सरदार पटेल की छवि को नुकसान पहुंचा रहे अमित शाह

देश के पहले गृह मंत्री 'लोह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर देश की राजनीति में ऐतिहासिक हस्तियों और उनके योगदान को लेकर एक बार फिर बड़ा जुबानी जंग छिड़ गया है। गुजरात के केवड़िया में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए एक बयान पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमित शाह ने अपने संबोधन में आरोप लगाया था कि देश की आजादी के बाद की सरकारों ने सरदार पटेल के अप्रतिम योगदान को मिटाने और उन्हें इतिहास के पन्नों से 'साइडलाइन' करने का काम किया। इस बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का राजनीतिकरण कर रहे हैं तथा अपने बयानों के जरिए सरदार पटेल जैसी महान शख्सियत की गरिमा और छवि को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अमित शाह का बयान: इतिहास के पन्नों में पटेल के योगदान को भुलाने की हुई कोशिश
गुजरात के केवड़िया स्थित 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के प्रांगण से देश को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद 500 से अधिक देशी रियासतों का भारत संघ में विलय कराने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को वह सम्मान नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे। अमित शाह ने कहा कि एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश के एक विशेष परिवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने के लिए पटेल को भारत के मुख्यधारा के इतिहास से गायब करने का प्रयास किया गया। गृह मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने सरदार पटेल को उनका वास्तविक स्थान दिलाने का काम किया है, चाहे वह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण हो या फिर 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में उनकी जयंती को देशव्यापी उत्सव बनाना हो।
कांग्रेस का जोरदार पलटवार: राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ रही भाजपा
केंद्रीय गृह मंत्री के इस बयान के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मीडिया प्रभारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमित शाह के दावों की धज्जियां उड़ाईं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और अन्य प्रवक्ताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा है, इसीलिए वे स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों पर अपना झूठा अधिकार जताने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि सरदार पटेल जीवन भर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कर्मठ सिपाही और जवाहरलाल नेहरू के निकटतम सहयोगी रहे। पार्टी ने आरोप लगाया कि अमित शाह राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए सरदार पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू के अटूट संबंधों को गलत रोशनी में पेश कर रहे हैं, जिससे सरदार पटेल की स्थापित विरासत और छवि को ही ठेस पहुंच रही है।
नेहरू और पटेल के ऐतिहासिक रिश्तों पर फिर छिड़ी देशव्यापी बहस
सरदार पटेल की जयंती के इस मौके पर एक बार फिर भारत के दो महान जननायकों—पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल—के आपसी संबंधों और उनकी नीतियों पर देश के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश को एक सूत्र में पिरोने और लोकतांत्रिक नींव मजबूत करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था। वहीं दूसरी तरफ, भाजपा का तर्क है कि अगर सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री बने होते, तो कश्मीर विवाद समेत कई अन्य कूटनीतिक समस्याएं बहुत पहले ही हल हो गई होतीं। यह वैचारिक टकराव अब केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित न रहकर आधुनिक चुनावी राजनीति का मुख्य मुद्दा बन गया है।
राष्ट्रीय प्रतीकों पर खींचतान और आगामी चुनावों से पहले गरमाती राजनीति
देश के राष्ट्रीय नायकों और उनकी विरासत पर कब्जा जमाने और एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की यह होड़ आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'राष्ट्रीय एकता दिवस' जैसे मौकों पर होने वाली यह बयानबाजी विभिन्न राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों और देश की वैचारिक दिशा को प्रभावित करने का एक सुनियोजित प्रयास है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल सरदार पटेल के सम्मान को पुनः स्थापित करने का श्रेय ले रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे देश के वास्तविक इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की साझी विरासत से छेड़छाड़ बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है।




