नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर भड़के अशोक पंडित, कहा- सारी मर्यादाएं खो दीं

दिल्ली के प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयान ने एक नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का खुलकर समर्थन करने और खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताने वाले नसीरुद्दीन शाह के बयान पर मशहूर फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने तीखा पलटवार किया है। अशोक पंडित ने वरिष्ठ अभिनेता की भाषा और शैली की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन की तमाम मर्यादाएं और शिष्टाचार पूरी तरह खो दिए हैं। फिल्म जगत की दो जानी-मानी हस्तियों के बीच छिड़े इस वाकयुद्ध ने देश के राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब नसीरुद्दीन शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में अभिनेता ने जामिया मिलिया इस्लामिया के उन छात्रों के प्रति एकजुटता व्यक्त की जो साल 2006 से प्रतिबंधित अपनी चुनी हुई छात्र संस्था की पुनर्बहाली की मांग को लेकर भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं। शाह ने न केवल छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का बचाव किया बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। अपने बयान में उन्होंने असहमति जताने वाले नागरिकों को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ या ‘एंटी-नेशनल’ कहे जाने पर तंज कसते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था देश के नौजवानों का मनोबल तोड़ने और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने समाचार एजेंसियों से बातचीत में बेहद आक्रामक रुख अपनाया। पंडित ने कहा कि शाह लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आदी हो चुके हैं और उनके सार्वजनिक व्यवहार में गहरी कुंठा और हताशा नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ और पढ़े-लिखे कलाकार से इस तरह की भाषा और अमर्यादित आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। अशोक पंडित के अनुसार, नसीरुद्दीन शाह जिस प्रकार की शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने संवाद का बुनियादी शिष्टाचार खो दिया है। पंडित ने यह भी दावा किया कि शाह का यह आचरण सिर्फ राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी निजी असुरक्षा को दर्शाता है।
अशोक पंडित ने अपनी बातचीत के दौरान यह आरोप भी लगाया कि नसीरुद्दीन शाह और उनके विचार से सहमत रहने वाला एक खास तबका भारतीय सिनेमा में आ रहे वैचारिक बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’ और ‘धुरंधर’ जैसी जो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपार सफलता हासिल कर रही हैं, वे शाह जैसे लोगों की सोच और नैरेटिव से मेल नहीं खाती हैं। पंडित ने दावा किया कि इन फिल्मों को मिल रहे अपार जनसमर्थन के कारण ही वरिष्ठ अभिनेता में असुरक्षा और हीन भावना घर कर गई है। उनका मानना है कि जब दर्शक पुरानी विचारधारा से हटकर नए और वास्तविक मुद्दों पर आधारित सिनेमा को पसंद करने लगे हैं, तो इससे कुछ लोग बौखलाहट में देश विरोधी बयानों का सहारा ले रहे हैं।
बातचीत के दौरान अशोक पंडित ने विवाद को और बढ़ाते हुए नसीरुद्दीन शाह को चिकित्सकीय परामर्श लेने तक का सुझाव दे डाला। उन्होंने कहा कि जिस तरह से शाह कैमरे के सामने उत्तेजित होकर अपनी कुंठा निकालते हैं, उससे लगता है कि उन्हें किसी मनोचिकित्सक से अपनी जांच करानी चाहिए, क्योंकि उनका यह व्यवहार किसी सामान्य व्यक्ति जैसा नहीं लगता। इसके साथ ही पंडित ने शाह पर ‘अर्बन नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े’ तंत्र से जुड़े होने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि शाह इससे पहले भी इंडस्ट्री के कई अन्य सम्मानित कलाकारों और निर्देशकों के खिलाफ असंगत टिप्पणियां कर चुके हैं।
इस घटनाक्रम के बाद देश की राजधानी दिल्ली और मनोरंजन की नगरी मुंबई के सांस्कृतिक वातावरण में तीखी बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां छात्रों के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर नसीरुद्दीन शाह के बयान को वाजिब मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्थक अशोक पंडित के रुख की सराहना कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बॉलीवुड अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह देश के ज्वलंत राजनीतिक और वैचारिक संघर्षों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।




