महारत्न कंपनी NTPC का बड़ा दांव, अगले एक दशक में ₹17 लाख करोड़ का भारी निवेश; 30 GW न्यूक्लियर पावर क्षमता तैयार करने का मेगा प्लान

देश की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा उत्पादक और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) ने भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अभूतपूर्व विस्तार योजना की घोषणा की है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) गुरदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि एनटीपीसी अगले एक दशक (10 वर्षों) के भीतर लगभग ₹17 लाख करोड़ का विशाल पूंजीगत व्यय (Capex) करने की योजना बना रही है। इस महत्वाकांक्षी निवेश का मुख्य केंद्र केवल पारंपरिक कोयला आधारित बिजली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी न्यूक्लियर पावर (परमाणु ऊर्जा), बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा), एडवांस्ड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया जैसे भविष्य के ईंधनों में अपनी उपस्थिति को कई गुना बढ़ाने जा रही है। भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने और 24×7 निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लक्ष्य में यह निवेश मील का पत्थर साबित होगा।
2047 तक 30 GW न्यूक्लियर पावर क्षमता का विशाल लक्ष्य
इस मेगा निवेश योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू एनटीपीसी का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आक्रामक विस्तार है। कंपनी ने वर्ष 2047 तक कुल 30 गीगावाट (GW) न्यूक्लियर पावर क्षमता विकसित करने का दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया है। यह योजना भारत सरकार के 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय संकल्प में लगभग एक तिहाई योगदान देगी। अंतरिम चरण के रूप में कंपनी वित्त वर्ष 2036-37 तक करीब 6 GW परमाणु बिजली ग्रिड से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के साथ अपनी संयुक्त उद्यम कंपनी 'अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड' (ASHVINI) के जरिए एनटीपीसी इस सेक्टर में निजी और सार्वजनिक तकनीक के तालमेल से आगे बढ़ रही है। कंपनी ने मध्य प्रदेश के बसई और बिहार के बांका सहित देश के तीन प्रमुख राज्यों में नए परमाणु संयंत्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर ली है और उनकी सैद्धांतिक मंजूरी के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) व परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) को प्रस्ताव भेज दिया है।
थर्मल पावर, रिन्यूएबल और स्टोरेज: ऊर्जा सुरक्षा के तीन मजबूत स्तंभ
एनटीपीसी प्रबंधन के अनुसार देश की ऊर्जा व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए पारंपरिक थर्मल पावर (कोयला आधारित बिजली), स्टोरेज-सपोर्टेड रिन्यूएबल एनर्जी और न्यूक्लियर पावर एक त्रिकोणीय रक्षा कवच (Three Legs of Energy Security) का काम करेंगे। वर्तमान में एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता लगभग 91 गीगावाट है, जबकि करीब 37 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें लगभग 17 गीगावाट कोयला आधारित संयंत्र शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक अपनी कुल पोर्टफोलियो क्षमता को बढ़ाकर 150 GW और वित्त वर्ष 2036-37 तक 250 GW के विशाल स्तर पर पहुंचाना है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा सबसे तेजी से बढ़ेगा, जिसे वर्तमान के करीब 12 GW से बढ़ाकर 2032 तक 60 GW और 2037 तक 136 GW करने की योजना है। इसके साथ ही, बेसलोड डिमांड को संभालने के लिए कोयला आधारित क्षमता को भी मौजूदा 67 GW से बढ़ाकर लगभग 91 GW तक ले जाया जाएगा।
कार्बन डाइऑक्साइड और फ्लो बैटरी से ऊर्जा भंडारण में आत्मनिर्भरता की तैयारी
सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता और पीक ऑवर्स में बिजली की मांग पूरी करने के लिए एनटीपीसी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) पर विशेष फोकस कर रही है। कंपनी का मानना है कि केवल लिथियम-आयन बैटरी आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर वैकल्पिक तकनीकों का विकास जरूरी है। इसके तहत एनटीपीसी पंप्ड-स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) आधारित बैटरी और वैनेडियम-फ्लो बैटरियों पर काम कर रही है। कंपनी नवंबर के पहले पखवाड़े में अपनी पहली कार्बन डाइऑक्साइड बैटरी परियोजना को चालू करने की तैयारी में है। यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो इसे देश भर के बड़े सोलर पार्कों के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर तैनात किया जाएगा, जिससे विदेशी कच्चे माल और सेल आयात पर भारत की निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन मेथनॉल और अंतरराष्ट्रीय निर्यात की तैयारी
एनटीपीसी पारंपरिक ऊर्जा कंपनी से आगे बढ़कर भविष्य के स्वच्छ ईंधनों (Green Fuels) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में कदम रख चुकी है। आंध्र प्रदेश के सिम्हाद्री स्थित संयंत्र में ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित किया जा रहा है, जहां से ग्रीन मेथनॉल और ग्रीन अमोनिया का उत्पादन होगा। इस हब को समुद्री आपूर्ति और विदेशी खरीदारों से जोड़ने के लिए 20 किलोमीटर लंबी एक समर्पित पाइपलाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। एनटीपीसी इस ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल के निर्यात के लिए जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी के संभावित खरीदारों के साथ शुरुआती वाणिज्यिक बातचीत कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन को सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट के दायरे से बाहर निकालकर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक और आर्थिक रूप से व्यावहारिक ईंधन में बदलना है।
डेटा सेंटर, एआई और आर्थिक विकास से बढ़ती बिजली मांग को मिलेगा संबल
सीएमडी गुरदीप सिंह ने रेखांकित किया कि देश में आर्थिक विस्तार, विनिर्माण गतिविधियों में तेजी, अत्यधिक गर्मी और सबसे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व नए डेटा सेंटरों की स्थापना के चलते बिजली की खपत में अप्रत्याशित उछाल आया है। ऐसे समय में ग्रिड को 24 घंटे लगातार स्वच्छ और स्थिर बेसलोड बिजली उपलब्ध कराने के लिए न्यूक्लियर और थर्मल पावर का समन्वय अनिवार्य हो जाता है। एनटीपीसी द्वारा अगले एक दशक में किया जाने वाला ₹17 लाख करोड़ का यह रिकॉर्ड निवेश न केवल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लाखों नए रोजगार पैदा करेगा, बल्कि भारत को नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाते हुए एक ऊर्जा-आत्मनिर्भर महाशक्ति के रूप में भी स्थापित करेगा।




