कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने मंत्रालयों को दिए पुराने और बेकार मामले वापस लेने के निर्देश

भारतीय न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत ही अहम, दूरगामी और प्रशासनिक सुधार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। देश की अदालतों में लंबित मुकदमों के विशाल अंबार और मुकदमों के भारी-भरकम बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन (T.V. Somanathan) ने देश के सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे अपने-अपने मंत्रालयों से जुड़े ऐसे तमाम पुराने और लंबित मामलों की तुरंत पहचान करें जिन्हें कानूनी ढांचे में हुए बदलावों के बाद अब वापस लिया जा सकता है। सरकार के इस बड़े प्रशासनिक कदम का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या को तेजी से घटाना और अनावश्यक कानूनी लड़ाइयों पर लगने वाले सरकारी समय व धन की बर्बादी को रोकना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सरकार के इस फैसले के पीछे की वजह क्या है और किन विभागों में सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं।

जन विश्वास अधिनियम और कानूनी सुधारों के बाद उठाया गया बड़ा कदम

केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह नवीनतम कदम मुख्य रूप से 'जन विश्वास अधिनियम' (Jan Vishwas Act) के तहत उठाए गए ऐतिहासिक सुधारों की कड़ी का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने विभिन्न केंद्रीय कानूनों के तहत आने वाले कई छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalize) कर दिया है और पुराने पड़ चुके दंडात्मक प्रावधानों को या तो खत्म कर दिया है या उन्हें अधिक तर्कसंगत बनाया है।

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सभी संबंधित विभागों को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे नवंबर महीने के अंत तक इस पूरी समीक्षा प्रक्रिया को पूरा कर लें। सरकार का मानना है कि चूंकि कई कानूनों में बड़े संशोधन हो चुके हैं और कई पुराने प्रावधान अब पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुके हैं, इसलिए उन कानूनों के आधार पर अदालतों में चल रहे पुराने मुकदमों को खींचने का कोई औचित्य नहीं बनता है। ऐसे मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए ताकि न्यायपालिका का कीमती समय और सरकारी तंत्र की ऊर्जा बचाई जा सके।

भारत सरकार के मंत्रालयों में लंबित मामलों का विशाल अंबार: एक नजर आंकड़े पर

सरकारी आंकड़ों और ब्यौरों के अनुसार, वर्तमान समय में केंद्र सरकार से जुड़े 3.5 लाख से अधिक मामले पांच साल से भी ज्यादा लंबे समय से देश की अदालतों में लंबित पड़े हुए हैं। इन विशाल आंकड़ों में अकेले 19 विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) में चल रहे एक लाख से अधिक पुराने यानी लेगेसी (Legacy) मामले भी शामिल हैं।

हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय प्रेजेंटेशन के मुताबिक, केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 5 साल से अधिक समय से लंबित मामलों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • राजस्व विभाग (Department of Revenue): इस विभाग में 5 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों की संख्या सबसे अधिक यानी 1.27 लाख के पार है।

  • रेलवे मंत्रालय (Ministry of Railways): रेलवे से जुड़े मुकदमों की संख्या भी कम नहीं है, और यहां 45,583 मामले लंबित हैं।

  • सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs): रक्षा और सैन्य मामलों से जुड़े लगभग 32,464 मामले अदालतों में चल रहे हैं।

  • श्रम और रोजगार मंत्रालय: इस मंत्रालय के अंतर्गत लगभग 28,822 मामले अभी भी पेंडिंग हैं।

  • कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय: कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े 27,109 मामले इस लंबी फेहरिस्त का हिस्सा हैं।

इसके अलावा, अधिकारियों का यह भी कहना है कि भले ही सड़क परिवहन, रक्षा और दूरसंचार जैसे कुछ अन्य मंत्रालयों में लंबित मामलों की कुल संख्या थोड़ी कम दिखाई दे सकती है, लेकिन इन चुनिंदा मुकदमों से जुड़े वित्तीय परिणाम (Financial Stakes) बहुत ज्यादा बड़े और संवेदनशील हैं।

क्या है 'जन विश्वास' कानूनों का प्रभाव और मुकदमों की समीक्षा

केंद्र सरकार ने 2023 से लेकर 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में 'जन विश्वास' संशोधनों के माध्यम से देश के व्यापारिक और प्रशासनिक कानूनों को बहुत ज्यादा सरल बनाया है। इसके तहत कई ऐसे प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया जो केवल कागजी अनुपालन (Compliance) न होने पर भारी आपराधिक मुकदमे दर्ज करवाते थे।

अब चूंकि कानून बदल चुके हैं, इसलिए कैबिनेट सचिव ने सभी सचिवों को आगाह किया है कि वे अपने मंत्रालयों के कानूनी सलाहकारों के साथ बैठकर समीक्षा करें और उन मुकदमों की फेहरिस्त तैयार करें जो अब कानूनी रूप से बेमानी हो चुके हैं। इन मामलों को अदालतों से वापस लेने से न केवल सरकारी मशीनरी का बोझ कम होगा, बल्कि आम नागरिकों और निवेशकों को भी अनावश्यक कानूनी उलझनों से राहत मिलेगी।

नवंबर में लॉन्च होगा नया मुकदमा प्रबंधन पोर्टल (Litigation Management Portal)

मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जाने वाले इन कदमों की पारदर्शी तरीके से निगरानी करने के लिए सरकार एक बहुत बड़ा तकनीकी कदम उठाने जा रही है। सभी केंद्रीय सचिवों की एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने घोषणा की है कि इसी महीने (नवंबर) में एक समर्पित 'मुकदमा प्रबंधन पोर्टल' (Litigation Management Portal) लॉन्च किया जाएगा।

इस अत्याधुनिक पोर्टल के शुरू होने से कई बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है:

  1. समीक्षा और निगरानी: इस पोर्टल के जरिए विभिन्न मंत्रालयों में बने मुकदमा प्रबंधन सेल (Litigation Management Cells) के कामकाज की सीधी और डिजिटल मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

  2. पुराने मामलों का निपटारा: पुराने मुकदमों, अपीलों की स्थिति, मध्यस्थता (Mediation) के दायरे और मामलों की त्वरित स्क्रीनिंग करने में यह पोर्टल बेहद मददगार साबित होगा।

  3. नियमित अपडेट: सभी मंत्रालयों और विभागों को अनिवार्य रूप से इस पोर्टल पर अपने लंबित मामलों की ताजा स्थिति को समय-समय पर अपडेट करना होगा, जिससे किसी भी स्तर पर फाइलें लंबित न रहें।

सरकार के इस बहुआयामी और कड़े प्रशासनिक रुख से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में अदालतों में लंबित सरकारी मुकदमों की संख्या में भारी कमी देखने को मिलेगी, जिससे प्रशासनिक और न्यायिक सुधारों की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

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