8th Pay commission 2026 : कर्मचारियों की सैलरी में 300 प्रतिशत के इजाफे का आया गणित, क्या मांग हो पाएगी पूरी?

HR Breaking News (New Pay Commission 2026) देश के अलग-अलग शहरों में नए वेतन आयोग की तरफ से बैठक की जा रही है। कर्मचारी संगठन यूनियन और अन्य हितकारी भी बैठक में भाग ले रहे हैं। बैठक में कर्मचारियों की तरफ से महंगाई भत्ता सालाना इंक्रीमेंट, पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर प्रमुखता से बात रखी जा रही है। पिछली बैठक चंडीगढ़ में संपन्न हो चुकी है और आने वाली बैठक बेंगलुरु में होगी। इसी बीच फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक नया आंकड़ा सामने आया है, जिससे कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 72000 रुपए प्रति महीना पहुंच जाएगी। 

एनसीजेसीएम की तरफ से रखी गई है ये डिमांड (NC JCM)

कर्मचारी संगठन एनसीजेसीएम की तरफ से 8वें वेतन आयोग में 3.833 के फिटमेंट की मांग रखी गई है। इससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18000 रुपए से बढ़कर 69000 रुपए प्रति महीना हो जाएगी। वहीं, कर्मचारियों की तरफ से सालाना इंक्रीमेंट भी डबल करने की मांग की जा रही है, जिसे 3 से बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, वेतन के ढांचे में भी बदलाव की डिमांड उठाई जा रही है। न्यूनतम वेतन तय करने में जरूरी आधारों के बदलाव के भी सुझाव हैं। 

बीपीएमएस ने रखी दूसरी डिमांड (BPMS)

कर्मचारियों के दूसरे संगठन बीपीएमएस की तरफ से 4 के फिटमेंट फैक्टर की डिमांड की गई है। अगर चार का फिटमेंट फैक्टर मिलता है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18000 रुपए से बढ़कर सीधी 72000 हो जाएगी, जिससे कर्मचारियों को बहुत अच्छा लाभ होगा। वहीं, इंक्रीमेंट को लेकर इनकी भी डिमांड एनसीजेसीएम की तरह ही है, जिसे सालाना 6% करने की मांग की गई है। वहीं न्यूनतम सैलरी के डिसाइड करने के तरीके में भी बदलाव की डिमांड की गई है। वहीं परिवार की गणना के लिए भी इकाई तीन से बढ़ाकर 5 करने की मांग की जा रही है। 

क्या मिल सकता है इतना फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor Update)
 

कर्मचारियों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर (fitment Factor) को लेकर खुलकर ज्यादा से ज्यादा डिमांड की जा रही है, परंतु इतना फिटमेंट फैक्टर मिलना व्यावहारिक नहीं दिखाई देता। पिछली बार 2.53 का फिटमेंट फैक्टर मिला था, जिससे न्यूनतम बेसिक (Minimum basic salary) सैलरी ₹7000 से बढ़कर 18000 रुपए हो गई थी। इस बार भी फिटमेंट फैक्टर 2 से 3 के बीच रहने की उम्मीद जताई जा रही है। सबसे ज्यादा 2.86 के फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा है। हालांकि आयोग की तरफ से मीटिंगों के बाद डिसाइड किया जाएगा कि कितना फिटमेंट फैक्टर रखा जाए और फिर रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंप दी जाएगी। इसके बाद सरकार उसे कुछ बदलाव करके या फिर बिना बदलाव के भी लागू कर सकती है।

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