गाजियाबाद की प्रथम नागरिक और मेयर सुनीता दयाल का मोबाइल फोन हुआ हैक

देशभर में साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब देश और राज्यों के वीवीआईपी, जनप्रतिनिधि और बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी इनके आसान शिकार बनते जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील शहर गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है। गाजियाबाद नगर निगम की महापौर यानी मेयर सुनीता दयाल का आधिकारिक मोबाइल फोन और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स साइबर ठगों द्वारा हैक किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के सामने आते ही स्थानीय प्रशासनिक अमले, पुलिस विभाग और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। एक जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह की डिजिटल सेंधमारी होना इस बात का प्रमाण है कि आम आदमी से लेकर खास लोग तक कोई भी आज के समय में साइबर अपराधियों की पहुंच से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के उच्च अधिकारियों और साइबर सेल की टीमों ने मामले की तह तक जाने के लिए तुरंत अपनी जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुआ इस साइबर सेंधमारी का खुलासा और ठगों ने क्या तरीका अपनाया?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब तक मेयर सुनीता दयाल को उनके फोन और सोशल मीडिया हैंडल के अनधिकृत कब्जे में जाने की भनक लगती, तब तक साइबर शातिर अपना जाल फैला चुके थे। फोन हैक होने के बाद ठगों ने उनके संपर्कों और सोशल मीडिया फॉलोअर्स को तरह-तरह के संदेश भेजने शुरू कर दिए, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके। इस तरह के मामलों में अमूमन यह देखने को मिलता है कि शातिर अपराधी किसी आपातकालीन स्थिति का बहाना बनाकर या आर्थिक मदद के नाम पर जान-पहचान के लोगों से पैसों की मांग करने लगते हैं। जैसे ही मेयर और उनके कार्यालय के सहयोगियों को इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत स्थिति भांप ली और बिना देर किए इसकी सूचना गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और साइबर क्राइम थाने को दी। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम तुरंत हरकत में आई और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस हैकिंग के पीछे देश के भीतर का कोई गिरोह सक्रिय है या इसके तार अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं।

मेयर सुनीता दयाल की जनता से अपील: किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही भेजें पैसे

इस अप्रत्याशित घटना के तुरंत बाद मेयर सुनीता दयाल ने खुद आगे आकर गाजियाबाद की जनता, अपने परिचितों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सभी से अपील की है कि उनके मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट्स से यदि पिछले कुछ घंटों में कोई भी ऐसा संदेश आया है जिसमें पैसों की मांग की गई हो या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा गया हो, तो उस पर बिल्कुल भी विश्वास न करें। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी व्यक्ति से पैसे की मांग नहीं कर रही हैं और उनके नाम पर आने वाले ऐसे सभी संदेश पूरी तरह से फर्जी और ठगों की चाल हैं। मेयर ने लोगों से आग्रह किया है कि आज के डिजिटल युग में थोड़ी सी सावधानी ही हमारा सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर कभी भी क्लिक न करें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खातों को खाली कर सकती है और आपको भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की सख्ती और तकनीकी सुरक्षा के कड़े निर्देश

गाजियाबाद की मेयर के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि साइबर सुरक्षा आज के समय में कितनी बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुकी है। आए दिन वीआईपी लोगों, राजनेताओं, व्यापारियों और आम नागरिकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स और मोबाइल फोन को क्लोन या हैक किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस घटना के बाद गाजियाबाद पुलिस प्रशासन और साइबर सेल पूरी तरह से मुस्तैद हो गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगों के इस पूरे नेटवर्क का जल्द ही पर्दाफाश किया जाएगा और इसमें शामिल आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करके कड़ी सजा दिलाई जाएगी। साथ ही, आम जनता के लिए भी यह एक बड़ी सीख है कि वे अपने स्मार्टफोन में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करें, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने ओटीपी या व्यक्तिगत दस्तावेज साझा न करें, और संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते बड़े फ्रॉड से बचा जा सके।

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