दिल्ली की हवा में मामूली सुधार: AQI घटकर 223 पर पहुंचा, GRAP-1 की सख्ती के बीच शून्य हुए ‘सीवियर’ वाले इलाके

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के बाशिंदों के लिए प्रदूषण के मोर्चे पर हल्की राहत भरी खबर सामने आई है। पछुआ हवाओं की गति में आए बदलाव और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा लागू की गई ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के पहले चरण (GRAP-1) की पाबंदियों के बीच दिल्ली की हवा में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कम होकर 223 दर्ज किया गया है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी 'खराब' (Poor) श्रेणी में बना हुआ है, लेकिन सबसे बड़ी और सकारात्मक बात यह है कि राजधानी का कोई भी निगरानी केंद्र अब 'गंभीर' (Severe) या 400 के पार वाले डार्क रेड जोन में नहीं है। 'सीवियर' श्रेणी वाले इलाकों की संख्या शून्य पर आ जाने से सांस और दमा के मरीजों को लगातार घुटते दम से कुछ हद तक सुकून मिला है।
300 के पार से लुढ़ककर 223 पर आया औसत एक्यूआई
बीते कुछ दिनों में जब तापमान में पहली गिरावट दर्ज की गई थी और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने लगी थीं, तब दिल्ली का औसत एक्यूआई 'बहुत खराब' (Very Poor) यानी 300 के पार पहुंच गया था। कई प्रमुख हॉटस्पॉट्स जैसे आनंद विहार, वजीरपुर और जहांगीरपुरी में सूचकांक 400 से 450 के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। लेकिन पिछले 24 से 36 घंटों में धरातलीय हवाओं की गति 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटा रहने के कारण वातावरण की निचली सतह पर जमा प्रदूषक तत्व (PM 2.5 और PM 10) कुछ हद तक छंटने में कामयाब रहे हैं। इसके चलते समग्र वायु गुणवत्ता 223 के स्तर पर सिमट गई है, जो कि 'खराब' श्रेणी का निचला दायरा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि हवा की यही रफ्तार दो दिन और बरकरार रहती है, तो एक्यूआई के स्तर में और 15 से 20 अंकों का सुधार देखा जा सकता है।
'सीवियर' वाले इलाके हुए शून्य: प्रमुख हॉटस्पॉट्स का ताजा हाल
दिल्ली भर में फैले 40 से अधिक ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी केंद्र पर प्रदूषण का स्तर 400 के पार यानी 'गंभीर' दर्ज नहीं हुआ है। कई ऐसे इलाके जो अमूमन लाल या गहरे लाल रंग में रंगे रहते थे, वे अब ऑरेंज यानी 'खराब' श्रेणी में आ चुके हैं:
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आनंद विहार: 284 (पहले 400+ दर्ज हो रहा था)
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जहांगीरपुरी: 268 (गंभीर से घटकर खराब श्रेणी में)
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आरके पुरम: 215 (मध्यम से खराब के मुहाने पर)
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आईटीओ (ITO): 210 (यातायात के बावजूद सुधार)
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पंजाबी बाग: 242 (मध्यम स्तर के सुधार के साथ)
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लोधी रोड: 188 (मध्यम श्रेणी के करीब)
यद्यपि इन आंकड़ों को पूरी तरह सुरक्षित या स्वच्छ हवा नहीं कहा जा सकता, लेकिन पिछले सप्ताह की तुलना में वायुमंडल में धूलकणों और धुएं की सघनता में साफ तौर पर कमी आई है।
धरातल पर दिख रहा ग्रैप-1 (GRAP-1) का कड़ा पहरा
हवा में आए इस सुधार में ग्रैप के पहले चरण के तहत उठाए गए सख्त प्रशासनिक कदमों की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमों ने सड़कों पर धूल दबाने के लिए बड़े पैमाने पर एंटी-स्मॉग गन (Anti-Smog Guns) और वाटर स्प्रिंकलर्स तैनात किए हैं। निर्माण स्थलों पर 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स पर धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने लगाए जा रहे हैं। बिना तिरपाल ढके बिल्डिंग मटेरियल ले जाने वाले ट्रकों और 10 से 15 साल पुरानी पेट्रोल व डीजल गाड़ियों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस ने विशेष अभियान चला रखा है। खुले में कूड़ा और सूखी पत्तियां जलाने वालों पर सैटेलाइट और ड्रोन से निगरानी रखकर सीधे चालान काटे जा रहे हैं।
एनसीआर के पड़ोसी शहरों में क्या है हवा का मिजाज?
दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सैटेलाइट शहरों में भी वायु गुणवत्ता में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। औद्योगिक और रियल एस्टेट गतिविधियों के केंद्र होने के कारण फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा में धूल का असर दिल्ली से थोड़ा अधिक है, लेकिन वहां भी कोई स्टेशन गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंचा है:
| शहर | वर्तमान AQI स्तर | श्रेणी |
|---|---|---|
| नोएडा | 212 | खराब (Poor) |
| ग्रेटर नोएडा | 238 | खराब (Poor) |
| गाजियाबाद | 225 | खराब (Poor) |
| गुरुग्राम | 195 | मध्यम (Moderate) |
| फरीदाबाद | 240 | खराब (Poor) |
गुरुग्राम में हवा की गति बेहतर रहने के कारण सूचकांक 200 से नीचे यानी 'मध्यम' श्रेणी में दर्ज किया गया, जिससे वहां के निवासियों को अन्य एनसीआर शहरों के मुकाबले ज्यादा साफ हवा नसीब हुई।
वायु गुणवत्ता के मानक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वर्गीकरण के अनुसार, 0 से 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 को 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब' और 401 से 500 को 'गंभीर' माना जाता है। 223 का वर्तमान स्तर भले ही खतरे के निशान से थोड़ा नीचे आया हो, लेकिन यह सांस के रोगियों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों के लिए अभी भी संवेदनशील है।
चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सुबह और देर शाम के समय जब तापमान गिरता है और प्रदूषक तत्व जमीन के करीब आ जाते हैं, उस दौरान भारी व्यायाम, जॉगिंग या आउटडोर वॉक करने से परहेज करें। बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और घरों के भीतर वेंटिलेशन का ध्यान रखते हुए इनडोर प्लांट्स या एयर प्यूरीफायर का सहारा लें। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और हवा की दिशा ही तय करेगी कि यह राहत कितने दिन तक टिक पाती है।




