अधिकारी को हर साल अपनी अचल संपत्ति का विवरण (Immovable Property Return – IPR) केंद्र और राज्य सरकार को सौंपना होता है।
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जनवरी 2026 में दाखिल किए गए प्रॉपर्टी रिटर्न में आईएएस शिखर अग्रवाल ने केवल 14 संपत्तियों का उल्लेख किया था, जबकि उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर के रिटर्न में शून्य अचल संपत्ति दर्ज थी।
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40 विला की रजिस्ट्रियों में पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए दोनों बेटों, आईएएस अधिकारी, उनकी पत्नी और सास-ससुर (रघुवंश नारायण माथुर और मंजुला माथुर) के नामों को शामिल किया गया।
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एसीबी अब इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या यह मामला आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) अर्जित करने और बेनामी संपत्ति लेनदेन के दायरे में आता है।
सरकार की कड़ी कार्रवाई: दोनों अधिकारी APO, विपक्ष ने की CBI-ED जांच की मांग
मामला उजागर होते ही राजस्थान सरकार ने तत्काल प्रभाव से शिखर अग्रवाल को अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग व एमएसएमई) पद से हटाकर एपीओ कर दिया और इसके बाद उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर (एडीजी, पुलिस आधुनिकीकरण एवं कल्याण) पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें एपीओ कर दिया गया।
वहीं, इस मामले ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल सहित विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि करोड़ों के इस विला सौदे और कंपनी को दिए गए भारी रियायती पैकेज की जांच केवल राज्य एसीबी तक सीमित न रखकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपी जानी चाहिए, ताकि इस लेन-देन में शामिल मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
इस पूरे घटनाक्रम, विला खरीद के दस्तावेजों और एसीबी जांच की विस्तृत रिपोर्ट देखने के लिए NDTV Rajasthan की वीडियो रिपोर्ट देखें।
यह वीडियो राजस्थान के आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी से जुड़े 40 लग्जरी विला सौदे, लीज एग्रीमेंट और एसीबी द्वारा शुरू की गई जांच के प्रमुख तथ्यों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।




