जेवर एयरपोर्ट, बड़ौत, खुर्जा और हापुड़ तक दौड़ेंगी हाई-स्पीड ट्रेनें, जानिए दिल्ली-एनसीआर में कैसे बदलेगा सफर का अंदाज


उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर को पूरी तरह बदलने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (RRTS) कॉरिडोर की सफलता के बाद अब 'नमो भारत' रैपिड रेल नेटवर्क का दायरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों तक विस्तारित किया जा रहा है। इस मेगा प्लान के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), बड़ौत, खुर्जा और हापुड़ जैसे रणनीतिक शहरों को नए हाई-स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ये सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें न केवल लाखों यात्रियों के दैनिक आवागमन को सुगम बनाएंगी, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक एकीकृत औद्योगिक और व्यापारिक हब में बदल देंगी।
जेवर एयरपोर्ट से खुर्जा, बड़ौत और हापुड़: जानिए नए आरआरटीएस कॉरिडोर का पूरा मास्टर प्लान
नमो भारत नेटवर्क के इस नए विस्तार में सबसे मुख्य आकर्षण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को मिलने वाली डायरेक्ट रैपिड रेल कनेक्टिविटी है। गाजियाबाद के स्वामी विवेकानंद आरआरटीएस स्टेशन से निकलने वाली एक विशेष लाइन ग्रेटर नोएडा, परी चौक और यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक जाएगी। इसके अलावा, बुलंदशहर जिले के औद्योगिक शहर खुर्जा को जेवर एयरपोर्ट और गाजियाबाद से जोड़ने के लिए स्पर लाइन का खाका तैयार किया गया है। वहीं बागपत जिले के कृषि और व्यापारिक केंद्र बड़ौत तथा गाजियाबाद-हापुड़ बेल्ट को दिल्ली-मेरठ मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए भी विशेष कनेक्टिविटी रूट प्रस्तावित किए गए हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट का उद्देश्य दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ को एक निर्बाध हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट ग्रिड से बांधना है।
160 किमी/घंटे की रफ़्तार और प्रीमियम सुविधाएं: समय की बचत के साथ प्रदूषण पर करारी चोट
नमो भारत रैपिड रेल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड है, जो परंपरागत मेट्रो रेल से काफी अधिक है। वर्तमान में गाजियाबाद से बड़ौत या खुर्जा जाने में सड़क मार्ग से दो से ढाई घंटे का समय लगता है, लेकिन नया कॉरिडोर बनने के बाद यह सफर घटकर महज 35 से 40 मिनट रह जाएगा। इसी तरह, जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली या मेरठ पहुंचने का समय आधा रह जाएगा। इन अत्याधुनिक ट्रेनों में वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग पोर्ट, प्रीमियम कोच, लगेज रैक और ऑटोमैटिक डोर ओपनिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मौजूद हैं। निजी वाहनों और बसों पर यात्रियों की निर्भरता कम होने से दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण और सड़कों पर लगने वाले घंटों लंबे ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और औद्योगिक विकास को मिलेगा अभूतपूर्व बूस्टर
रैपिड रेल का यह नया विस्तार सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक भूगोल को पूरी तरह बदलने वाला है। जेवर एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र, खुर्जा के पॉटरी उद्योग और हापुड़-बड़ौत के कृषि उत्पाद व्यापार को इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से सीधा लाभ पहुंचेगा। जिस तरह दिल्ली-मेरठ मार्ग पर साहिबाबाद, दुहाई और मोदीनगर के आसपास रियल एस्टेट की कीमतों और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में तेजी आई है, ठीक वैसा ही उछाल अब बड़ौत, हापुड़ और खुर्जा बेल्ट में देखने को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू विनिर्माण कंपनियां अब इन इलाकों में अपनी विनिर्माण इकाइयां और वेयरहाउस स्थापित करने के लिए आकर्षित होंगी क्योंकि कुशल श्रमिकों और अधिकारियों के लिए दैनिक आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।
मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी: एयरपोर्ट, मेट्रो, एक्सप्रेसवे और रेलवे का अनोखा संगम
एनसीआरटीसी और यूपी सरकार का मुख्य फोकस 'मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन' (Multimodal Transport Integration) पर है। इसका तात्पर्य यह है कि नमो भारत स्टेशनों को भारतीय रेलवे स्टेशनों, यूपीएसआरटीसी बस अड्डों, दिल्ली-नोएडा मेट्रो लाइनों और आगामी जेवर एयरपोर्ट से सीधे फुट-ओवर ब्रिज या वॉकवे के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को एक मोड से दूसरे मोड में स्विच करने के लिए सड़क पर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उदाहरण के लिए, हापुड़ या बड़ौत से आने वाला यात्री नमो भारत पकड़कर सीधे जेवर एयरपोर्ट के टर्मिनल के भीतर उतर सकेगा या आनंद विहार जाकर देश के किसी भी हिस्से के लिए ट्रेन पकड़ सकेगा। यह विश्वस्तरीय परिवहन मॉडल पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे आधुनिक कनेक्टिविटी हब बना देगा।
समयबद्ध सर्वे और फंडिंग मॉडल: जानिए कब तक पटरी पर दौड़ेगी नमो भारत
शासन स्तर पर इस योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और तकनीकी संभाव्यता (Feasibility Survey) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से इस विशाल परियोजना के लिए वित्तीय आवंटन की व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट-खुर्जा लिंक को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके लिए भूमि चिह्नांकन और स्टेशन लोकेशन्स का चयन किया जा रहा है। इसके तुरंत बाद बड़ौत और हापुड़ लिंक के सिविल कंस्ट्रक्शन का काम आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सभी आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद आगामी कुछ वर्षों के भीतर इन नए कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेनों का व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।



