पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर फिर कसा ‘फेल प्रोडक्ट’ वाला तंज; कांग्रेस को बताया ‘परजीवी’

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक प्रमुख राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति, आधुनिक अर्थव्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए विपक्षी खेमे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। पीएम मोदी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर सीधा निशाना साधा और कांग्रेस पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली को 'परजीवी' करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया एक नई और स्थिर वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, तब हमारे देश में कुछ ऐसे लोग और राजनीतिक दल सक्रिय हैं जो केवल अव्यवस्था और अस्थिरता का सपना देख रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व पर कड़ा कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि आखिर देश की सबसे पुरानी पार्टी कब तक एक 'फेल प्रोडक्ट' को बार-बार रीलॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती रहेगी। पीएम के इस संबोधन ने राष्ट्रीय राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक एक नई बहस छेड़ दी है।

'फेल प्रोडक्ट' को बार-बार री-लॉन्च कर रही कांग्रेस: सत्ता गंवाने के बाद व्यवस्था को नष्ट करने की साजिश

अपने धारदार संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पार्टी की वर्तमान राजनीतिक दशा पर विस्तार से प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज एक ऐसी परजीवी शक्ति बन चुकी है जो न तो खुद मजबूत हो पा रही है और न ही अपने सहयोगियों को आगे बढ़ने का कोई अवसर दे रही है। पीएम ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस की हताशा इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि उसे देश के भीतर सब कुछ बुरा, दोषपूर्ण और निराशाजनक दिखाई देने लगा है। स्थिति यह हो गई है कि पार्टी अब संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही नष्ट करने पर उतारू नजर आ रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका राष्ट्र निर्माण की होती है, लेकिन जब कोई दल केवल नकारात्मकता और संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने की राजनीति में जुट जाए, तो वह जनता का भरोसा पूरी तरह खो देता है। देश की जनता अब परिपक्व है और वह बार-बार विफल साबित हो चुके राजनीतिक प्रयोगों को सिरे से खारिज कर रही है।

'मत्स्य न्याय' को रोकने के लिए भारत बना ढाल: चाणक्य के प्राचीन श्लोक से पीएम ने दिया वैश्विक संदेश

प्रधानमंत्री ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात की पृष्ठभूमि में प्राचीन भारतीय नीतिशास्त्र और महान अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य के दर्शन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने चाणक्य के प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक 'अप्रणीतः तु मत्स्यन्यायमुद्भावयति' को उद्धृत करते हुए दुनिया को समझाया कि जब किसी समाज या विश्व में कानून और नियम-आधारित व्यवस्था का प्रभावी नियंत्रण समाप्त हो जाता है, तो वहां 'मत्स्य न्याय' यानी जंगलराज जन्म ले लेता है। मत्स्य न्याय का सीधा अर्थ है कि बड़ी और ताकतवर मछली छोटी मछली को निगलने लगती है। आज की अशांत दुनिया को ऐसे हालात से बचाने के लिए एक निष्पक्ष, मजबूत और नियम-आधारित व्यवस्था की सख्त जरूरत है। पीएम मोदी ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि भारत आज दुनिया के सामने इसी 'मत्स्य न्याय' को रोकने वाली एक नैतिक और संतुलित महाशक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि संकट की उस घड़ी में भारत ने बिना किसी स्वार्थ के 100 से अधिक देशों को जीवन रक्षक दवाएं और मुफ्त वैक्सीन पहुंचाकर अपनी वैश्विक बंधुत्व की प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया में साबित किया था।

ट्रेड वेपनाइजेशन और सी-रूट्स पर तनाव: संयुक्त राष्ट्र की घटती प्रासंगिकता पर उठाए गंभीर सवाल

बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) की गिरती प्रभावशीलता पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध की राख से जब यूएन जैसी संस्था का जन्म हुआ था, तब दुनिया की प्राथमिकताएं अलग थीं। उस समय देशों की संप्रभुता का सम्मान, शांतिपूर्ण सहयोग और विवादों का समाधान मुख्य आधार था। लेकिन आज 21वीं सदी में दुनिया की समस्याएं और युद्ध की प्रकृति पूरी तरह बदल चुकी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपने पुराने ढर्रे पर ही अटकी हुई हैं। पीएम ने चेताया कि आज वैश्विक व्यापार को एक हथियार (ट्रेड वेपनाइजेशन) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, समुद्री व्यापारिक मार्ग भू-राजनीतिक तनाव और हमलों के केंद्र बन चुके हैं और आधुनिक तकनीक को प्रभुत्व जमाने का साधन बनाया जा रहा है। जब दुनिया की चुनौतियां इतनी तीव्र गति से बदल जाएं और उनके समाधान की अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पुरानी व्यवस्था से बाहर न निकल पाएं, तो व्यवस्था में व्यापक अविश्वास और दूरियां पैदा होना स्वाभाविक है। इसलिए आज वैश्विक शासन व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और नई वास्तविकताओं को स्थान देना अनिवार्य हो चुका है।

ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज और विकसित भारत 2047: वैश्विक स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य का समापन भारत के दीर्घकालिक विजन और विकासशील देशों के अधिकारों की वकालत के साथ किया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार 'ग्लोबल साउथ' के उन देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठा रहा है, जिनकी चिंताओं को पश्चिमी और विकसित देश लंबे समय से नजरअंदाज करते आए हैं। वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प का उल्लेख करते हुए पीएम ने स्पष्ट किया कि 140 करोड़ भारतीयों का यह सपना केवल हमारे अपने आर्थिक उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक भारत पूरी दुनिया की स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और शांति के लिए सबसे बड़ी गारंटी बनकर उभरेगा। उन्होंने वैश्विक बिरादरी को आगाह करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल सुख और सामान्य दिनों की औपचारिकता नहीं हो सकता, बल्कि इसकी वास्तविक परीक्षा संकट के कठिन समय में ही होती है, और भारत हर संकट में दुनिया का सबसे विश्वसनीय साझीदार बनकर खड़ा रहेगा।

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