देश भर में मौसम का बड़ा उलटफेर: 20 राज्यों में एक्टिव हुआ वेस्टर्न डिस्टरबेंस और मानसूनी सिस्टम, 60 किमी/घंटा की तूफानी हवाओं का अलर्ट

भारतीय उपमहाद्वीप के वायुमंडल में आगामी 24 घंटे के भीतर एक अभूतपूर्व मौसमी हलचल दर्ज होने जा रही है, जिसके चलते उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक देश के 20 से अधिक राज्यों में मौसम का मिजाज 180 डिग्री बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा अखिल भारतीय चेतावनी बुलेटिन के अनुसार, एक तरफ उत्तर भारत के क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और उससे प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण असर दिखा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई के तुरंत बाद प्रायद्वीपीय भारत पर उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) ने प्रचंड दस्तक दे दी है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने एक गहरे कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) और तटीय चक्रवाती हवाओं के तंत्र ने पूरे देश के मौसम को अस्थिर कर दिया है। इस तिहरे वायुमंडलीय संयोग के कारण अगले 24 से 48 घंटों के दौरान देश के 20 प्रमुख राज्यों में 45 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की खतरनाक रफ्तार से आंधी चलने, बादलों की भीषण गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली कड़कने और कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने का यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हवा की यह प्रचंड गति कमजोर ढांचों, पेड़ों और बिजली के खंभों को उखाड़ने के साथ-साथ सड़क और हवाई यातायात को भी प्रभावित कर सकती है।
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में थंडरस्टॉर्म का तांडव: दिल्ली-एनसीआर, यूपी, पंजाब और हरियाणा में धूल भरी आंधी का साया
उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के विशाल मैदानी भूभाग में कल का दिन धूल भरी आंधी और गरज-चमक के नाम रहने वाला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और समूचे एनसीआर—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सुबह से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी, जो दोपहर बाद या देर शाम तक घने काले बादलों में तब्दील हो जाएगी। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में 50 से 60 किमी/घंटे की गति से तेज धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पश्चिमी यूपी के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस और आगरा से लेकर मध्य यूपी के लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी और अयोध्या तक तेज थंडरस्टॉर्म और 40 से 60 किमी/घंटे के झोंकेदार अंधड़ का अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान गिरकर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होने का अनुमान है। वहीं पंजाब के गुरदासपुर, पठानकोट, जालंधर, लुधियाना और पटियाला तथा हरियाणा के करनाल, पानीपत, रोहतक, हिसार और अंबाला में तेज हवाओं के साथ बारिश और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी गई है। इस तूफानी मौसम के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में दिन के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट देखने को मिलेगी, जिससे लोगों को अचानक सिहरन भरी गुलाबी ठंड का अहसास होने लगेगा।
पहाड़ों पर बर्फबारी और लैंडस्लाइड की दोहरी मार: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में लुढ़का पारा
मैदानी इलाकों में बारिश और आंधी की मुख्य वजह पहाड़ों में सक्रिय हुआ मजबूत पश्चिमी विक्षोभ है, जिसने उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों को बर्फ की सफेद चादर में लपेटना शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के जोजिला पास, गुलमर्ग की अफरवात चोटी, सोनमर्ग, गुरेज घाटी और लद्दाख के ऊंचाई वाले दर्रों पर पिछले 24 घंटों में ताजा हिमपात दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, रोहतांग दर्रा, कुल्लू और मनाली की ऊपरी पहाड़ियों के साथ-साथ उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चोटियों पर भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में लगातार बारिश हो सकती है। इस बारिश और बर्फबारी के चलते पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन (Landslides) और चट्टानें खिसकने (Shooting Stones) का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसको देखते हुए चारधाम यात्रा और स्थानीय पहाड़ी राजमार्गों पर चलने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की गई है। मनाली और श्रीनगर जैसे शहरों में रात का तापमान लुढ़ककर 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में पारा शून्य से नीचे चला जाएगा।
दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून का रौद्र रूप: तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तटीय आंध्र में मूसलाधार बारिश
देश के दक्षिणी प्रायद्वीप में मौसम की तस्वीर उत्तर भारत से भी अधिक आक्रामक नजर आ रही है। बंगाल की खाड़ी से आ रही तीव्र नम हवाओं के चलते उत्तर-पूर्वी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिसने तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक को अपनी चपेट में ले लिया है। चेन्नई, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर, तंजावुर, नागपट्टिनम और कुड्डालोर के तटीय जिलों के लिए मौसम विभाग ने मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। इन तटीय क्षेत्रों में 50 से 60 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलेंगी और समुद्र में 3 से 4 मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठने की आशंका है, जिसके चलते मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है। केरल के इडुक्की, कोट्टायम, एर्नाकुलम और पथानमथिट्टा जिलों में पश्चिमी घाट के इलाकों में भारी से अति भारी बारिश के कारण स्थानीय नदियों के जलस्तर में अचानक उछाल और शहरी जलभराव की स्थिति बन सकती है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी दिनभर बादल छाए रहेंगे और शाम को गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।
मध्य और पूर्वी भारत में बदलेगा मिजाज: बिहार, झारखंड, राजस्थान, एमपी और ओडिशा में तेज हवाओं का पहरा
उत्तर और दक्षिण के अलावा देश का मध्य और पूर्वी हिस्सा भी इस मौसमी बदलाव से अछूता नहीं रहेगा। राजस्थान के पूर्वी जिलों—जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर, धौलपुर और सवाई माधोपुर में 30 से 40 किमी/घंटे की गति से चलने वाली धूल भरी हवाओं के साथ छिटपुट बारिश के आसार हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, चंबल, भिंड, मुरैना, भोपाल, उज्जैन, सागर और जबलपुर संभागों में स्थानीय संवहन बादलों के कारण 45 से 55 किमी/घंटे की आंधी और बादलों की गर्जना के साथ बारिश का अलर्ट है। पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीवान, गोपालगंज, पटना, गया, बक्सर और रोहतास जिलों में 40 किमी/घंटे तक की झोंकेदार हवाओं के साथ बिजली गिरने और हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताई गई है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर और धनबाद में भी तेज हवाओं का असर दिखेगा। वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, तटीय दक्षिण 24 परगना और ओडिशा के बालासोर, भद्रक, मयूरभंज, कटक और पुरी के तटीय इलाकों में बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती परिसंचरण के सीधे असर से 50 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तटीय हवाएं चलेंगी और भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कुल मिलाकर देश के 20 राज्यों में वायुमंडलीय दबाव का यह अचानक असंतुलन एक बड़े मौसमी बदलाव का गवाह बनने जा रहा है।
किसानों की पकी फसलों पर आफत और आम जनता के लिए IMD की लाइफ-सेविंग एडवाइजरी: जानिए क्या करें और क्या न करें?
मौसम विभाग द्वारा 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और बारिश की यह चेतावनी देश के कृषि क्षेत्र के लिए सबसे संवेदनशील समय पर आई है। इस समय उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में खरीफ फसलों—विशेषकर धान (Paddy), मक्का, बाजरा, सोयाबीन और मूंगफली की कटाई और थ्रेशिंग का कार्य अपने चरम पर है। 60 किमी/घंटे की तेज आंधी और बारिश से खेतों में खड़ी पकी फसलें गिर सकती हैं (Lodging Effect), जिससे दानों की चमक और पैदावार को भारी नुकसान पहुंच सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और मौसम विभाग ने किसानों को तत्काल सलाह दी है कि जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उसे खुले आसमान के नीचे छोड़ने के बजाय तुरंत तिरपाल या पॉलीथिन शीट्स से ढंककर सुरक्षित गोदामों में पहुंचाएं और खेतों में जल निकासी के रास्ते खोलकर रखें। वहीं आम नागरिकों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने आकाशीय बिजली (Lightning) से बचाव के कड़े नियम जारी किए हैं। आंधी-तूफान के समय किसी भी पुराने पेड़, बिजली के ट्रांसफार्मर, मोबाइल टावर या टीन शेड के नीचे खड़े होने से बचें। थंडरस्टॉर्म के दौरान घरों के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग बिजली के बोर्ड से निकाल दें और खुले मैदानों या छतों पर जाने से पूरी तरह परहेज करें। दोपहिया वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे 60 किमी की आंधी के दौरान हाईवे, फ्लाईओवर और पुलों पर गाड़ी की गति बेहद धीमी रखें ताकि तेज हवा के झोंके से संतुलन बिगड़ने का खतरा न रहे।




