मणिपुर में कटे हुए शव का सिर 4 दिन बाद हुआ बरामद, नागा संगठनों के भारी विरोध के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

मणिपुर (Manipur) में हुई हिंसा और क्रूरता के मामलों को लेकर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। राज्य के एक बड़े हिस्से में तब सनसनी फैल गई थी जब 10 अक्टूबर को एक व्यक्ति की निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। अब इस घटना से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हत्या के चार दिन बाद बुधवार देर रात पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने मृतक का कटा हुआ सिर बरामद कर लिया है। इस घटना को लेकर स्थानीय संगठनों और नागा समुदायों में भारी रोष देखा जा रहा था।

पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने तलाश कर खोजा सिर

मृतक की पहचान अजिनबोउ रिंगकामाई (Ajinbou Ringamai) के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, अजिनबोउ की हत्या के बाद से उनका सिर गायब था, जिसे ढूंढने के लिए पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की टीमों को विशेष तौर पर लगाया गया था। कई दिनों की कड़ी मशक्कत और सर्च ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों को इसमें सफलता मिली और बुधवार देर रात कटे हुए सिर को बरामद कर लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार की सुबह मृतक के सिर को पोस्टमार्टम के लिए इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल में भेज दिया गया है। इससे पहले, 11 अक्टूबर को रिंगकामाई का बिना सिर वाला शव इसी अस्पताल में लाया गया था, जिसके बाद से इलाके में तनाव का माहौल था।

बंदूकधारियों के हमले में हुई थी बेरहमी से हत्या

यह पूरी घटना उस वक्त हुई जब नागाओं के एक गांव पर कुछ अज्ञात संदिग्ध उग्रवादियों और बंदूकधारियों ने अचानक हमला बोल दिया था। इस हिंसक हमले के दौरान अजिनबोउ रिंगकामाई की अत्यंत निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद उनके शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया था और सिर गायब कर दिया गया था। इस वीभत्स घटना के सामने आने के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों में प्रशासन के खिलाफ తీవ్ర आक्रोश था। लोग लगातार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और मृतक का सिर बरामद करने की मांग कर रहे थे।

नागा संगठनों ने दी थी चेतावनी, किया था कड़ा विरोध

इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में नागा समुदायों के प्रमुख संगठन 'जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर' ने कड़ा रुख अपनाया था। संगठन ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि जब तक मृतक का कटा हुआ सिर बरामद नहीं किया जाता और उसका सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। बढ़ते दबाव और तनाव को देखते हुए सुरक्षा बलों ने अपनी खोजबीन तेज कर दी थी।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से मणिपुर में विभिन्न समुदायों, विशेषकर कुकी और नागा समूहों के बीच हिंसक झड़पों की घटनाएं सामने आती रही हैं। उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, नोनी और तामेंगलोंग जैसे जिलों में हुई हिंसा की इन वारदातों में अब तक 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फिलहाल, प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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